गहराता जल स्तर, सूखे ताल तलैया

बरसात न होने से नाले व तालाबों से पानी गायब

By: Dharmendra gaur

Published: 04 Jan 2018, 07:16 PM IST

चौसला. रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून..। मनुष्य के जीवन में पानी के महत्व को कवि रहीम दास के दोहे की इन पक्तियों से असानी से समझा जा सकता है। क्षेत्र में एक समय ऐसा था जब कस्बे से नदी के रूप में निर्मल जल बहकर सांभर झील में जाकर मिला करता था वहीं खेतों में सिंचाई के लिए बड़े-बड़े कुएं थे। जिन पर डीजल चलित इंजन दिन रात चला करते थे। अब यह गुजरे जमाने की बात हो गई। क्षेत्र में सूखा तो नहीं है, लेकिन हालात सूखे से कम भी नहीं है। चार साल पहले तक ताल तलैया हर जगह नजर आने वाला अमृत जल आज भी है, लेकिन सिर्फ जमीन के भीतर।
बारिश में आई कमी

बरसात न होने से नाले व तालाबों से पानी गायब हो गया है। वहीं प्रशासन भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहा है। कभी लबालब भरा रहने वाला बालाजी तालाब, शिवसागर तालाब आज सूखे पड़े है और बरसाती तालाबों में इनकी गिनती होने लगी है। गर्मी में हालात और विकट हो जाते है। क्षेत्र में ग्रामीणों के लिए तो बीसलपुर पेयजल सप्लाई हो रही है, लेकिन पशु-पक्षी अपना गला तर करने के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हो गए हंै।
कभी बहती थी जलधाराएं

कस्बा कभी जल की भरपूर उपलब्धता के लिए भी जाना जाता था। यहां हर साल तालाब उफान पर रहा करते थे, कभी कभार तो जल बहाव अधिक तीव्र होने के कारण तालाब उफनकर कुणी से होते हुए सांभर झील में जाकर मिला करते थे, लेकिन पिछले एक दशक से हालात विपरीत हो गए। हालांकि चार साल पहले बालाजी तालाब लबालब हुआ था। पानी की प्रचुरता से छाई रहने वाली हरियाली लगभग गायब हो चुकी है।

हर साल खिसक रहा भू-जल स्तर
भू-जलस्तर हर साल नीचे खिसक रहा है। तीन-चार सालों में पुराने कुओं का जलस्तर तो तेजी से नीचे गया है। वर्तमान में 90 प्रतिशत कुएं सूख चुके है और 10 प्रतिशत कुओं में पानी 300 से 500 फीट तक गहरा हो गया जो फ्लोराइडयुक्त है।

Dharmendra gaur Reporting
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