कर्मों से होता है सुख-दुख का निर्धारण

Nagaur. साध्वी ने समझाई कर्म के प्रकृति की विशेषताएं

By: Sharad Shukla

Published: 21 Aug 2021, 10:00 PM IST

नागौर. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में जयमल जैन पौषधशाला में शनिवार को साध्वी बिंदुप्रभा ने प्रवचन में कहा कि सुख-दुख का निर्धारण् स्वंय के कर्म होते हैं। कर्मानुसार ही फल प्राप्त होता है। पाप का प्रतिफल स्वंय को भुगतना पड़ता है। इसमेें कोई सहभागिता नहीं कर सकता है। सुख मे आपके साथ रहने वालों की भीड़ होती है, लेकिन दुख के दौरान आप अकेले हो जाते हैं। कहने का अर्थ यह है कि सुख में सभी साथ देते हैं, लेकिन दुख में कोई मदद नहीं करता है। समझदार व्यक्ति एक बार ठोकर लगने पर ही संभल जाता है। अपनी गलती का पुनरावर्तन ना करने के लिए संकल्पित बन जाता है। मूर्खां में ऐसा नहीं होता है। वह अपनी गलती से सबक ना लेने के कारण कई बार ठोकर खाते हुए खेद प्राप्त करता है। इंसान से भूल होना स्वाभाविक है। भूल को स्वीकार करना ही सच्ची साधना है। पाप कभी नहीं छिपता है। इसे छिपाने के अनगिनत प्रयास भी असफल हो जाते हैं। पाप छिपा हुआ नहीं रह सकता। व्यक्ति को पाप से घृणा करनी चाहिए, पापी से नहीं। प्रवचन की प्रभावना एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत करने के लाभार्थी चंचलकंवर, हस्तीमल बाघमार थे। दोपहर में चांदनी चतुर्दशी के अवसर पर महाचमत्कारिक जय-जाप का अनुष्ठान किया गया। जाप की प्रभावना विनीता पींचा की ओर से वितरित की गयीं। प्रवचन में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर पुष्पा ललवानी, प्रेमलता ललवानी, कंचनदेवी मोदी एवं प्रेमचंद चौरडिय़ा ने दिए। आगंतुकों के भोजन का लाभ प्रकाशचंद, प्रदीप बोहरा ने लिया। संचालन संजय पींचा ने किया। इस मौके पर गौतमचंद बाघमार, विमलचंद बाघमार, सुमतीदेवी चौरडिय़ा, बिरजादेवी ललवानी, तीजादेवी पींचा, शोभादेवी पारख सहित अन्य श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थीं।

Sharad Shukla Reporting
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