नागौर. प्रदेश में पांच दिन का वर्किंग सप्ताह होने के बावजूद अधिकारी एवं कर्मचारी पहले दिन की शुरुआत लेटलतीफी से शुरू करते हैं। वहीं शुक्रवार को समय से पहले कार्यालय छोडऩे की जल्दी रहती है। सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की लेटलतीफी से परेशान आमजन की शिकायतों को लेकर सोमवार पत्रिका टीम ने जिला मुख्यालय के कार्यालय का स्टिंग किया तो लगभग सब जगह 90 प्रतिशत स्टाफ आधे से पौने घंटे देरी से कार्यालय पहुंचे। कहीं-कहीं तो दोपहर तक स्टाफ कार्यालय पहुंचा।
ऐसा नहीं है कि कर्मचारियों व अधिकारियों की लेटलतीफी से उच्चाधिकारी एवं मंत्री अनजान है, क्योंकि सरकार के स्तर पर कई बार जिला कलक्टर एवं अन्य विभागीय अधिकारियों को आदेश जारी कर कर्मचारियों को निर्धारित समय पर कार्यालय में रहने के लिए पाबंद किया जाता है। जिला कलक्टर को समय-समय पर निरीक्षण करने के निर्देश भी हैं, इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर सरकार ने बायोमेट्रिक मशीनें लगाकर कर्मचारियों व अधिकारियों को पाबंद करना चाहा, लेकिन कुछ ही दिनों बाद बायोमेट्रिक मशीनों को ही ठिकाने लगा दिया गया।

जानिए, कब-कब जारी हुए बायोमेट्रिक से उपस्थिति के आदेश

  • राजकीय विभागों, बोर्ड, निगम में कार्यरत सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक से क्रियान्विति करने के संबंध में राज्य सरकार के कार्मिक विभाग के प्रमुख शासन सचिव ने 6 फरवरी 2012 को जारी किए।
  • इसके बाद 30 मार्च 2012 को बजट घोषणा 2012-13 की पालना के लिए बायोमेट्रिक से उपस्थिति के आदेश किए गए। जिसके तहत सुबह साढ़े 9 बजे तथा शाम के छह बजे या उसके बाद उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य किया गया। यह व्यवस्था 2 अप्रेल 2012 से लागू की गई।
  • इसके बाद भी अधिकतर विभागों की बायोमेट्रिक मशीनें नहीं लगाई गईं, जिस पर राजस्थान सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने 30 अगस्त 2019 को आदेश जारी कर पूर्व में जारी आदेशों का हवाला देते हुए बायोमेट्रिक व्यवस्था को प्रभावी व उपयोगी बनाने के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए गए।
  • 16 दिसम्बर 2019 को प्रशासनिक सुधार के प्रमुख शासन सचिव डॉ. आर. वेंकटेश्वरन ने आदेश जारी किए, जिसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जारी परिपत्रों की पालना नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर बायो मेट्रिक मशीन पर हुए राजकोष से खर्च रुपए की वसूली की जाए एवं विभागीय जांच भी प्रस्तावित की जाए।

प्रदेश के 33 जिलों में बायोमेट्रिक लगाने को खर्च हुए 41.40 लाख रुपए
तकनीकी निदेशक एवं संयुक्त शासन सचिव, सूचना प्रौद्यौगिकी और संचार विभाग द्वारा प्राप्त सूचना के आधार पर बायोमेट्रिक व्यवस्था शुरू करने के लिए वर्ष-2012 में 106.23 लाख का बजट जारी किया गया। साथ ही प्रदेश के सभी 33 जिलों के लिए 41 लाख, 40 हजार रुपए व्यय करने की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है। नागौर के लिए 90 हजार रुपए खर्च किए गए।

नागौर के 12 कार्यालयों में शुरू हुई थी बायोमेट्रिक व्यवस्था
राज्य सरकार के निर्देश पर नागौर जिले के 12 कार्यालयों में बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू की गई थी, जो इस प्रकार है -

  • उप वन संरक्षक, नागौर
  • जिला उद्योग केन्द्र नागौर
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, नागौर
  • मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नागौर
  • राजकीय चिकित्सालय, नागौर
  • खनि अभियंता, नागौर
  • नगर परिषद, नागौर
  • क्षेत्रीय प्रबंधक, रीको, नागौर
  • खनि अभियंता, मकराना
  • राजकीय चिकित्सालय, लाडनूं
  • राजकीय चिकित्सालय, डीडवाना
  • राजकीय चिकित्सालय, कुचामनसिटी

दो में चालू, बाकी जगह से गायब
खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल द्वारा विधानसभा में लगाए गए प्रश्न के जवाब में करीब चार महीने पूर्व दी गई जानकारी के अनुसार नागौर जिले के 2 कार्यालयों में बायोमेट्रिक व्यवस्था चालू है व 8 कार्यालयों में बंद है। 8 कार्यालयों में यह व्यवस्था कोविड-19 के कारण तथा 2 कार्यालयों में तकनीकी खराबी के कारण बन्द बताई, लेकिन अब कोविड का असर भी समाप्त है। सोमवार को पत्रिका टीम ने जब स्टिंग किया तो सीएमएचओ कार्यालय व रीको कार्यालय में बायोमेट्रिक मशीन चालू मिली, लेकिन यहां भी कोई बायोमेट्रिक का उपयोग नहीं करते। अन्य कार्यालयों में बायोमेट्रिक मशीनें गायब मिली।


बहाने भी तगड़े, पढकऱ आएगी हंसी
स्टिंग के दौरान कार्यालय में उपस्थित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं जो उपस्थित मिले, उनसे अनुपस्थित अधिकारियों के बारे में पूछा तो ऐसे-ऐसे तर्क एवं बहाने गिनाएं कि हंसी आने लगी। एक कार्यालय में कर्मचारी ने कहा - ‘साहब, मंडे मीटिंग में हैं’, जब उससे कहा कि मीटिंग तो शाम को होती है तो वह बोला फिर फिल्ड में होंगे। किसी ने कहा - ‘साहब जयपुर गए हैं’ तो किसी ने कहा - ‘साहब के पास दूसरा चार्ज भी है, इसलिए वहां होंगे।’ एक कर्मचारी ने तो फोन करके बताया कि उसकी मोटरसाइकिल पंक्चर हो गई, इसलिए लेट हो गया।’

सफाई करने वाले भी बने लेटलतीफ
सीएमएचओ कार्यालय व नागौर सीडीपीओ कार्यालय में तो 10 बजे सफाई कर्मचारी सफाई करते नजर आए। देरी से सफाई करने के बारे में पूछा तो बोले - ताला ही लेट खुला है। सीडीपीओ कार्यालय में महिला ने कहा कि उसके पास दो कार्यालय की जिम्मेदारी है, इसलिए लेट हो गई।

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