Nagaur : जिम्नास्टिक को कहती थीं जन्माष्टमी, आज करतब देखकर रह जाता है हर कोई दंग, देखिए वीडियो

विश्व महिला दिवस पर विशेष : राजस्थान की बेटियों को निखार रही पश्चिम बंगाल की बेटी, तेजास्थली की छात्राओं ने एक हजार से अधिक मेडल जीते

By: shyam choudhary

Published: 07 Mar 2018, 08:43 PM IST

हनुमानराम ईनाणियां. मूण्डवा (नागौर). वीर तेजा महिला शिक्षण एवं शोध संस्थान में पढ़ रही छात्राओं ने जिम्नास्टिक के खेल में देशभर में नागौर जिले के साथ-साथ राजस्थान का गौरव भी बढ़ाया है। खेल जगत में जहां राजस्थान की बालिकाएं परचम लहरा रही हैं, वहीं इनको निखारने का काम पश्चिम बंगाल की कोच सुश्री शीला दत्ता कर रही हैं।

कोच दत्ता की बदौलत बालिका शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े ब्लॉकों में माने जाने वाले मूण्डवा ब्लॉक में बालिकाएं आज शिक्षा के साथ-साथ खेल जगत में भी अपना परचम लहरा रही हैं। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लाभ-हानि से परे जनसहयोग से चल रही यहां की वीर तेजा महिला शिक्षण एवं शोध संस्थान में पढ़ रही छात्राओं ने जिम्नास्टिक के खेल में देशभर में नागौर जिले के साथ-साथ राजस्थान का गौरव भी बढ़ाया है। पश्चिम बंगाल के काकीनाडा में खेल प्रतियोगिताओं के दौरान कानसिंह राठौड़, हनुमानराम कड़वासरा तथा भागीरथ पूनिया ने इस प्रतिभा को पहचाना तथा उसके कोच समीर राय से सम्पर्क कर तेजास्थली ले आए। यहां पूर्व सांसद भंवरसिंह डांगावास व प्रशासिका कमल केसकर ने दत्ता को पारिवारिक माहौल दिया, जिसके चलते आज वह राजस्थान की बेटियों को खेल जगत की ऊंचाइयों तक पहुंचाने में लगी हैं।
बेटियों ने मन-मोह लिया
वर्ष 2003 में तेजास्थली में कोच बनकर आईं शिला दत्ता ने बताया कि यहां की बेटियों ने मन मोह लिया है। जब वह पहली बार यहां पहुंची तो ग्रामीण परिवेश की लड़कियां जिम्नास्टिक को जन्माष्टमी बोलती थी। पर इनकी मासुमियत व अपनेपन में गजब का आकर्षण है। साथ ही मेरे साथ पूरे मनोयोग से सुबह-शाम अभ्यास भी करती हैं। इन छात्राओं के साथ-साथ शीला अपनी तथा संस्थान की पहचान अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बनाना चाहती हैं।

सैकड़ों मैडल जीते कोच शीला दत्ता की देखरेख में
संस्थान की छात्राओं ने अब तक राज्य स्तर पर करीब 400 तथा राष्ट्रीय स्तर पर 200 मैडल विभिन्न प्रतियोगिताओं में जीते हैं, जिनमें से राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में 10 स्वर्ण पदक, 15 रजत पदक तथा 34 कांस्य पदक पदक शामिल हैं। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में तो इनकी कोई सानी नहीं है। राज्य स्तर पर करीब एक हजार से अधिक स्वर्ण, कांस्य तथा रजत पदक तेजास्थली संस्थान की खिलाड़ी छात्राओं ने जीते हैं। वहीं प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली छात्राओं की संख्या तो एक हजार से भी अधिक है।

सरकारी मदद की दरकार
शीला को जिम्नास्टिक के क्षेत्र में सरकारी मदद नहीं मिलने को लेकर शिकायत भी है। यदि बालिकाओं को इनडोर स्टेडियम तथा अन्य उपकरण व सरकारी सहायता मिले तो राजस्थान की बेटियां भी अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

 विश्वविद्यालय नहीं भेजता टीम
तेजास्थली में छात्राएं छोटी कक्षाओं में अध्ययन के साथ-साथ जिम्नास्टिक प्रशिक्षण नियमित रूप से प्राप्त करती हैं। कोच के अनुसार वर्ष 2013 में स्कूल इंटरनेशनल एशियार्ड चैम्पियनशिप में संस्थान की छात्रा प्रियंका कड़वासरा का पूना में हुए ट्रायल कैंप में चयन हुआ था। पांच छात्राओं की टीम में कड़वासरा का चौथा स्थान था। ब्राजील में हुए खेलों में केवल छात्रों की टीम ही भेजी गई, लेकिन छात्राओं की टीम को नहीं भेजा गया। जिसके चलते अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ी छात्रा नहीं खेल सकी।

जिलास्तर पर भी सम्मान नहीं
कोच शीला दत्ता के मार्गदर्शन में भले ही सैकड़ों छात्राओं ने पदक जीते हो। साथ ही उन्हें सम्मान भी मिला हो पर इन खिलाडिय़ों के द्रोणाचार्य को कभी जिला स्तर का सम्मान भी नहीं दिया गया, जबकि जिला स्तरीय कई समारोहों में इन छात्राओं के करतब शुरू होते हैं तो तालियों की गडगड़़ाहट थमती नहीं है।

shyam choudhary Reporting
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