scriptBan on transport of Nagauri calves up to three years | 22 वर्ष हो गए न सरकार की ऊंघ उड़ी, न बछड़ों की रोक हटी | Patrika News

22 वर्ष हो गए न सरकार की ऊंघ उड़ी, न बछड़ों की रोक हटी

- गंभीरता से सोचिए सरकार, वर्ना आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी समस्या होगी लावारिस गोवंश
- तीन साल तक के बछड़ों के परिवहन पर रोक होने से बड़े पशुओं के परिवहन में भी आती है परेशानी
सरकार की उदासीनता का नमूना : साढ़े छह साल पहले सरकार ने किया था मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन
नागौर की धरोहर : जिले में हर वर्ष आयोजित होते हैं तीन राज्य स्तरीय पशु मेले

नागौर

Published: January 11, 2022 10:36:41 am

नागौर. नागौर ही वो जिला है, जहां सबसे अधिक राज्य स्तरीय (नागौर, परबतसर व मेड़ता) एवं जिला स्तरीय पशु मेले आयोजित होते हैं। नागौरी नस्ल के बैल प्रदेश ही नहीं देशभर में प्रसिद्ध हैं और अपनी कद-काठी व मजबूती के लिए विशेष पहचान रखते हैं, लेकिन दूसरी ओर नागौर जिले में प्रदेश की सबसे अधिक गोशालाएं हैं। जाहिर है सबसे ज्यादा गोवंश भी यहीं हैं। गोवंश तो पहले भी भी अधिक था, लेकिन चिंता का विषय गोशालाएं हैं, जिनकी संख्या वर्ष दर वर्ष बढ़ रही हैं। यह संख्या इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि लावारिस गोवंश की संख्या बढ़ रही है, जो शहरों में दुर्घटना का सबब बन रहे हैं और गांवों में खरीफ की फसल को चौपट करने का वाला पशुधन। सैकड़ों गोवंश नेशनल हाइवे सहित अन्य सडक़ों पर खड़े रहते हैं, जिनके कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लोगों की जानें जाती हैं। इन सबसे निजात पाने के लिए सरकार एवं अधिकारी नित नए फरमान जारी करे हैं, लेकिन यदि इसके मूल कारण में जाकर उसका समाधान कर दिया जाए तो एक साथ कई समस्याएं हल हो जाएंगी और वो समाधान है, बछड़ों के परिवहन पर लगी रोक हटाना। अन्यथा ये समस्या कैंसर की तरह बढ़ती जाएगी और फिर समाधान करना भी चाहेंगे तो नहीं होगा।
गौरतलब है कि राजस्थान में अब बैलों से खेती नहीं होती है, लेकिन देश के ऐसे राज्य (उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा आदि) जहां धान व गन्ने की खेती होती है, वहां आज भी बैलों से जुताई और बुआई सहित अन्य कृषि कार्य किए जाते हैं, इसलिए वहां के पशुपालक नागौरी नस्ल के बैलों और बछड़ों को पसंद करते हैं और यहां खरीदने भी आते हैं, लेकिन हजारों रुपए खर्च करके जब वापस पशुओं के साथ जाते हैं तो उनके साथ मारपीट सहित कई क्रूर घटनाएं होती हैं, जिसका दुष्परिणाम मेलों पर पडऩे लगा है।
cattle fair Nagaur
बाबा रामदेव पशु मेला नागौर
किसानों व पशुपालकों की पीड़ा समझ नहीं आ रही तो ये आंकड़े देख लो सरकार
नागौर का श्री रामदेव पशु मेला
वर्ष - पशुओं की आवक
2007-08 - 16,669
2008-09 - 17,713
2009-10 - 15,401
2010-11 - 18,677
2011-12 - 14,221
2012-13 - 13,887
2013-14 - 11,468
2014-15 - 7,778
2015-16 - 7,502
2016-17 - 9,431
2017-18 - 7,987
2018-19 - 5,947
2019-20 - 4,783
2020-21 - 2180
जरा गंभीरता से सोचिए, क्योंकि आने वाले दिनों में सबसे बड़ी समस्या होगी
तीन साल तक के बछड़ों के परिवहन पर हाईकोर्ट के आदेश से लगी रोक के कई साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। पहला सबसे बड़ा साइड इफेक्ट तो पशु मेलों में गोवंश की आवक एवं बिक्री कम हो गई है। दूसरा, साइड इफेक्ट लावारिस गोवंश के रूप में सामने आ रहा है, बछड़ों की बिक्री नहीं होने से पशुपालक गोवंश को लावारिस छोड़ देते हैं, जिससे यह लावारिस गोवंश संख्या दिनों-दिन बढ़ रही है। इसके कारण किसानों की फसलें चौपट हो रही हैं।
कमेटी बनाने से काम नहीं चलेगा, परिणाम चाहिए
नागौर जिले को देशभर में पहचान दिलाने वाले नागौरी नस्ल के बैलों को संरक्षण के लिए राजनीतिक पार्टियों के नेता चुनावों में इस मुद्दे को भुनाने के अलावा कुछ नहीं कर रहे हैं। इसका सबूत राज्य सरकार द्वारा 15 मई, 2015 को गठित मंत्रिमंडलीय उप समिति है, जिसने साढ़े छह साल बाद भी न्यायालय का दरवाजा नहीं खटखटाया है, ऐसे में किसानों व पशुपालकों की पैरवी की उम्मीद करना बेमानी है।
22 साल हो गए रोक लगे, अब तो चेत जाओ
गौरतलब है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने जनवरी 2000 में आदेश देकर तीन वर्ष से कम उम्र के बछड़ों की राज्य से बाहर निकासी प्रतिबंधित कर दी थी। जिसके चलते मुख्य रूप से कृषि कार्य में काम आने वाला नागौरी गोवंश बाहर जाना बंद हो गया और लावारिस गोवंश की संख्या बढऩे लगी।
ट्रेन चले तो भी मिल जाए हल्की राहत
जिला मुख्यालय पर हर वर्ष आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय श्री रामदेव पशु मेले के दौरान नागौरी नस्ल के बैलों व बछड़ों को दूसरे राज्यों में ले जाने के लिए रास्ते में आने वाली परेशानी को लेकर हर बार ट्रेन चलाने की बातें होती हैं, लेकिन ट्रेन नहीं चल पा रही है। यदि ट्रेन चल जाए तो पशुओं का परिवहन सस्ता होगा और रास्ते की परेशानियों से भी निजात मिल जाएगी। आगामी 2 फरवरी से रामदेव पशु मेला आयोजित हो रहा है, इसके लिए जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को टे्रन की तैयारी अभी से करनी होगी।
केन्द्र सरकार से करेंगे बात
तीन साल तक के बछड़ों के परिवहन पर लगी रोक हटाने के लिए मैंने विधायक रहते हुए विधानसभा में मुद्दा उठाया था। तब सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप समिति का गठन किया था, लेकिन परिणाम नहीं मिला। अब इस मुद्दे को लेकर केन्द्र सरकार से बात करेंगे। जहां तक मेले के दौरान पशु परिवहन के लिए ट्रेन चलाने की बात है तो मैंने पिछली बार भी प्रयास किए थे, लेकिन ऐनवक्त पर व्यापारियों ने मना कर दिया। इस बार समय पर ट्रेन स्वीकृत कराने का प्रयास करेंगे।
- हनुमान बेनीवाल, सांसद, नागौर

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