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पेट्रोलियम पाइप लाइन डालने के लिए किसानों से छलावा

locationनागौरPublished: Dec 12, 2023 04:42:11 pm

Submitted by:

Ravindra Mishra

-सांजू, डेगाना व मेड़ता सिटी तहसील के गांवों की सीमा से गुजरेगी आईओसीएल की पाइप लाइन

- संयुक्त खाताधारक किसान ज्यादा परेशान
- कम्पनी दे रही डीएलसी दर का 40 प्रतिशत मुआवजा

 पेट्रोलियम पाइप लाइन डालने के लिए किसानों से छलावा
कुचेरा. पेट्रोलियम पाईप लाईन के लिए बनाया पट्टा।
नागौर जिले के सांजू, डेगाना व मेड़ता सिटी तहसील क्षेत्र के गांवों की सरहद से होकर गुजरने वाली पेट्रोलियम पाइप लाइन के लिए सम्बन्धित कम्पनी किसानों को नाम मात्र का मुआवजा पकड़ाकर जमीन हथियाने में लगी है। किसानों के खाते अलग नहीं होने से मुआवजा राशि भी संयुक्त खाताधारकों में बंटने से प्रभावित किसानों को दिहाड़ी मजदूरी जितना भी मुआवजा नहीं मिल पा रहा। इससे रबी व खरीफ की साल में दो फसलें लेने वाले किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि पेट्रोलियम पाइप लाइन डालने का काम लम्बा चलेगा। इसके बावजूद उन्हें डीएलसी दर का महज 40 प्रतिशत तक मुआवजा मिलेगा, जबकि जिले में कई जगह किसान जागरूक होने से उन्हें अन्य कम्पनियां डीएलसी दर का 500 से 1000 फीसदी तक मुआवजा देती है।
नाम मात्र का मिलेगा मुआवजा

जानकारी के अनुसार जिन खेतों में से पाइप लाइन निकल रही है। उसका नाप करके डीएलसी दर का 40 प्रतिशत मुआवजा दिया जा रहा है। सांजू तहसील के राजोद, चकढाणी, बिचपुड़ी, पुनास ग्राम पंचायत के मालास, खारिया, चौलियास ग्राम पंचायत के चौलियास, नेणास आदि गांवों में समान्य डीएलसी दर 17600 रुपए के करीब है। इससे किसानों को महज 7000 रुपए के करीब मुआवजा मिलेगा। उसमें भी संयुक्त खाते होने से करीब 20 खाताधारक किसानों में मुआवजा बंटने से प्रभावित किसान को महज 350 रुपए मिलेंगे। दिहाड़ी मजदूरी से भी कम इस राशि के बदले किसान की जमीन को दो -तीन दशक तक निर्माण आदि में काम नहीं ले सकेगा।
मुआ बुवाई की राशि भी अधिक
किसानों का कहना है कि क्षेत्र में जमीन की मुआ (किराये) पर लेकर बुवाई करने वाले किसान भी प्रतिबीघा 8 से 10 हजार रुपए सालाना देते हैं। पशुचारण के लिए जमीन 5000 रुपए प्रतिबीघा तक ली जाती हैं। जबकि पाइप लाइन के लिए मुआवजा इनके मुकाबले में काफी कम है।
इनका कहना है

पाइप लाइन डालने के लिए डीएलसी दर का 40 प्रतिशत मुआवजा दिया जा रहा है, जो काफी कम है। नियमानुसार 40 प्रतिशत कामगार व सभी वाहन स्थानीय लगाने होते हैं, जबकि मौके पर ऐसा नहीं हो रहा है। भारतमाला रोड़ बनाते समय प्रति खेजड़ी पेड़ के 45 हजार रुपए तक मुआवजा दिया गया था। यहां किसानों को नाम मात्र मुआवजा देकर राज्यवृक्ष खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। इससे किसानों व पर्यावरण प्रेमियों में रोष व्याप्त है।
पांचाराम विश्नोई किसान, बिचपुड़ी।
किसानों को उनके हक का मुआवजा नहीं मिल रहा है। नाम मात्र के मुआवजे के साथ ही दुर्लभ पेड़ काटने से किसानों व पर्यावरण को भारी नुकसान होने के बावजूद पूरा मुआवजा नहीं दिया जा रहा है।
आनन्द बिश्नोई, किसान बिचपुड़ी
किसानों को डीएलसी दर का 40 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जा रहा है। साथ ही पेड़ों व फसल का भी मुआवजा दिया जाएगा। रामचन्द्र विश्नोई, एलओ, आईओसीएल।
मुआवजा दो तरह से दिया जा रहा है। लाइन के लिए जमीन का मुआवजा संबंधित तहसील की डीएलसी दर का 40 प्रतिशत तथा पेड़ पौधों व फसल का सम्बन्धित विभाग से चर्चा कर निर्धारित किया जाता है।
गोकुलदान चारण, प्रभारी, आईओसीएल।

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