नि:शुल्क पुस्तकों की मांग में अंतर पर निदेशायल की फटकार

प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिक्षण संस्थानों की ओर से पाठ्य पुस्तकों की ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मांग में भारी अंतर पाया गया है

By: Sharad Shukla

Published: 17 May 2019, 11:02 AM IST

नागौर. प्रदेश के विभिन्न जिलों के शिक्षण संस्थानों की ओर से पाठ्य पुस्तकों की ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मांग में भारी अंतर पाया गया है। इस पर शिक्षा निदेशालय ने नाराजगी जताई है। उच्चाधिकारियों का कहना है कि यही स्थिति बनी रही तो फिर मांग के अनुरूप पुस्तकें अधिक या कम हो सकती हैं। इस तरह की अनियमितता होने पर स्थिति बिगड़ भी सकती है। इसको ध्यान में रखते हुए जिलों के मुख्य शिक्षाधिकारियों को ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मांग की विसंगति को दूर किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
शाला दर्पण में पुस्तकों की दर्शाई गई मांग एवं पहले से की गई ऑफलाइन पुस्तकों की मांगों में तुलनात्मक रूप से अलग-अलग संख्या पाई गई है। इससे शिक्षा विभाग के समक्ष असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शाला दर्पण को देखे जाने पर मिली संख्या का आफलाइन में आई मांग से मिलान किए जाने पर यह तथ्य सामने आए। इससे पुस्तकों के प्रकाशित किए जाने की संख्या को लेकर निश्चितता की स्थिति नहीं बन पा रही है। यह विसंगति कई जिलों से पाठ्यपुस्तकों के लिए दर्शाई गई मांग मेंं देखने पर मिल रही है। ऐसे हालात में अब नए सत्र के शुरूआत में पुस्तकों को यथासमय बांटना भी चुनौती बन गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा राजस्थान (कार्मिक) के संयुक्त निदेशक कि जिला शिक्षाधिकारी प्रारंभिक, माध्यमिक की ओर से भेजे गए मांगपत्र को ही नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों की मांग के लिए प्रेषित कर दिया गया था। नि:शुल्क पाठय पुस्तकों की मांग में जिले से लोगिन में एप्रूव करते समय ध्यान नहीं रखे जाने से यह विसंगति उत्पन्न हो गई। इससे फिर राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल की ओर से मुद्रित किए जाने वाले पुस्तकों की संख्या अधिक या कम हो सकती है। इसलिए नोडल अधिकारी पूर्व में प्रेषित मांग को ध्यान में रखते हुए लॉगिन में एप्रूव करें, नहीं तो फिर इसके जिम्मेदार संबंधित अधिकारी ही होंगे।
इनका कहना है...
नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों की मांग के संदर्भ में जिले के शिक्षाधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके ैं हैं। वह शाला दर्पण पर मांगपत्र अपलोड किए जाने के दौरान पूर्व में की गई मांगों का ध्यान रखेंगें। ऐसा नहीं किए जाने पर विभागीय अनुशासनहीनता मानी जाएगी।
हरिराम भाटी, सीडीईओ समसा, नागौर

Sharad Shukla Reporting
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