scriptChaitra Navratri starting today amidst special coincidences | विशिष्ट संयोगों के बीच आज से शुरू हो रही चैत्र नवरात्र | Patrika News

विशिष्ट संयोगों के बीच आज से शुरू हो रही चैत्र नवरात्र

Nagaur. दो अप्रैल से चेत्र नवरात्र इस बार विश्ेाष गृह संयोग में शुरू हो रही है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार के दिन रेवती नक्षत्र, ऐंद्र योग, बव करण तथा मीन राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रह नक्षत्रों का विशेष महत्व है। किस दिन किस नक्षत्र का संयोग बनने से क्या विशेष योग बन रहा है इस संबंध में ऋषि मुनियों ने अपने मत प्रस्तुत किए हैं।

नागौर

Published: April 01, 2022 11:02:36 pm

नागौर. दो अप्रैल से चेत्र नवरात्र इस बार विश्ेाष गृह संयोग में शुरू हो रही है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा शनिवार के दिन रेवती नक्षत्र, ऐंद्र योग, बव करण तथा मीन राशि के चंद्रमा की साक्षी में आ रही है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रह नक्षत्रों का विशेष महत्व है। किस दिन किस नक्षत्र का संयोग बनने से क्या विशेष योग बन रहा है इस संबंध में ऋषि मुनियों ने अपने मत प्रस्तुत किए हैं। मुहूर्त ग्रंथों में पंचक के नक्षत्र में शुरू होने वाले विशिष्ट व्रत, त्योहार का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार चैत्र नवरात्र रेवती नक्षत्र में शुरू हो रही है। चैत्र नवरात्रि में मकर राशि में शनि देव, मंगल के साथ रहेंगे, जो पराक्रम में वृद्धि करेंगे। रवि पुष्य नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग नवरात्रि को स्वयं सिद्ध बनाएंगे। शनिवार से नवरात्रि का प्रारंभ शनिदेव का स्वयं की राशि मकर में मंगल के साथ रहना निश्चित ही सिद्धि कारक है। इससे कार्य में सफलता, मनोकामना की पूर्ति, साधना में सिद्धि मिलेगी। चैत्र नवरात्रि के दौरान कुंभ राशि में गुरु, शुक्र के साथ रहेगा। मीन में सूर्य, बुध के साथ, मेष में चंद्रमा, वृषभ में राहु, वृश्चिक में केतु विराजमान रहेंगे। यह नवरात्रि खास ग्रह योग-संयोग के कारण मनोकामना पूर्ति करेगी तथा साधकों को सिद्धि देगी। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि इस बार चैत्र नवरात्रि पूरे 9 दिन की रहेगी यानी तिथि का क्षय या वृद्धि नहीं होगी। इस वर्ष का नवरात्रि का ग्रह-संयोग बेहद विशेष है। इस वर्ष मां अश्व पर सवार होकर आ रही हैं। इसके अलावा जिस संयोग में इस बार नवरात्र पड़ रहे हैं, वह अब से बीते 427 साल तक पंचांग में नहीं पड़ा। इस कारण इस नवरात्रि में मां दुर्गा की उपासना करने वालों को अभीष्ट फल प्राप्त होगा। इसके पहले यह संयोग 1589 में बना था, इसके बाद यह संयोग फिर 450 वर्ष बाद बनेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ये संयोग अद्भुत है..., शुभकारी है..., फलकारी है..., कल्याणकारी है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि यह पंचक का नक्षत्र है, इस नक्षत्र में देवी आराधना की शुरुआत करने से भक्त को पांच गुना अधिक शुभफल प्राप्त होता है। नक्षत्र की शुभता के साथ नवरात्र के नौ दिनों में सर्वार्थसिद्धि, रवियोग तथा पुष्य नक्षत्र का दिव्य संयोग भी बन रहा है। विशिष्ट योग व नक्षत्र का लाभ श्रद्धालु नए कार्यों की शुरुआत, उद्योग की स्थापना, प्रतिष्ठान का शुभारंभ, भूमि, भवन, वाहन, इलेक्ट्रानिक्स उत्पाद, वस्त्र, सोना चांदी, आभूषण, बरतन आदि की खरीदी में ले सकते हैं।
घोड़े पर सवार होकर आएंगी, और प्रस्थान भेंसे की सवारी पर
