Fathers Day.फादर्स डे पर पिताओं ने खोले अपने दिल के राज

Fathers Day.फादर्स डे पर पिताओं ने खोले अपने दिल के राज
Fathers Day opens their hearts to the Father

Sharad Shukla | Publish: Jun, 16 2019 11:33:14 PM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

फादर्स डे, एक पिता के लिए क्या अहमियत रखता है। इस दिवस को लेकर वह क्या संोचते हैं आदि बिंदुओं पर शहर के कुछ पिताओं से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि यह तो पिछले कुछ सालों से चलन बढ़ा है, लेकिन यह विदेशों का कल्चर है।

नागौर. फादर्स डे, एक पिता के लिए क्या अहमियत रखता है। इस दिवस को लेकर वह क्या संोचते हैं आदि बिंदुओं पर शहर के कुछ पिताओं से बातचीत हुई तो उनका कहना था कि यह तो पिछले कुछ सालों से चलन बढ़ा है, लेकिन यह विदेशों का कल्चर है। विदेशों में 18 वर्ष के बाद पुत्र अपने पिता से ज्यादातर अलग हो जाता है, लेकिन भारत में नहीं। यहां तो हर दिन ही ही फादर्स डे होता है।
एक पिता की सोच, उनकी जुबानी
भारत में फादर्स डे की कोई जरूरत नहीं है। विदेशी कल्चरों ने अब भारत की भारतीयता को न केवल पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है, बल्कि आमजीवन में भी उनकी घुसपैठ हो गई है। हम तो भारतीय हैं, और भारतीय ही रहेंगे। हमें विदेशी कल्चर की कोई आवश्यकता नहीं है। यहां पर एक पुत्र अपने पिता के लिए बोझ नहीं, बल्कि नैतिक-धार्मिक संस्कारों दायित्व होता है। यह विदेशों में नहीं है।
शिवराज टांक
फादर्स डे पर क्या कहूं, बस इतना ही कहा जा सकता है कि भारत में अपने पुत्र की परिवरिश आत्मिक-धार्मिक संस्कारों एवं आस्था के फलस्वरूप होती है। पिता और पुत्र के तार केवल सैद्धांतिक तौर पर ही नहीं, बल्कि मन से जुड़े रहते हैं। पुत्र को सुव्यवस्थित एक बेहतर मुकाम पर पहुंचाना हर पिता अपना धर्म समझता है, और यह फादर्स डे तो विदेशी नकल है, बस।
किशोर सिंघवी
फादर्स डे तो संांस्कृतिक आदान-प्रदान के फलस्वरूप उपजी है। भारत में तो अपने पिता के कथन मात्र को अछरश: साकार करने के लिए प्राचीन भारत में पुत्रों ने अथक बलिदान किए हैं, और पिताओं ने भी अपनी समर्पित भावना का परिचय दिया है। विदेशी कल्चर के लोग इस भारतीयता को कभी नहीं समझ पाएंगे। हालांकि वर्तमान समय में विदेशी कल्चर के प्रभाव में आकर यह रूप बिगड़ा जरूर है, लेकिन अभी भी भारतीयता बची हुई है।
गणेश त्रिवेदी
पिता के समर्पण एवं उनके त्याग को एकेडमिक रूप से मनाया जाना भी ठीक ही है। वर्तमान समय में रिश्तों के बदलते रंगों में फादर्स डे मनाए जाने का तात्पर्य पुत्रों को उनके पिता के समर्पण का एहसास कराने का दिवस है। ठीक है, कल्लर तो विदेशी है, लेकिन यह विदेशी कल्चर का सम्मिश्रण का परिणाम है।
मांगीलाल सोनी

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