चिंकारा हरिणों को पटका, गड्ढे में डाला, मरता है तो मर जाए...!

Sharad Shukla

Publish: Apr, 15 2019 12:36:40 PM (IST) | Updated: Apr, 15 2019 12:36:41 PM (IST)

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. घायल व बीमार हरिणों को उनके इलाज के लिए वन विभाग की रेस्क्यू टीम को बेखौंफ सौंपने वाले ग्रामीणों को झटका लगा है। जिले का गोगेलॉव कंजर्वेशन क्षेत्र हरिणों का कब्रगाह बनने लगा है। विभागीय कर्मी घायल हरिणों को गोगेलॉव रेस्क्यू सेंटर में यूं ही छोडकऱ चले जाते हैं। जहां पर इलाज के लिए न तो प्राथमिक स्तर के उपचार की व्यवस्था है, और न देखभाल की। छाया न पानी, और न ही दवा, भोजन के अभाव में भीषण गर्मी में कड़ी धूप में तड़पते हरिण दम तोडऩे लगे हैं। मरने के बाद हरिणों को बिना किसी चिकित्सकीय परामर्श के वहीं निकट ही एक गड्ढे में फेक देते हैं। गत शनिवार को यही घटनाक्रम दोहराया। दो घायल हरिणों के तड़पकर करने के बाद वहीं पास के गड्ढे में उन्हें फेक दिया गया। हालात इतने भयावह होने के बाद भी वन विभाग के जिम्मेदार कुछ दिनों में ही सबकुछ दुरुस्त करने का दावा करने में लगे हुए हैं।
जंगलों के साथ ही वन जीवों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले वन विभाग की बेपरवाही से घायल होते चिंकारा हरिणों के समक्ष जीवन संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर आने वाले घाायल हरिणों को गोगेलॉव रेस्क्यू सेंटर पर कड़ी धूप में फेंका जाने लगा है। समुचित दवा एवं उपचार नहीं मिलने की वजह से अत्याधिक तेज धूप में चढ़ते तापमान के पारे के साथ कुछ ही देर में हरिण दम तोड़ देते हैं। गत शनिवार को दोपहर वन विभाग विभाग की रेस्क्यू टीम को सुपुर्द किए गए थे। ताकी उनका इलाज हो सके। इसके बाद लोग हरिणों की हालत देखने गोगेलॉव पहुंचे तो हालात बेहद ही खौंफनाक मिले। कड़ी धूप में इलाज एवं दवा के अभाव में गर्मी की वजह से परेशान हरिणों की थोड़ी ही देर में मौत हो गई। इसके बाद उन्हें हमेसा की तरह ही वही बगल में खुदे एक गड्ढे में फेक दिया गया।
यूं घटा पूरा घटनाक्रम
श्री जम्भेश्वर पर्यावरण एवं जीव रक्षा प्रदेश संस्था के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य ओमप्रकाश बिश्नोई ने बताया कि खींवसर तहसील के गाँव भेड़ से शनिवार को कुत्तों द्बारा घायल एक हिरण व गाँव चावंडिया में भी कुत्तों के हमले में घायल दो हरिण वन विभाग की रेस्क्यू टीम को बुलाकर सुपुर्द किए गए। वन विभाग की रेस्क्यू टीम उन्हें गोगेलॉव कंजर्वेशन क्षेत्र में बने रेस्क्यू सेंटर में पटककर चली गई।इसके पश्चात दोपहर बाद ओमप्रकाश गोगेलॉव कंजर्वेशन क्षेत्र पहुंचे तो वहां पर घायल लाए गए हरिण इलाज के अभाव में तड़प रहे थे। रेस्क्यू सेंटर पर कोई नहीं मिला, थोड़ी देर बाद एक कर्मी रेस्क्यू सेंटर पर आया। उससे जानकारी ली गई तो उसने बताया कि सुबह एक कंपाउण्डर इंजेक्शन लगाकर चला गया। घायल हरिण की किसी ने कोई मरहम पट्टी नहीं की। ऐसे हालात में तड़पते हुए हरिणों ने दम तोड़ दिया।
एक गड्ढा पटने क बाद खुद जाता दूसरा गड्ढा
बिश्नोई ने आरोप लगाया कि रोजाना चार से पांच हरिण गोगेलॉव कंजर्वेशन क्षेत्र में मरते हैं। वहां पर हरिणों के शव से दफन हुए गड्ढे के पटने के बाद तुरन्त दूसरा गड्ढा खोदकर हरिणों को दफनाने का काम शुरू हो जाता है। इससे न केवल पर्यावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि हरिणों की संख्या भी कम होने लगी है।
इनका कहना है...
रेस्क्यू सेंटर पर चिकित्सक एवं दवा आदि की सभी व्यवस्थाएं कुछ दिनों में सुचारु रूप से संचालित होने लगेगी। फिलहाल इलाज के लिए पशुपालन विभाग के चिकित्सक से बात हो चुकी है। घायल पशुओं का इलाज करने अब वह सूचना मिलने पर पहुंचकर इलाज करना शुरू देंगे।
मोहित गुप्ता, डीएफओ, वन विभाग नागौर

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