दिगंबर जैन समाज का विश्व शान्ति के लिए पाँचो मंदिरों में अर्चना

Nagaur. मार्दव का अर्थ अहंकार का मर्दन है। अहंकार हमें समर्पण से दूर ले जाता है और यह समर्पण से ही नहीं हमें हमारे श्रद्धा और अपने आराध्य से भी दूर ले जाता है

By: Sharad Shukla

Updated: 11 Sep 2021, 09:15 PM IST

नागौर. मार्दव का अर्थ अहंकार का मर्दन है। अहंकार हमें समर्पण से दूर ले जाता है और यह समर्पण से ही नहीं हमें हमारे श्रद्धा और अपने आराध्य से भी दूर ले जाता है।अहंकार सबसे ब?ी समस्या है।समर्पण ही इसका समाधान है। समाज के नथमल बाकलीवाल ने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म अहंकार के विसर्जन की प्रेरणा देता है। आत्मा और परमात्मा तथा भक्त और भगवान के बीच केवल अहंकार का ही झीना पर्दा है।यह पर्दा हटते ही भगवान से भक्त का साक्षात हो जाता है । आज हमारे देश में जो भी टकरावए दुरावए मन मुटाव हो रहे हैं ये सब अहंकार का ही परिणाम है। अगर केवल जैन समाज ही नहीं देश का हर व्यक्ति इस मार्दव धर्म को अपना ले तो हमारा देश फिर से समृद्ध देश बन सकता है। इसलिए जैन केवल धर्म नहीं है बल्कि जीवन पद्धति है जीने की एक कला है जिससे आदमी अपना स्वकल्याण कर सकता है व समाज में आज संयुक्त परिवारों को टूटने से बचाया जा सकता है केवल अहंकार छो?ने से।क्योंकि अहंकार किसी का ज्यादा दिन तक टिकता नहीं है रावण कंस दुर्योधन सबके उदाहरण हमारे सामने है अहंकार के कारण ही ये सब पतन को प्राप्त हुए। रमेश जैन ने कहा कि मान, लोभ आदि विकार सर्दी जुकाम की तरह है। इसलिए इन विकारों को मार्दव धर्म अपनाकर सर्दी जुकाम की तरह बाहर निकालने का सन्कल्प करना चाहिए। इससे समाज के उत्थान में सार्थक योगदान होगा। शाम को हुई आरती में समाज के श्रद्धालुओ ने हिस्सा लिया।
दिगंबर जैन समाज का विश्व शान्ति के लिए पाँचो मंदिरों में अर्चना की फोटो

Sharad Shukla Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned