सिंचाई से बढ़ी नमी, हरियाली बनी सहायक तो जिले में बढ़ गया औसत बारिश का आंकड़ा

पिछले 10 वर्षों में जिले में औसत से 100 मिलीमीटर अधिक बारिश हुई
- 369.7 एमएम है नागौर जिले की औसत बारिश, लेकिन पिछले पांच साल की औसत बारिश रही 484.8 एमएम

By: shyam choudhary

Published: 20 Sep 2020, 11:28 AM IST

नागौर. पश्चिमी राजस्थान में स्थित नागौर जिला यूं तो रेगीस्तानी भू-भाग का ही हिस्सा है, जहां औसत बारिश काफी कम होती है। मौसम विभाग एवं राजस्व विभाग द्वारा तय की गई बारिश के अनुसार नागौर की औसत बारिश 369.7 मिलीमीटर मानी गई है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से जिले में औसत से अधिक बारिश होने लगी है। पिछले पांच साल की बारिश का औसत देखें तो 484.8 मिलीमीटर हो गया है, जबकि उससे वर्ष 2010 से पूर्व की औसत बारिश देखें तो 300 एमएम से भी कम रहा। यानी पिछले दस वर्षों में जिले में पिछले वर्षों की तुलना बारिश अच्छी होने लगी है, जो राहत की बात है। हालांकि यह बदलाव कुछ ही सालों से देखने को मिल रहा है, इसलिए इस पर रिसर्च चल रहा है, फिर भी मौसम विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान में सिंचाई के साधन बढऩे व पर्यावरण के प्रति जागरुकता आने से पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हरियाली, बारिश बढ़ाने के दो महत्वपूर्ण कारण हैं।

गौरतलब है कि जिले में वर्ष 2000 से 2009 तक दो वर्ष 2003 व 2008 ही थे, जिनमें 400 एमएम से अधिक बारिश हुई, बाकि अन्य सभी वर्षों में 400 एमएम से कम बारिश हुई। वर्ष 2002 व 2009 में तो जिले में 200 एमएम से भी कम बारिश हुई।

पहले डरते थे, अब पसंद करने लगे
गौरतलब है कि 20-25 वर्ष पहले तक पश्चिमी राजस्थान के नाम से लोग डरते थे। खासकर सरकारी नौकरी करने वाले लोग पश्चिमी राजस्थान के जिलों में अपनी पोस्टिंग कराने से कतराते थे, लेकिन इंदिरा गांधी नहर आने तथा थार में तेल निकलने के बाद पश्चिमी राजस्थान का परिदृश्य ही बदल गया है। अब लोग इन क्षेत्रों में जानबूझकर न केवल नौकरी करना चाहते हैं, बल्कि उद्योग धंधे, होटल व्यवसाय आदि में भी काफी रुचि दिखा रहे हैं, इसकी प्रमुख वजह भी वातावरण में आया बदलाव ही है।


जिले में अब तक हुई बारिश
तहसील - बारिश एमएम में
नागौर - 433
मूण्डवा - 430
खींवसर - 450
जायल - 552
मेड़ता - 822
रियांबड़ी - 573
डेगाना - 368
डीडवाना - 433
लाडनूं - 386
परबतसर - 522
मकराना - 558
नावां - 530
कुचामन - 388
जिले की औसत - 495.8

जिले 11 तहसीलों में औसत से अधिक बारिश
इस वर्ष जनवरी से अब तक हुई बारिश के आंकड़े देखें तो कुचामन व डेगाना तहसील के अलावा शेष 11 तहसीलों में औसत से अधिक बारिश हो चुकी है। वहीं नागौर, मूण्डवा, खींवसर, जायल, मेड़ता, रियांबड़ी व मकराना में पिछले पांच वर्ष की औसत बारिश से भी अधिक बारिश हुई है।


इस पर रिसर्च चल रहा है
हां, यह सही है कि पिछले कुछ वर्षों में नागौर सहित पश्चिमी राजस्थान एवं पश्चिमी भारत में बारिश का औसत बढ़ा है। उत्तर-पूर्वी भारत के सातों राज्यों में पहले की तुलना में बारिश में कमी हुई है, जबकि पश्चिमी भारत में बढ़ी है। हालांकि इस पर अभी रिसर्च चल रहा है, लेकिन प्रारम्भिक तौर पर जो कारण सामने आए हैं, उनमें सबसे प्रमुख सिंचाई के साधन बढऩा है। नहरों एवं नलकूपों आदि से काफी बड़े क्षेत्र में सिंचाई होने लगी है, जिसके चलते वातावरण में नमी बढ़ी है, जो बारिश का प्रमुख कारण मानी जाती है। इसके साथ पेड़ भी सहायक बने हैं। पेड़ धरातल से 20 से 30 फीट तक की नमी को सोखकर सूर्य से आने वाली गर्मी में सकारात्मक बदलाव पैदा करते हैं। ऐसे में जब मानसून स्थापित होता है तब पश्चिमी राजस्थान व पाकिस्तान में गर्मी के कारण कम वायु दाब का क्षेत्र बनता है, वही बारिश में सहायक बनता है।
- लक्ष्मणसिंह राठौड़, पूर्व महानिदेशक, मौसम विभाग, भारत सरकार

shyam choudhary Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned