अपराध रोकने की जगह अपनी सरकार बचाने में जुटे मुख्यमंत्री:बेनीवाल

खींवसर. भावण्डा गांव में दो सप्ताह पूर्व गांव के युवक सुनील ताडा के साथ मारपीट करने पर इलाज के दौरान मंगलवार को हुई उसकी मौत से गुस्साए ग्रामीणों का भावण्डा थाना में धरना दूसरे दिन भी जारी रहा।

By: Sandeep Pandey

Published: 14 Oct 2021, 10:45 PM IST

ग्रामीणों ने शव लेने से इनकार कर दिया। आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक धरना जारी रखने पर अड़े रहे। गुरुवार शाम को धरना स्थल पर पहुंचे सांसद बेनीवाल ने पुलिस प्रशासन पर जमकर प्रहार करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के साथ बीच गांव में संगीन मारपीट होना तथा पुलिस द्वारा आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना साफ जाहिर कर रहा है कि पुलिस बड़े नेताओं के इशारे पर काम कर रही है, क्योंकि आरोपियों में रसूखदार व्यक्ति भी शामिल हैं जिनका नेताओं का साथ दिनरात का उठना-बैठना है। इस कारण पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की बजाए छुपाने में ज्यादा रूचि ले रही है। कांग्रेस सरकार के राज में अपराध चरम पर पहुंच गया है, लेकिन मुख्यमंत्री अपनी सरकार बचाने में लगे हुए है। उन्होंने कहा कि समय रहते सरकार आरोपियों सहित पुलिसकर्मियों व मामले से जुड़े बड़े नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करें अन्यथा प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा।

पहली बार पुलिस की कार्यशैली में गिरावट

खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल ने कहा कि पुलिस की कार्यशैली में गिरावट उन्होंने पहली बार देखी है। पुलिस पीडि़तों की बजाए आरोधियों को साथ दे रही है। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैंऔर पुलिस तमाशा देख रही है। पुलिस का यही रवैया चलता रहा तो आमजन का पुलिस से भरोसा उठ जाएगा। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो आरोपियों के हौसले और बुलंद हो जाएंगे। आरोपी बिना किसी डर के अपराधिक घटनाओं को अंजाम देंगे तथा बड़े नेताओं के सहारे बच निकलेंगे।

मुन्दियाड़ के पूर्व सरपंच रेवन्तराम डांगा ने आरोपियों को पकडऩे, पीडि़त परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। मांगें नहीं मानने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। इस मौके पर पीपलिया सरपंच दशरथ बेनीवाल, जिला परिषद सदस्य दिनेश गोदारा, पूर्व सरपंच मुन्नाराम, पूर्व उप सरपंच रामूराम सारण, उप प्रधान रामसिंह, अर्जुन डूडी, ओमप्रकाश ताडा, देऊ के जनप्रतिनिधि जगदीश सुथार, नारवा के श्रवणराम सियाग सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

यह है मांगे

धरने पर बैठे ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच करने, आरोपियों को पकडऩे, वृताधिकारी को हटाने, थानाधिकारी को तत्काल सस्पेंड करने, थाने के सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर करने तथा मृतक के परिवार को २० लाख की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

एसपी की वार्ता विफल

भावण्डा थाने पहुंचे पुलिस अधीक्षक अभिजीतसिंह ने सांसद व विधायक से वार्ता कर मामला शांत करने की कोशिश की, लेकिन मांगों पर सहमति नहीं बनने से वार्ता विफल रही। एसपी ने निष्पक्ष कार्यवाही करने व आरोपियों को शीघ्र पकडऩे का आश्वासन दिया, लेकिन सांसद नहीं माने और धरना जारी रखा। देर रात तक दूसरे दौर की वार्ता जारी थी । पुलिस थाने के बाहर भारी तादाद में पुलिस जाप्ता तैनात रहा।

आरोपी नहीं लगे हाथ

पुलिस ने बुधवार रात छह टीमें गठित कर कई स्थानों पर दबिशें दी। लेकिन गुरुवार रात तक एक भी आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लग पाया है। परिजनों द्वारा शव नहीं लेने पर पुलिस के उच्च अधिकारियों के निर्देश पर वृताधिकारियों के नेतृत्व में कई थानाधिकारियों की टीमें बनाकर देर रात तक आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिशें दी गई लेकिन आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए। वृताधिकारी विनोद कुमार सीपा ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिशें जारी है। बुधवार रात को ही भावण्डा थानाधिकारी शंकरलाल मीणा, हेडकांस्टेबल भगवानाराम व एक कांस्टेबल को लापरवाही बरतने पर लाइन हाजिर कर दिया था।

Sandeep Pandey Desk
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