सावधान! दीपावली पर आपने जो मिठाई खाई, उसकी रिपोर्ट अब आई

- सीमित संसाधन एवं स्टाफ की कमी के चलते आमजन के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

By: shyam choudhary

Published: 19 Jan 2019, 12:34 PM IST

नागौर. चौंकिए मत, सावधान होने की आवश्यकता है। यह बात शत-प्रतिशत सही है। दीपावली एवं उससे पहले लिए गए खाद्य पदार्थों के नमूनों की रिपोर्ट जोधपुर से करीब तीन माह बाद चिकित्सा विभाग को मिली है, जिसमें 33 प्रतिशत से अधिक नमूने ऐसे पाए गए हैं जिनकी रिपोर्ट ठीक नहीं है यानी वो खाद्य पदार्थ हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हुए। इससे स्पष्ट है कि दीपावली के सीजन पर आपने जो मिठाई खाई थी, उसमें या तो मिलावट थी या फिर उसकी गुणवत्ता ठीक नहीं थी। ऐसे में यदि आप अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क या सावधान नहीं हैं तो यह भी समझ लिजिए कि आपके खाने में जहर है।

नागौर चिकित्सा विभाग के खाद्य निरीक्षक एवं उनकी टीम ने वर्ष 2018 में जांच के लिए कुल 131 नमूने लिए, जिसमें 86 नमूने दूध एवं दूध से बने पदार्थ के थे और 45 नमूने अन्य खाद्य पदार्थों के थे। दूध एवं दूध से बने पदार्थों में से 29 की रिपोर्ट खराब (अपमिश्रित या मिसब्राण्ड) पाई गई है, जबकि 7 की रिपोर्ट अब भी आनी शेष है। इसी प्रकार अन्य खाद्य पदार्थों में 11 नमूने मिस ब्राण्ड या निम्न गुणवत्ता के पाए गए, जबकि 2 की रिपोर्ट अब भी नहीं आई है। इस प्रकार कुल 131 में से 40 नमूनों की रिपोर्ट में यह साबित हुआ है कि वे खाद्य पदार्थ हमारे स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं थे, लेकिन दुर्भाग्य यह है कि यह पता हमें अब चल रहा है, जबकि उन खाद्य पदार्थों का उपयोग हो चुका है।

न संसाधन, न मैन पॉवर, केवल खानापूर्ति
आमजन के स्वास्थ्य की फिक्र करने का दंभ भरने वाली सरकार के संसाधन एवं मैन पॉवर नाम मात्र रह गए हैं। नागौर की बात करें तो 17 हजार 718 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस जिले के 35 लाख से अधिक लोगों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी एक खाद्य निरीक्षक के भरोसे है। हालांकि यहां दो खाद्य निरीक्षकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक का पद लम्बे समय से रिक्त चल रहा है। जो कार्यरत हैं, उन्हें भी पुराने मामलों की सुनवाई के दौरान कभी प्रतापगढ़ तो कभी कहीं और न्यायालय में उपस्थित होने जाना पड़ता है। यही स्थिति संसाधनों की है। खाद्य पदार्थों के नमूने लेने के बाद उन्हें सील करके जोधपुर प्रयोगशाला भेजा जाता है, जहां से रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं।

जोधपुर प्रयोगशाला पर तीन प्रयोगशाला का भार
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पहले से काम के बोझ से दबी जोधपुर प्रयोगशाला पर अजमेर व जयपुर प्रयोगशाला का भी भार डाल दिया गया है। अजमेर व जयपुर में खाद्य विश्लेषक का पद रिक्त होने से जोधपुर प्रयोगशाला के खाद्य विश्लेषक पर दोनों प्रयोगशालाओं का अतिरिक्त भार है, ऐसे में वे कभी जोधपुर तो कभी जयपुर और अजमेर जाकर नमूनों की जांच करते हैं।

ज्यादा खराब होता है तो नष्ट करवाते हैं
खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण व नमूने लेने की कार्रवाई के दौरान मावा या मिठाई की गुणवत्ता ज्यादा खराब लगने पर मौके पर नष्ट करवाया जाता है, बाकी के नमूने लेकर जोधपुर प्रयोगशाला भेजे जाते हैं, जिनकी रिपोर्ट आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। गत वर्ष कुल 40 नमूने अपमिश्रित या मिसब्राण्ड पाए गए, उनमें से 16 को सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है। 9 की रिपोर्ट आनी शेष है।
- राजेन्द्र जांगीड़, खाद्य निरीक्षक, नागौर

shyam choudhary Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned