चर्चा का विषय बना नागौर में जन्मा प्लास्टिक परत वाला डॉल्फिन जैसा बच्चा

Dharmendra Gaur

Publish: May, 17 2019 07:34:38 PM (IST)

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. नागौर जिला मुख्यालय स्थित राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय born at jln hospital nagaur के मदर एण्ड चाइल्ड विंग Mother and child wing में जन्मा एक बच्चा चर्चा का विषय बना हुुआ है। विश्व की दुर्लभतम बीमारियों में से एक कोलोडियन बेबी Collodion baby like dolphin की हाथ और पैरों की उंगलियां परस्पर जुड़े होने के साथ ही पूरे शरीर पर प्लास्टिक सरीखी स्किन की पर्त चढ़ी हुई है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी छह लाख बच्चों में से एक को होती है। इसमें टरमीटोसिस होता है। इसमें सांस लेने में तकलीफ होती है। इसमें धीरे-धीरे इस तरह की समस्याएं और बढ़ती हैं। बच्चा फिलहाल चिकित्सकों की निगरानी में है। उधर, बच्चे की इस हालत से परिवार सदमे में है।


परिवार की खुशियां काफूर
जिले के निकटवर्ती गुढ़ा भगवानदास गांव निवासी सहदेव के परिवार में पांचवीं बार किलकारी गूंजी लेकिन विशेष प्रकार की बीमारी से ग्रसित बच्चा पैदा होने से परिवार की सारी खुशियां काफूर हो गई। इससे पहले सहदेव के तीन बच्चे हुए लेकिन वो बच नहीं पाढ। चौथा बच्चा ही जीवित है। पांचवां बच्चा दुर्लभतम जटिल बीमारी से ग्रसित पाया गया। प्लास्टिक सरीखी पर्त में हुए बच्चे को देखकर चिकित्सक भी हैरान रह गए।


डाल्फिन मछली की तरह चमक
सहदेव ने बताया कि पत्नी को गॉयनिक समस्या होने पर प्रसव के लिए भर्ती कराया गया। उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि प्लास्टिक बेबी पैदा होगा। इसके पैदा होते ही डॉक्टर्स और नर्स दोनों ही हतप्रभ हर गए। इसके बाद सहदेव ने भी देखा तो वह उसे डाल्फिन मछली की तरह चमकता हुआ लग रहा था। बच्चे की स्थिति को गंभीर देखते हुए रेफर कर दिया गया। बच्चे का वजन 2.3 किलोग्राम है।


अलवर में भी जन्मे थे ऐसे बच्चे
डॉ. मूलाराम कड़ेला के अनुसार जेनेटिक डिसऑर्डर Genetic disorders के कारण ऐसा होता है। दुनिया में छह लाख बच्चे के जन्म पर एक ऐसा बच्चा पैदा होता है। इसके पूर्व अलवर में भी एक ऐसा ही बच्चा पैदा हुआ था। यह कोलोडियन बीमारी वर्ष 2014 व 2017 में अमृतसर में दो कोलोडियन बच्चों का जन्म हुआ था। दुर्भाग्यवश दोनों की चंद दिनों बाद ही मौत हो गई थी।

जेनेटिक डिस्ऑर्डर है वजह
चिकित्सा जगत में हुई शोध के अनुसार कोलोडियन बेबी का जन्म जेनेटिक डिस्ऑर्डर genetic disorders की वजह से होता है। ऐसे बच्चों की त्वचा में संक्रमण होता है। कोलोडियन बेबी का जन्म क्रोमोसोम (शुक्राणुओं) में गड़बड़ी की वजह से होता है। सामान्यत महिला व पुरुष में 23-23 क्रोमोसोम पाए जाते हैं। यदि दोनों के क्रोमोसोम संक्रमित हों तो पैदा होने वाला बच्चा कोलोडियन हो सकता है।


शरीर पर प्लास्टिक जैसी परत
इस रोग में बच्चे के पूरे शरीर पर प्लास्टिक की परत चढ़ जाती है। धीरे-धीरे यह परत फटने लगती है और असहनीय दर्द होता है। यदि संक्रमण बढ़ा तो उसका जीवन बचा पाना मुश्किल होगा। कई मामलों में ऐसे बच्चे दस दिन के भीतर प्लास्टिक रूपी आवरण छोड़ देते हैं। इससे ग्रसित 10 प्रतिशत बच्चे पूरी तरह से ठीक हो पाते हैं। उनकी चमड़ी सख्त हो जाती है और इसी तरह जीवन जीना पड़ता है।

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