scriptEven after spending more than Rs 2.5 crore, dirt is swallowing Bakhtasagar Park. | VIDEO...ढाई करोड़ से ज्यादा की राशि व्यय होने के बाद भी बख्तासागर पार्क को निगल रही गंदगी | Patrika News

VIDEO...ढाई करोड़ से ज्यादा की राशि व्यय होने के बाद भी बख्तासागर पार्क को निगल रही गंदगी

locationनागौरPublished: Dec 11, 2023 08:51:36 pm

Submitted by:

Sharad Shukla

-पार्क में कई जगहों पर मिट्टी हुई काली, घास भी मुरझायी, तालाब में सड़ांध मारती गंदगी से आसपास का वातावरण हो रहा प्रदूषित

Nagaur news
Even after spending more than Rs 2.5 crore, dirt is swallowing Bakhtasagar Park.

-जिम्मेदारों की बेपरवाही के चलते मिट्टी की प्रकृति बदलने के साथ ही पार्क का स्वरूप भी अब होने लगा बदरंग
-अभियान
-नाले का जमा गंदा पानी न केवल जमीन के अंदर रिसकर पहुंच रहा, बल्कि आड़े-तिरछे अंदाज में रखी निर्माणार्थ लाई सामग्री में पत्थरों व अन्य सामानों की वजह से बढ़ी मुश्किल
नागौर. दीवारों के रास्ते से पहुुंच रहे गंदे पानी ने शहर के बख्तासागर पार्क की हालत बिगाड़ कर रख दी है। पार्क की बेहतरी के लिए ढाई करोड़ से ज्यादा की राशि का व्यय किया गया था। हालांकि कई कार्य अभी अधूरे हैं, लेकिन हुए केार्यों पर इस गंदे पानी की वजह से अब इसकी सुंदरता पर ग्रहण लगने लगा है। कई जगहों पर गंदे पानी के कारण न केवल पार्क की घास खराब होने लगी है, बल्कि कुछ जगहों पर तो मिट्टी भी काली हो चुकी है।
शहर के बख्तासागर पार्क की हालत अब दिनों-दिन खराब होने लगी है। पार्क में आते गंदे पानी को रोके जाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए जाने के चलते पार्क के तीन ब्लॉक की जगह न केवल खराब हो चुकी है, बल्कि इसकी मिट्टी भी काली हो गई है। इसकी वजह से यहां पर उगी हुई घास का रंग भी बदलने लगा है। इसमें आ रहे गंदे पानी से तालाब का रंग तो बदला ही है, और अब पार्क का रंग भी बदलता नजर आने लगा है। तालाब के गंदे पानी की वजह से उत्पन्न हो रही सड़ांध की वजह से कोढ़ में खाज की स्थिति बन गई है। लोग चहल-कदमी के लिए आते तो हैं, लेकिन देखभाल के अभाव में पार्क की बिगड़ी हालत को देखकर वह बैरंग रवाना भी हो जाते हैं।
बदल रही मिट्टी की प्रकृति, कुछ जगहों पर जमीन हुई दलदली
पार्क में प्रवेश करने के बाद सीधा सामना गंदगी से होता है। सामने स्थित ब्लॉक के लगभग 90 प्रतिशत एरिया में गंदे पानी की वजह से जमीन साफ तौर पर काली और मुरझायी हुई घास नजर आती है। पार्क में लगी बेंचों पर बैठने के लिए भी कुछ जगहों पर गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता। इन स्थानों पर मिट्टी की प्रकृति भी बदली हुई होने से वातावरण में दुर्गन्ध बनी रहती है। पार्क के कम से कम तीन ब्लॉक की हालत इसके चलते बिगड़ चुकी है। इसके अलावा भी कुछ जगहों पर पैर जमीन पर रखते ही अंदर की ओर धसने लगता है। इन स्थानों पर फिसलन की भी स्थिति बन गई है। यहां पर सड़ांध मारता पानी, उस पर उड़ते बड़े पंखों वाले विषैले मच्छरों की भिनभिनाहट वाली आवाजों के बीच कीड़ों की मौजूदगी से पार्क में ठहरना ही मुश्किल होने लगा है। हालांकि पार्क के तीसरे ब्लॉक के हिस्से के पास जमीन सूखी होने के कारण वहां बैठे मिले रामनिवास , सुरेश, भरत , सुनील , राजू , दशरथ, सुभाष , सुंदरलाल, कमल, अशोक व बजरंग से बातचीत हुई तो बताया कि पार्क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। इस संबंध में नगरपरिषद के अधिकारियों से मुलाकात कर उनको अवगत भी कराया गया। आश्वासन जरूर मिला था, लेकिन अब तक आश्वासन पूरा नहीं हो पाया है। इसकी वजह से स्थिति यह हो गई है कि पार्क में अब टहलना तक मुश्किल होने लगा है।
पूर्व में दीवार की हुई थी मरम्मत, फिर से वही स्थिति बन गई
बताते हैं कि पार्क की दीवार के रास्ते बाहर से आ रहे गंदे पानी की आवक को रोकने के लिए कुछ अर्सा पहले दीवारों आदि की मरम्मत कराई गई थी। इससे कुछ दिनों तक गंदे पानी की आवक नहीं हुई, लेकिन बाद में फिर से वही स्थिति बन गई। अब फिर से पार्क में आ रहे गंदे पानी की आवक ने पूरे पार्क को ही निगलना शुरू कर दिया है।
इसकी वजह से भी बिगड़ रहे हालात
पार्क में छतरियों का निर्माण कार्य भी चल रहा है। इसमें प्रयुक्त होने वाली निर्माण सामग्री पार्क के तीसरे गेट के पास ट्रेक पर लगभग हर समय बिखरी रहती है। इसमें सीमेंट, बालू एवं पत्थरों के टुकड़े आदि भी रहते हैं। इस ओर गंदे पानी की वजह से न केवल फिसलन बनी रहती है, बल्कि यह ट्रेक भी फिसलन के कारण खतरनाक हो चुका है।
इनका कहना है...
बख्तासागर पार्क में गंदा पानी की आवक पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए थे। कुछ जगहों पर इसके लिए चेंबर आदि भी बने थे। इसके बाद भी पार्क में पानी आ रहा है तो इसे देखवाकर सही कराया जाएगा।
देवीलाल बोचल्लया, आयुक्त नगरपरिषद

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