फिल्मी नहीं राजस्थान में असल जिंदगी का पेडमैन बने कलक्टर राजन विशाल

फिल्मी नहीं राजस्थान में असल जिंदगी का पेडमैन बने कलक्टर राजन विशाल
Rajan Vishal Pad man of Rajasthan

Dharmendra Gaur | Updated: 06 Mar 2018, 10:25:18 PM (IST) Nagaur, Rajasthan, India

राजस्थान के नागौर में डेढ साल पहले हो चुका पेडमैन की मुहिम का आगाज, बेटियों को शिक्षित व जागरूक करने  शुरू किया ‘चुप्पी तोड़ो-सयानी बनो’ कार्यक्रम। 

रुद्रेश शर्मा @ नागौर. अक्षय कुमार की फिल्म पेडमैन इन दिनों खासी चर्चा में है। दरअसल यह फिल्म एक ऐसे विषय पर बनी है, जिस पर हमारे समाज में लोग खुलकर चर्चा करने से कतराते हैं। फिल्म के माध्यम से यह ‘चुप्पी’ जनता के बीच भले ही यह अब ‘दस्तक’ दे रही हो, लेकिन नागौर में तकरीबन डेढ़ साल पहले ही इस मुहिम का आगाज हो चुका है। तत्कालीन जिला कलक्टर राजन विशाल को यदि राजस्थान का पेडमैन कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। विशाल अब अलवर के कलक्टर हैं और वहां इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।
भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास
फिल्म की तरह ही इस नवाचार के पीछे भी कहीं न कहीं तमिलनाडु के सोशल एक्टिविस्ट अरुणाचलम् मुर्गनाथम् की कहानी मूल में रही है। जिसमें महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया गया। नागौर से शुरू हुए इस नवाचार को राज्य सरकार के स्तर पर काफी सराहा गया। इसे अन्य जिलों में भी लागू करने को कहा गया और राज्य के बजट में भी इस कार्यक्रम को शामिल किया।
यूं शुरू हुई इस पेडमैन की कहानी
किशोरियों में मासिक धर्म से जुड़ी परेशानी और भ्रांतियों को दूर करने का विचार मन में आया तो राजन विशाल के समक्ष यह दुविधा थी कि इसे आगे कैसे बढ़ाया जाए? फिर उन्होंने महिला अधिकारिता विभाग को इस कार्य के लिए साथ लिया। विभाग की परियोजना अधिकारी अनुराधा सक्सेना बताती हैं कि तत्कालीन जिला कलक्टर राजन विशाल की पहल पर नागौर के 1601 स्कूलों में बेटियों को इस विषय पर शिक्षित व जागरूक करने के लिए ‘चुप्पी तोड़ो-सयानी बनो’ कार्यक्रम शुरू किया। 

उत्पाद को  दिया गया ‘सयानी’ नाम
सक्सेना बतातीं है कि इसके साथ ही अक्टूबर-2016 में जिले के रियांबड़ी ब्लॉक के मोड़ी कला गांव में सेनेटरी नेपकिन बनाने की एक यूनिट महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा शुरू की गई। जिला कलक्टर ने इस यूनिट के लिए जनसहयोग से मशीन व अन्य संसाधनों का इंतजाम किया। यूनिट में बनने वाले उत्पाद को ‘सयानी’ नाम दिया गया। हालांकि बाद में यह यूनिट किन्हीं कारणों से बंद हो गई। जिसे अब अन्यत्र स्थापित करने के प्रयास चल रहे हैं। बावजूद इसके ‘चुप्पी तोड़ो सयानी बनो’ कार्यक्रम बदस्तूर जारी है।

शिक्षिकाओं को किया प्रशिक्षित
महिलाओं की शारीरिक संरचना से जुड़े इस विषय पर सबसे पहले उन किशोरियों को शिक्षित करना जरूरी था, जो मासिक धर्म (पीरियड्स) की शुरुआती उम्र में थी। इसके लिए नागौर जिले के चयनित स्कूलों में ‘चुप्पी तोड़ो-सयानी बनो’ कार्यक्रम शुरू हुआ। इन सभी स्कूलों से एक-एक महिला शिक्षक को प्रशिक्षित कर टीचिंग किट दिए गए। जिसके जरिए यह बताया गया कि मासिक धर्म क्या है, इसके दौरान क्या परेशानियां आ सकती है और इसके दौरान किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सबसे पहले 14 फरवरी 2017 को सभी स्कूलों में एक ही दिन इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई। बाद में हर सप्ताह एक कालांश इसके लिए निर्धारित कर दिया गया।
बेटियों को बनाया ‘स्वच्छता दूत’ 
चूंकि मासिक धर्म के दौरान सबसे ज्यादा महत्व स्वच्छता का होता है। इसलिए हर स्कूल में शत-प्रतिशत उपस्थिति रखने वाली छात्राओं को ‘स्वच्छता दूत’ बनाया गया। इसके पीछे यह मान्यता रही कि स्कूल में वही छात्रा शत-प्रतिशत उपस्थिति रख सकती है जो स्वच्छता का महत्व समझती हो। यानी न तो उसे मासिक धर्म के दौरान कोई परेशानी होगी और ना ही वह कभी बीमार होगी।

इनका कहना है...
दरअसल, 2016 में नागौर कलक्टर पद पर रहने के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरी बच्चियों की समस्या का पता लगने पर उनके लिए कुछ नया करने का विचार आया। सरकार ने इसकी सराहना की और अब प्रदेशभर में नि:शुल्क सेनेटरी नेपकिन वितरण करवाने की घोषणा बजट में की गई है। अलवर में गत 20 फरवरी 2018 को 1964 विद्यालयों में 103000 छात्राओं का आमुखीकरण किया गया है।
-राजन विशाल, जिला कलक्टर, अलवर

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