देवी भागवत के अनुसार इस नवरात्र में माता का आगमन घोड़े पर हो रहा है। जब भी नवरात्र में माता का आगमन घोड़े पर होता है तो शास्त्रों के अनुसार समाज में अस्थिरता , तनाव अचानक बड़ी दुर्घटना, भूकंप चक्रवात आदि से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. आम जनमानस के सुखों में कमी की अनुभूति होती है. इसलिए इस नवरात्र में माता का पूजन अर्चन क्षमा प्रार्थना के साथ किया जाना चाहिए प्रत्येक दिन विधिवत पूजा के उपरांत क्षमा प्रार्थना किया जाना भी अति आवश्यक होगा लाभदायक होगा। माता के प्रस्थान की सवारी भैंसा है। नवरात्रि का समापन रविवार और सोमवार को हो रहा है, तो मां दुर्गा भैंसे की सवारी से जाती हैं. इसका संकेत होता है कि देश में शोक और रोग बढ़ेंगे. पिछले 2 साल से कोरोना की वजह से शोक और रोग के हालात देश में बने हुए हैं। माता की सवारी का खास अर्थ होता है. शनिवार और मंगलवार को नवरात्रि का समापन हो तो मां जगदंबे मुर्गे पर सवार होकर जाती हैं. ये दुख और कष्ट की वृद्धि को ओर इशारा करता है. बुधवार और शुक्रवार को नवरात्रि समाप्त होती है, तो मां की वापसी हाथी पर होती है जो अधिक बरसात को ओर संकेत करता है. इसके अलावा अगर नवरात्रि का समापन गुरुवार को हो रहा है, तो मां दुर्गा मनुष्य के ऊपर सवार होकर जाती हैं जो सुख और शांति की वृद्धि की ओर इशारा करता है.
घट स्थापना का मुहूर्त
नवरात्रि पर्व में घट स्थापना का विशेष महत्व होता है घट स्थापना के लिए चित्रा नक्षत्र तथा वेध्रति योग को निषेध माना गया है अत: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 8 बजकर चार मिनट से 8 बज कर 27 मिनट तक रहेगा। इसके बाद आवश्यकता अनुसार दोपहर द्वि स्वभाव लग्न मिथुन तथा अभिजीत मुहूर्त में 12 बजकर 15 मिनट से 12बजकर 51 तक रहेगा। इसी दिन 11.20 बजे चंद्रदेव राशि परिवर्तन करेंगे। दरअसल चैत्र मास की इस नवरात्रि में कुल 3 ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे। जिनमें सबसे पहला परिवर्तन चंद्र ग्रह का होगा, जो हर सवा दो दिन मे राशि परिवर्तन कर लेता है। इसके बाद नवरात्र के दिनों में सोमवार को सात अप्रैल यानि नवरात्र के छठे दिन देवसेनापति मंगल ग्रह मकर राशि से कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे, जबकि इसके बाद नवरात्र के सातवें दिन यानि मंगलवार, 08 अप्रैल को नवग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह मेष राशि में गोचर करेंगे।
देवी के प्राकट्य और सृष्टि निर्माण की शुरुआत
ब्रह्म पुराण के अनुसार नवरात्रि का धार्मिक महत्व इसलिए भी है कि नवरात्रि के पहले दिन आद्यशक्ति प्रकट हुई थी। देवी के कहने पर चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को सूर्योदय के समय ही ब्रह्माजी ने सृष्टि के निर्माण की शुरुआत की थी। इसीलिए चैत्र नवरात्रि को सृष्टि के निर्माण का उत्सव भी कहा जाता है। इसी तिथि से हिंदू नव वर्ष शुरू होता है। चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार भी लिया था। इसके बाद भगवान विष्णु का सातवां अवतार भगवान राम का है, वह भी चैत्र शुक्ला नवमी नवरात्रि में हुआ था। इसीलिए चैत्र नवरात्रि का ज्यादा बड़ा महत्व है।
नवरात्र में व्रत-पूजा की तरह ही भोग का भी बहुत महत्व होता है. मां के नौ रूपों को कौन-से नौ भोग लगाने चाहिए,
प्रतिपदा- रोगमुक्त रहने के लिए मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफ़ेद चीज़ों का भोग लगाएं.
द्वितीया- लंबी उम्र के लिए मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं.
तृतीया-दुख से मुक्ति के लिए मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीज़ों का भोग लगाएं.
चतुर्थी- तेज़ बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं.
पंचमी- स्वस्थ शरीर के लिए मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं.
षष्ठी- आकर्षक व्यक्तित्व और सुंदरता पाने के लिए मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं
सप्तमी- शोक व संकटों से बचने के लिए मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करें.
अष्टमी- संतान संबंधी समस्या से छुटकारा पाने के लिए मां महागौरी को नारियल का भोग लगाएं.
नवमी- सुख-समृद्धि के लिए मां सिद्धिदात्री को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाएं.
Chaitra Navratri starting today amidst special coincidences
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