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कोरोना की मार कहें या शिक्षा में जबरदस्त सुधार दो साल के भीतर सरकारी स्कूलों में बढ़े 73 हजार नामांकन

बदलाव
-संभवतया इतनी वृद्धि पहली बार

-करीब 22 फीसदी विद्यार्थी बढ़े, हर क्लास में बेटियों की संख्या ज्यादा, दसवीं बाद बालिका शिक्षा में गिरावट, निजी स्कूलों को छोड़ सरकारी विद्यालयों में प्रवेश लेने वाले 40 हजार से ज्यादा,जल्द होगा घर-घर सर्वे, और बढ़ेगा नामांकन

ग्राउण्ड रिपोर्ट

नागौर

Published: May 26, 2022 10:18:02 pm

संदीप पाण्डेय

नागौर. पढ़ाई के लिहाज से पिछड़े कहे जाने वाले सरकारी स्कूल अब बच्चों की शान बनने लगे हैं। सरकारी स्कूल के नाम पर मुंह छिपाने वाले पेरेंटस अब बच्चों को ताल ठोककर यहां एडमिशन करा रहे हैं। हालत यह है कि केवल दो साल के भीतर जिलेभर के सरकारी स्कूलों में 73 हजार से अधिक बच्चों की संख्या बढ़ी है। कुछ समय पहले हर सत्र में दस-पंद्रह हजार बच्चों की संख्या में कमी को सामान्य माना जाता था। इस अप्रत्याशित वृद्धि ने निजी स्कूलों की धाक कम कर दी है। बढ़े बच्चों में आधे से अधिक तो निजी स्कूल छोडक़र सरकारी में भर्ती हुए हैं। संभवतया पहली बार ऐसा हुआ है जब इस तरह की जबरदस्त वृद्धि हुई है।
school
admission
सूत्रों के अनुसार नागौर जिले में 3077 स्कूलों में सत्र 2021-22 में विद्यार्थियों की संख्या चार लाख 11 हजार 307 है। वर्ष 2020-21 में यह संख्या तीन लाख 74 हजार 336 थी, जबकि वर्ष 2019-20 में इनकी तादात तीन लाख 38 हजार 209 थी। इस तरह दो साल के भीतर करीब 73 हजार 98 विद्यार्थियों की बढ़ोत्तरी हुई है, जो अप्रत्याशित है। मार्च 20 के बाद इस वृद्धि ने हमेशा गिरते नामांकन पर ब्रेक लगा दिया है। इस तरह दो साल में जिले के सरकारी स्कूलों में 22 फीसदी विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
हमेशा घटता रहा है नामांकन

सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2017-18 में नामांकन तीन लाख 54 हजार 421 था जो वर्ष 2018-19 में करीब दस हजार घटकर तीन लाख 44 हजार 258 रह गया। इसके अगले वर्ष 2019-20 में करीब छह हजार विद्यार्थी कम होकर मात्र तीन लाख 38 हजार 258 रह गए। इसके अगले दो साल में 73 हजार से अधिक विद्यार्थी बढ़े जो कीर्तिमान सा है।
छात्राएं ज्यादा-छात्र कम

सूत्रों का कहना है कि आमतौर पर बेटों की तुलना में बेटियां कम हैं पर सरकारी स्कूलों को देखें तो कुछ और ही नजर आता है, यहां विद्यार्थियों की संख्या में बेटियां अधिक हैं। इसी सत्र 2021-22 में कुल चार लाख 11 हजार 307 में से छात्राओं की संख्या दो लाख 14 हजार 653 है जबकि छात्र एक लाख 96 हजार 652 हैं यानी 18 हजार से अधिक संख्या बेटियों की है। पहली से बारहवीं कक्षा की यही हालत है। कक्षा पहली से पांचवी तक में 90 हजार 482 छात्रों की तुलना में 98 हजार 388 छात्राएं, कक्षा छह से नवीं कक्षा में 55 हजार 777 छात्राओं की तुलना में छात्र 49 हजार 330 हैं। कक्षा नवीं-दसवीं में छात्रों की संख्या 29 हजार 658 है, जबकि छात्राओं की संख्या 32 हजार 728 है। ग्यारहवीं-बारहवीं में मामला कड़ी टक्कर का है, 27 हजार 182 छात्रों के मुकाबले छात्राएं 27 हजार 761 है। इससे यह भी साबित होता है कि दसवीं के बाद बालिका शिक्षा में थोड़ी गिरावट है।
प्राइवेट को बाय-बाय

सूत्रों की मानें तो कोरोना में मार्च 2020 के बाद चले लॉक डाउन, ऑन लाइन क्लास और फिर फीस को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी भी इसकी बड़ी वजह बनी। बंद स्कूलों की फीस के साथ आर्थिक संकट ही नहीं अन्य कारणों से भी पेरेंटस निजी स्कूलों से दूरी बनाने लगे। इधर, सरकारी स्कूलों में शिक्षा के साथ अन्य परिवर्तन/विकास ने उससे निकटता बढ़ा दी। यही कारण रहा कि दो साल के भीतर बढ़े 73 हजार में से करीब चालीस हजार विद्यार्थी तो वे हैं जिन्होंने निजी स्कूल छोडक़र सरकारी स्कूल का दामन थाम लिया।
घर-घर सर्वे, अंग्रेजी माध्यम पर जोर

सूत्र बताते हैं कि महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (अंग्रेजी माध्यम) बढ़े, जिले में इनकी संख्या करीब तीन दर्जन से अधिक हो गई है। इन स्कूलों में प्रवेश को लेकर आलम यह है कि एक सीट पर दस प्रवेशार्थी दावा करते हैं। पांच हजार से अधिक की आबादी में ये अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले जा रहे हैं। मिड डे मील, समेत नि:शुल्क शिक्षा/पुस्तकों के अलावा पढ़ाई के स्तर में हो रहे बदलाव के चलते सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है। अब नए सत्र के लिए जून में घर-घर सर्वे होगा, जिसमें पढ़ाई छोड़े बच्चों के साथ नए बच्चों को प्रवेशोत्सव में शामिल किया जाएगा। इस बार संख्या में और इजाफा होगा।
इनका कहना

महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। प्रवेशोत्सव के चलते घर-घर सर्वे समेत अन्य कार्यक्रम होंगे। हर स्तर पर सरकारी स्कूलों में सुधार हुआ है, जिससे अप्रत्याशित नामांकन बढ़ा है, अगले माह से तो और बढ़ेगा।
-राजेंद्र कुमार शर्मा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी नागौर

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पिछले दो सत्र में करीब 73 हजार से अधिक बच्चों का नामांकन बढ़ा। बालिका शिक्षा को लेकर भी काफी जागरूकता आई है, शिक्षा की गुणवत्ता के साथ हर तरह से सरकारी स्कूल आगे बढ़े हैं।
-बस्तीराम सांगवा, एडीपीसी, समग्र शिक्षा नागौर

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