scriptChinkara deer in danger due to negligence of the responsible | ये कैसा ‘कंजर्वेशन रिजर्व’, जहां चिंकारा को ही नहीं ‘संरक्षण’ | Patrika News

ये कैसा ‘कंजर्वेशन रिजर्व’, जहां चिंकारा को ही नहीं ‘संरक्षण’

जिम्मेदारों की बेपरवाही से खतरे में चिंकारा हरिण

कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में सुरक्षा दीवार के अभाव में श्वानों ने जमाया डेरा, दिनभर हरिणों का करते हैं पीछा
- वन एवं पर्यावरण विभाग मंत्री ने भी खड़े किए थे सवाल

नागौर

Published: December 31, 2021 09:45:10 pm

नागौर. शहर से सटे तकरीबन 358 हेक्टेयर क्षेत्र को मार्च 2012 में ‘गोगेलाव कंजर्वेशन रिजर्व’ के नाम से संरक्षित करने का उद्देश्य भले ही यहां रहने वाले चिंकारा, खरगोश व काला हरिण जैसे वन्य जीवों का संरक्षण करना था, लेकिन 10 साल बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हो पाया है। हां, यहां हरिणों की संख्या जरूर कम हो गई है। चिंता की बात यह है कि वन विभाग के अधिकारी इस बात को स्वीकार करने से भी गुरेज कर रहे हैं और जब उनसे कोई इस बारे में कहता है तो कुतर्क और करते हैं। जिम्मेदार अधिकारियों का यही रवैया रहा तो वह दिन दूर नहीं जब यहां ढूंढ़े से भी हरिण नहीं मिलेंगे। क्योंकि कुछ साल पहले जहां 300 से 400 हरिण दौड़ते थे, वहां अब अंगुलियों पर गिनने जितने भी नहीं रहे।
कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में लोगों के आने-जाने पर कोई टोकने वाला नहीं है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम है। कंजर्वेशन रिजर्व घोषित कराने से लेकर हाइवे की तरफ चार दीवारी के लिए बजट स्वीकृत कराने का काम भी पर्यावरण प्रेमी हिम्मताराम भांभू ने किया है, वर्ना अधिकारियों के भरोसे तो यहां कुछ नहीं होता। इस वर्ष बारिश के सीजन में वन एवं पर्यावरण मंत्री सुखराम विश्नोई जब यहां पहुंचे तो उन्होंने भी कहा कि बबूल की जगह फलदार व छायादार पौधे लगाओ और नहीं तो कम से कम आकड़े ही लगा दो, ताकि हरिण उनकी ओट ले सके, लेकिन यहां विभागीय अधिकारियों ने गड्ढ़े खुदवाकर छोड़ दिए, जो आज भी खाली पड़े हैं।
Chinkara deer in danger due to negligence of the responsible
Chinkara deer in danger due to negligence of the responsible
75 प्रतिशत एरिया खुला, कोई आ-जा सकता है
कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में विचरण करने वाले चिंकारा हरिणों की सुरक्षा के लिए करीब चार साल पहले तत्कालीन जिला कलक्टर ने वन विभाग के अधिकारियों को जालियां लगाने के आदेश दिए थे। इसके बाद जालियां तो लगी, लेकिन महज 100 से 50 मीटर तक लगाकर खानापूर्ति कर ली। इसके बाद चार दीवारी के लिए करीब 75 लाख रुपए का बजट सरकार ने दिया, जिससे हाइवे की तरफ डेढ़ किलोमीटर दीवार बनाई गई, वो भी दो टुकड़ों में। इसके बावजूद तीन तरफ से कंजर्वेशन रिजर्व खुला होने से कोई भी आ-जा सकता है।
खेळियां सूखी, कुत्तों का डेरा
कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में रेस्क्यू सेंटर के पास तो पानी है, लेकिन यहां चहल-पहल रहने से हरिण पानी पीने नहीं आते। क्षेत्र के अंदर जो खेळियां बनी हुई हैं, वे सूखी पड़ी है। वन्य जीवों के प्यास बुझाने के लिए यहां कोई प्रबंध नहीं है। ऐसे में या तो हरिण हाइवे के किनारे लीकेज पाइपलाइन से बह रहे पानी को पीने आते हैं या फिर गांवों की तरफ चले जाते हैं। रिजर्व क्षेत्र में एक या दो स्थानों पर खेळियां बनी हुई हैं, लेकिन इनके इर्द-गिर्द कुत्तों का जमावड़ा रहने के कारण चिंकारा अपनी प्यास तक नहीं बुझा पाते। स्थिति यह है कि यहां हरिण कम बचे और कुत्ते ज्यादा हो गए।
हरिणों को पिंजरे में बंद करके नहीं रख सकते, खेतों में चले गए होंगे
गोगेलाव कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में सैकड़ों हरिण है, आपको क्यों नहीं दिखे। हम उन्हें पिंजरे में बंद करके नहीं रख सकते, हो सकता है खेतों में चले गए होंगे। दो साल पहले जब गणना की थी कि करीब 450 हरिण थे। जहां तक कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र के विकास की बात है तो हमने चारों तरफ दीवार बनाने व वॉच टॉवर लगाने सहित अन्य कामों के प्रपोजल बनाकर सरकार को भेज रखे हैं, जब स्वीकृति आएगी तो करवा देंगे।
- ज्ञानचंद, डीसीएफ, वन विभाग, नागौर
वन विभाग की अनदेखी चिंताजनक
गोगेलाव कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र में हरिणों की घटती संख्या वन विभाग की अनदेखी का परिणाम है। हरिणों सहित वन्य जीवों की सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं होना चिंताजनक है। मुझे तो शंका है कि इसके 100 से डेढ़ सौ बीघा पर लोगों ने कब्जा कर लिया है, जिसके लिए सबसे पहले सीमा ज्ञान भी करवाएंगे। इसके बाद चार दीवारी व अन्य कामों के लिए केन्द्र सरकार से बजट मंजूर करवाएंगे।
- पद्मश्री हिम्मताराम भांभू, पर्यावरण प्रेमी, नागौर

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