नागौर के जेएलएन में बिगड़े हालात, नहीं दे रहे ध्यान जिम्मेदार

जेएलएन में बुधवार को अपराह्न में आए बीमार वृद्ध को नहीं मिली स्ट्रेचर, फर्श पर पड़ा रहा रोगी, मिन्नतें करते रहे परिजन, तरस खाकर एक युवक ने पहुंचाया डॉक्टर्स तक

By: Sharad Shukla

Published: 24 May 2019, 11:59 AM IST

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. राजकीय हॉस्पिटल जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के हालात बिगड़ गए हैं। स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि रोगी के आने पर न तो उसे स्ट्रेचर व एम्बुलेंस मिलती है, और न ही डॉक्टस...र्! ऐसा ही एक मामला बुधवार को राजकीय हॉस्पिटल में सामने आया। कड़ी धूप में ग्रामीण क्षेत्र से हॉस्पिटल पहुंचे मरीज को करीब पौन घंटे तक मुख्य गेट के पास फर्श पर पड़े रहना पड़ा। इस दौरान हालत ज्यादा खराब देखकर परेशान परिजनों की स्थिति को समझते हुए हुए वहां से गुजरते एक युवक की नजर पड़ी तो वह रोगी को गोद में उठाकर खुद डॉक्टर के पास ले गया। इससे परेशान रोगियों के परिजनों एवं लोगों का कहना था कि पीएमओ साहब हॉस्पिटल नहीं संभाल पा रहे हैं तो फिर उच्चाधिकारियों को बता देना चाहिए, न कि इस तरह की अव्यवस्थाएं बनाए रखें। स्थिति यही बनी रही तो फिर गंभीर स्थिति में अनहोनी होने पर जिम्मेदार कौन होगा...!
जिला मुख्यालय के जिला हॉस्पिटल में डॉक्टर्स की फौज एवं संसाधनों की सुविधा होने के बाद भी रोगियों को इसका लाभ केवल हॉस्पिटल के जिम्मेदारों की बेपरवाही के कारण नहीं मिल पा रहा है। इससे जेएलएन की हॉलत कस्बाई हॉस्पिटल से भी बदतर होती नजर आने लगी है। हॉस्पिटल सूत्रों के अनुसार बुधवार को अपराह्न में करीब तीन बजे परिजन वृद्ध बीमार को लेकर जेएलएन पहुंचे। यहां मुख्य गेट पर पहले तो कोई मिला नहीं, करीब पंद्रह मिनट बाद एक चिकित्साकर्मी मिला भी तो स्ट्रेचर उपलब्ध कराने की बात पर उसे अपना पल्ला झाड़ लिया। इस दौरान उसकी मिन्नतें करते रहे कि रोगी काफी उम्रदराज हैं, स्ट्रेचर दिलवा दो। इसके बाद भी वह चला गया। ऐसे में कमजोर, बीमार वृद्ध की हालत और ज्यादा खराब होने पर वहीं फर्श पर ही बिछाकर उसे लिटाना पड़ा। जमीन पर पड़े बीमार वृद्ध की खराब होती हालत, परेशान मिन्नतें करते परिजनों की स्थिति को देखकर वहां से गुजरते एक युवक को दया आ गई, और वह खुद उसे अपनी गोद में उठाकर डॉक्टर के पास तक ले गया। इसके बाद उसकी स्थिति खराब देखते हुए भर्ती तो कर लिया, लेकिन हॉस्पिटल की अव्यवस्थाओ से परेशान, और सहमे परिजन पथराई आंखों से अव्यवस्थाओं से उपजी स्थिति से काफी व्यथित नजर आए। इस दौरान वहां पर मौजूद दो-तीन लोगों से और बातचीत की गई तो बताया गया कि यहां आने के बाद रोगी कहां जाए, कैसे पर्ची बनवाए, डॉक्टर्स कहां मिलेंगे, बताने वाला कोई नहीं मिलता है। साफ है कि हॉस्पिटल के जिम्मेदार व्यवस्थाएं नहीं संभाल पा रहे हैं, और इसका खामियाजा हॉस्पिटल आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। इस संबंध में हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. वी. के. खत्री से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह इस पूरे मामले पर कुछ भी कहने से बचते नजर आए।

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