नीलामी फिर फीकी, आधी भी नहीं बिकी दुकानें

पत्रिका न्यू•ा नेटवर्क
नागौर. शराब की शेष 72 दुकानों की दस अप्रेल को हुई नीलामी भी फीकी रही। 72 दुकानों में से केवल 34 की बिकवाली हुई। उनमें भी तीस दुकानें लगभग रिजर्व प्राइस पर बिकी, जबकि सरकार ने दुकानें जल्द से जल्द बिके इसके लिए काफी रियायत की थी।

By: Ravindra Mishra

Published: 11 Apr 2021, 10:52 AM IST

एक अप्रेल की नीलामी में बोलीदाता को विशेष राहत देते हुए बोली छूटने के बाद खरीदार के किसी कारण हटने पर दूसरे नंबर के ठेकेदार को उसकी रेट पर दुकान देना तक तय तक हो चुका था। दस अप्रेल को इन 72 दुकानों की नीलामी के दौरान 67 दुकानों की रिजर्व प्राइस और कम्पॉजिट फीस में बीस फीसदी की कमी तक कर दी गई। इसके बाद भी 38 दुकान नहीं बिक पाईं।
सूत्रों के अनुसार नीलामी पांच बार हो चुकी। ई-ऑक्शन से पहली बार हो रही नीलामी में खरीदारों के मोहभंग ने संभवतया सरकार को रेट कम करने पर मजबूर किया है। जिले में 273 दुकानें हैं। नीलामी के पांच चरण भी हुए पर 38 दुकानें फिर भी बाकी रह गईं। यानी पंद्रह फीसदी से अधिक दुकानें दो महीने चले मैराथन प्रयास के बाद भी बिक नहीं पाईं। असमंजस के साथ कोरोना काल का घाटा और नए सिस्टम में नुकसान की आशंका ने भी कई ठेकेदारों को लगता है, शराब के कारोबार से अलग कर दिया है। बताया जाता है दुकानों का एमाउंट बढ़ाना, कोरोना में बिक्री कम से घाटा ज्यादा लगने के साथ नए सिस्टम में पेनल्टी समेत अन्य ज्यादा की आशंका भी ठेकेदार को इससे दूर रख
रही है।

तीस के लिए एक-एक खरीदार
सूत्रों के अनुसार 34 में से 30 दुकानों के एक-एक खरीदार ही आए। ये रिजर्व प्राइस से पांच-पांच हजार रुपए अधिक में बिक गईं, जबकि शेष चार दुकानों में प्रत्येक के लिए तीन-चार खरीदार थे। हालांकि इनकी रेट काफी ठीक मिली। पांच चरण के बाद भी 38 दुकानें बची हैं। हालांकि सभी दुकानों की नीलामी का टारगेट तो कभी का पूरा हो चुका है। बताया जाता है दुकानों का एमाउंट बढ़ाना, कोरोना में बिक्री कम से घाटा ज्यादा लगने के साथ नए सिस्टम में पेनल्टी समेत अन्य ज्यादा की आशंका भी ठेकेदार को इससे दूर रख रही है।


ई-ऑक्शन में भी खेल
सूत्रों का कहना है कि ई-ऑक्शन में भी बोली का खेल हो रहा है। एक ही खरीदार पूल के हिसाब से अपने अथवा रिश्तेदार के अलग-अलग रजिस्ट्रेशन सबमिट करता है। बोली के खेल में कोई तीसरा न निकल जाए इसके लिए बोली बढ़ाई जाती है। सिरोही में एक दुकान दो करोड़ से शुरू होकर 21 करोड़ तक पहुंच गई, क्योंकि दुकान को या तो खुद लेनी थी या फिर दूसरे नंबर के खरीदार बनकर कम रेट पर उठानी थी। बस कोई और न ले, इसका खेल इन दिनों ज्यादा देखा जा रहा है।


इनका कहना है
&ई-ऑक्शन के पांचवे चरण में 72 में से 34 दुकानें उठी, अब 38 दुकानें शेष हैं। इनकी नीलामी जल्द होगी। यह पहला मौका है जब नीलामी को लेकर इतना समय लग रहा है, खरीदार कम आ रहे हैं।
मोहनराम पूनिया, जिला आबकारी अधिकारी नागौर

Ravindra Mishra
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