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नागौर

हर साल ताबड़तोड रोप रहे पौधे पर संरक्षण के अभाव में अधिकतर जमींदोज

नागौर. मानसून का दौर निकट आने के साथ ही पर्यावरण के हितैषी जोर-शोर से पौधरोपण की तैयारी में जुट गए हैं। सरकार ने भी लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण का ढोल पीटने वाले प्रकृति प्रेमी पौधरोपण तो कर देते हैं पर एक दिन के आयोजन के बाद उनकी सुध कोई नहीं लेता। हर साल लाखों की तादाद में पौधों का रोपण करते हैं और संरक्षण के अभाव में हजारों पौधे पनपने से पहले ही दम तोड़ चुके होते हैं।

नागौरJun 20, 2024 / 01:14 pm

Ravindra Mishra

nagaur

देखरेख के अभाव में जला पेड़

– मानसून में हर साल लगने वाले पौधों की तुलना में कम आती हरियाली

– इस मानसून में भी लगाए जाएंगे 11 लाख से अधिक पौधे

नागौर. मानसून का दौर निकट आने के साथ ही पर्यावरण के हितैषी जोर-शोर से पौधरोपण की तैयारी में जुट गए हैं। सरकार ने भी लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण का ढोल पीटने वाले प्रकृति प्रेमी पौधरोपण तो कर देते हैं पर एक दिन के आयोजन के बाद उनकी सुध कोई नहीं लेता। हर साल लाखों की तादाद में पौधों का रोपण करते हैं और संरक्षण के अभाव में हजारों पौधे पनपने से पहले ही दम तोड़ चुके होते हैं। इसके पीछे कारण है कहीं पानी व्यवस्था नहीं है तो कहीं देखरेख का अभाव। इस बार भी नागौर व डीडवाना-कुचामन जिले में लाखों की तादाद में पौधे लगाए जाएंगे। स्वयंसेवी संस्थाएं और सरकारी विभागों ने लक्ष्य अनुरूप वन विभाग में डिमांड भी भेज दी हैं, लेकिन पिछले साल लगाए गए पौधों के क्या हालात है इसे संभालने वाला कोई नहीं है। जबकि पौधारोपण के बाद पानी देने से ज्यादा उसकी कटिंग व निराई गुडाई ज्यादा जरूरी है।
गत वर्ष 85 फीसदी ही पनपे

वन विभाग की ओर से पिछले साल मानसून में दोनों जिलों डीडवाना-कुचामन और नागौर जिले में 10 लाख 79 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया। इनमें से 85 फीसदी पौधे ही पनप पाए हैं। विभाग की ओर से 15-20 फीसदी खराब हुए इन पौधों का इस साल रिप्लेसमेंट किया जाएगा। पौधों के नष्ट होने का कारण विभागीय जानकार सर्दी में पडऩे वाले पाले को ज्यादा मानते हैं।
साल में दो पानी की व्यवस्था

वन विभाग की ओर से रोपे गए पौधों को साल में दो बार पानी देने की व्यवस्था की हुई है। विभाग की ओर से शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पौधों के हिसाब से प्रति पौधा तीन रुपए सिंचाई के लिए दिए जाते हैं। एक टैंकर से करीब दो सौ पौधों में पानी दिया जाता है, जबकि पहाड़ी इलाके में बारिश के पानी से ही पौधे पनपते हैं। पहाड़ी क्षेत्र में मरूस्थलीय पौधे नीम, खेजड़ी, रोहिड़ा आदि लगाए जाते हैं।
इस वर्ष 11 लाख 63 हजार का लक्ष्य

नागौर डिवीजन को इस वर्ष दोनों जिलों के लिए करीब 11 लाख 63 हजार पौधे मानसून के दौरान लगाने का लक्ष्य आवंटित किया है। इनमें दूसरे विभागों के साथ ही 6 लाख शिक्षा विभाग व 2 लाख पौधे पंचायतीराज विभाग के सहयोग से लगाए जाएंगे, जबकि प्रत्येक नगर निकाय को 15 हजार का लक्ष्य दिया गया। साथ प्रत्येक ग्राम पंचायत को 400 पौधे लगाने का लक्ष्य है।
इनका कहना

वनभूमि पर चालीस फीसदी पौधे आज भी जीवित है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पौधे लगाने के बाद उसकी देखरेख को लेकर लोग जागरूक नहीं। पौधों के संरक्षण के लिए ट्री गार्ड व फैंसिंग करानी चाहिए तथा इसी कटिंग व खाद आदि देने पर भी ध्यान देना चाहिए। विभाग भी लोगों को इस संबंध में जागरूक करेगा।
सुनील कुमार, उप वन संरक्षक, वन विभाग नागौर

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ऐसे करें पौधों का संरक्षण

1. पर्याप्त पानी : पानी पौधों को चिलचिलाती गर्मी और कडाके की सर्दी से बचाता है। गर्मियों में अच्छी तरह से पानी देने पर मिट्टी पानी के स्तर को बनाए रखने में मदद करती है।
2. भारी बारिश से बचाव : मानसून पौधे लगाने के लिए सबसे अच्छा मौसम है। इस समय पौधों की अतिरिक्त देखभाल करनी चाहिए। पानी देने से लेकर खाद देने तक कई चीजों पर नजर रखनी होती है। बारिश में पौधों को ज़्यादा पानी देने से जड़ें खराब हो सकती हैं।
3. गर्मी से बचाव : बहुत ज्यादा गर्मी अक्सर पत्तियों को जला देती है। इससे वे पूरी तरह से सूख जाती हैं और भूरी हो जाती हैं। नतीजतन, हमें उन्हें बचाने के लिए जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

पत्रिका व्यू

पौधों को अच्छे से देखभाल नहीं मिल पा रही है और इसके कारण पौधों की वृद्धि पर असर पड़ रहा है। यह समस्या हमारे प्राकृतिक पर्यावरण के लिए बहुत ही चिंताजनक है। हमें संरक्षण के लिए अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है ताकि पौधों का संरक्षण हो सके। यह बात सही है कि पौधों को रोपने के प्रयास तो हो रहे हैं, लेकिन धरातल पर काम नहीं दिख रहा है। धरातल पर काम करने के लिए, सबसे पहले यह महत्वपूर्ण है कि सही प्रकार की भूमि का चयन किया जाए। उपयुक्त मिट्टी, पोषक तत्वों से भरपूर मिट्टी, और सुरक्षित पर्यावरण में पौधों को उगाने से पौधों की संरक्षण में सहायक होता है। इसके अलावा, पानी की सुरक्षित उपलब्धता, समय-समय पर समुचित खाद और पौधों की सही देखभाल भी महत्वपूर्ण है। समुचित पौधों का चयन करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कुछ पौधे उस परिस्थिति में अच्छे से नहीं उग सकते हैं, जिसमें काम हो रहा है। इन सभी मुद्दों पर विचार करके, पौधों को धरातल पर उगाने में सहायता मिल सकती है। जो हमारी प्राकृतिक विरासत की संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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