वीडियो : 71 मरीजों की मौत पर भी नहीं टूटी सरकार की तंद्रा

Shyam Lal Choudhary | Publish: Mar, 14 2018 10:24:55 AM (IST) Nagaur, Rajasthan, India

अस्पताल में भी सिलिकोसिस मरीजों को राहत नहीं, जिला क्षय निवारण केन्द्र में आयोजित होने वाले शिविर में मरीजों को होना पड़ रहा परेशान

नागौर. जिले में सिलिकोसिस मरीजों की आए दिन मौतें हो रही हैं। पिछले दो साल में जिले में 71 से अधिक सिलिकोसिस मरीजों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद सरकार की नींद नहीं उड़ी है। जिले में हालात यह हैं कि जिला मुख्यालय के क्षय निवारण केन्द्र में सिलिकोसिस मरीजों की जांच के लिए आयोजित होने वाले शिविर में आने वाले मरीजों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। जिले के खाटू बड़ी, मकराना, खींवसर सहित अन्य खनन क्षेत्रों से सैकड़ों किलोमीटर सफर तय कर शिविर में आने के बाद भी मरीजों को यहां एक्स-रे व अन्य जांचों के लिए क्षय निवारण केन्द्र व जेएलएन अस्पताल के बीच चक्कर काटने पड़ते हैं। वजह है क्षय निवारण केन्द्र में संसाधनों व स्टाफ की कमी। हैरत की बात यह है कि उच्चाधिकारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं आ पा रहा है।

जानिए, क्या है पूरा मामला
जिले के खान मजदूर एवं भवन निर्माण श्रमिकों में सिलिकोसिस की बीमारी की जांच के लिए जिला मुख्यालय के क्षय निवारण केन्द्र में माह के प्रथम, द्वितीय व तृतीय मंगलवार को शिविर आयोजित किया जाता है, जिसमें जिले के लिए गठित न्यूमोकोनियोसिस (सिलिकोसिस) बोर्ड नागौर के सदस्य डॉ. श्रवण राव, डॉ. सुरेन्द्र भाकल एवं रेडियोलॉजिस्ट पुरुषोत्तम टेलर मरीजों की जांच के बाद प्रमाण पत्र देते हैं। जिले में इस बोर्ड की स्थापना 16 फरवरी 2016 में की गई। इससे पहले मरीजों को जोधपुरअजमेर जाना पड़ता था। तीन मंगलवार को आयोजित होने वाले शिविर में आने वाले मरीजों को क्षय निवारण केन्द्र में रजिस्ट्रेशन कराने के बाद एक्स-रे के लिए जेएलएन अस्पताल जाना पड़ता है। मरीज एक्स-रे लेकर वापस आता है, तब तक उसे दो से तीन घंटे लग जाते हैं। वृद्ध लोगों को इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। गौरतलब है कि सिलिकोसिस पीडि़त जीवित व्यक्ति को उपचार के लिए एक लाख रुपए की सहायता दी जाती है, जबकि मरने पर उसके परिजनों को तीन लाख रुपए सहायता दी जाती है।
भीड़ इतनी कि सबको देख नहीं पाते
सिलिकोसिस शिविर प्रभारी सुरेन्द्र चौधरी ने बताया कि शिविर में आने वाले लोगों की संख्या इतनी अधिक रहती है कि सबका रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाते। मंगलवार को भी 238 का रजिस्ट्रेशन किया गया, जबकि 62 लोगों को अगली तारीख दी है। रजिस्ट्रेशन के दौरान व्यक्ति से स्वास्थ्य जांच से जुड़े दस्तावेजों के साथ आधार कार्ड व भामाशाह कार्ड लिया जाता है।

एक्स-रे मशीन लगे तो मिले राहत
जिला क्षय निवारण केन्द्र में एक्स-रे मशीन के साथ खून जांच के लिए सीबीसी मशीन व लीवर व गुर्दे की जांच के लिए ऑटो एनालाइजर मशीन उपलब्ध करा दी जाए तो न केवल मरीजों को सुविधा होगी, बल्कि शिविर में आने वाले मरीजों को रजिस्ट्रेशन के लिए दो-दो बार चक्कर भी नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके साथ एक कम्प्यूटर ऑपरेटर व एक रेडियोग्राफर की आवश्यकता भी है।

जिले में सिलिकोसिस मरीजों की स्थिति
वर्ष - मरीज
2016 - 410
2017 - 502
2018 - 62 अब तक पंजीकृत
- वर्ष 2016 से पहले जिले में बोर्ड गठित नहीं होने के कारण मरीज अजमेर व जोधपुर जाते थे, जिनका रिकॉर्ड क्षय निवारण केन्द्र में नहीं है।
- पिछले दो साल में जिले में पंजीकृत 66 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि पिछले डेढ़-दो महीने में खाटू में 5 मरीजों की मौत हुई है, जो जोधपुर बोर्ड से पंजीकृत थे।

अधिकारियों को अवगत करवाया है
क्षय निवारण केन्द्र में सिलिकोसिस मरीजों की पहचान के लिए आयोजित होने वाले शिविर के दौरान संसाधनों व स्टाफ की कमी के चलते परेशानी होती है, इसके लिए हमने कई बार उच्चाधिकारियों को अवगत भी कराया है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में खींवसर में पड़ी एक्स-रे मशीन को यहां लगाने का प्रस्ताव भी मैंने रखा है। यदि एक्स-रे मशीन मिल जाए तो मरीजों को जेएलएन अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
- डॉ. श्रवण राव, प्रभारी, क्षय निवारण केन्द्र, नागौर

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