Nagaur. फीस जमा करो, नहीं तो फिर परीक्षा नहीं दे पाएगा बच्चा...!

नागौर. निजी शिक्षण संस्थानों की ओर से फीस नहीं तो, इग्जाम नहीं के तर्ज पर अभिभावकों पर फीस वसूली का दबाव बनाए जाने का काम शुरू कर दिया गया है।

By: Sharad Shukla

Published: 11 Jan 2021, 10:42 PM IST

नागौर. निजी शिक्षण संस्थानों की ओर से फीस नहीं तो, इग्जाम नहीं के तर्ज पर अभिभावकों पर फीस वसूली का दबाव बनाए जाने का काम शुरू कर दिया गया है। अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य का ध्यान रखते हुए चुप हैं, लेकिन कुछ ने तो जिला कलक्टर तक को शिकायत कर दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने भी जल्द ही शिक्षण संस्थानों के ऑनलाइन क्लासेज की छानबीन करेगा। शिक्षा विभाग के अनुसार इस संबंध में पूर्व में ही दिशा-निर्देश आ चुके थे, लेकिन अब जल्द ही इसकी स्क्रीनिंग की जाएगी। ताकी शुल्क लिए जाने के दबाव के बीच ऑनलाइन क्लासेज की सही वस्तुस्थिति सामने आ सके।
निजी शिक्षण संस्थानों में जिले भर में संचालित शिक्षण संस्थानों की ओर से शुल्क वसूली के दबावों के चलते अभिभावकों में आक्रोश की स्थिति होने लगी है। अभिभावकों का कहना है कि कई शिक्षण संस्थानों में ऑनलाइन क्लासेज लॉकडाउन लगने के तीन से चार माह बाद शुरू हुई, लेकिन अक्सर क्लासेज भी नहीं लगती। इस तरह भी भी कई ऐसा हुआ। अब इसके बाद भी निजी शिक्षण संस्थानों की ओर से परीक्षा की आड़ में पूरे फीस की वसूली का दबाव बनाया जाने लगा है। जिले मेंकरीब डेढ़ लाख विद्यार्थी ऐसे हैं, जो बोर्ड परीक्षा की तैयारियों में लगे हुए हैं। अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा की तैयारियों के बीच फीस का दबाव बनाए जाने से स्थिति विकट होने लगी है। निजी स्कूल एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि शुल्क की वसूली प्रावधानों के तहत ही हो रही है। लंबे समय से बंद स्कूलों की व्यवस्थाएं प्रभावित हो गई है। इसे अभिावकों को समझना पड़ेगा, और फीस स्वेच्छा से देनी चाहिए। इसके साथ ही अब परीक्षा को ध्यान में रखते हुए निजी स्कूलों ओर से पढ़ाई को लेकर की जा रही अथक मेहनत को देखते हुए भी शुल्क दिया जाना चाहिए। एक अभिभावक ने नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बताया कि लॉकडाउन लगने के बाद स्कूल की ओर से ऑनलाइन क्लासेज अगस्त के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई थी, और क्लासेज नियमित लगी भी नहीं। इसके बाद भी स्कूल की ओर से शुल्क नहीं दिए जाने पर परीक्षा से वंचित कर दिए जाने की धमकियां दी जा रही है। इस तरह के धमकी के मैसेज मोबाइल पर भी आए हैं। अभिभावक का कहना है कि फीस के लिए होने वाले तय प्रावधानों में अभिभावकों के हित का भी ध्यान रखना चाहिए था, लेकिन निजी शिक्षण संस्थानों की ओर से पूरा ध्यान केवल वसूली पर ही है।
इनका कहना है...
शिक्षा विभाग की ओर से जल्द ही निजी शिक्षण संस्थानों के ऑनलाइन क्लासेज की अब तक की गतिविधियों की तथ्यात्मक जांच की जाएगी। जांच आरबीएससी एवं सीबीएसई, दोनों ही बोर्ड से जुड़े स्कूलों की होगी।
संपतराम, सीडीईओ, समसा, नागौर
निजी शिक्षण संस्थानों की ओर से सत्तर प्रतिशत शुल्क लिए जाने का कार्य प्रावधानों के तहत ही किया जा रहा है। अभिभावक शुल्क नहीं जमा करेंगे तो स्कूलों की व्यवस्थाएं भी प्रभावित होगी।
विनेश शर्मा, जिला सचिव, निजी स्कूल एसोसिएशन नागौर

Sharad Shukla Reporting
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