scriptfinally the report came, 80 samples were found to be failed | ...आखिर आ गई रिपोर्ट, 188 में से 80 नमूने ‘गड़बड़’ | Patrika News

...आखिर आ गई रिपोर्ट, 188 में से 80 नमूने ‘गड़बड़’

जिला मुख्यालय पर प्रयोगशाला के अभाव में देरी से मिलती है रिपोर्ट
- सात व्यापारियों को नहीं अजमेर प्रयोगशाला की रिपोर्ट पर भरोसा, जताई आपत्ति

नागौर

Published: December 25, 2021 08:59:10 pm

नागौर. दीपावली के त्योहार पर खाद्य पदार्थों में मिलावट होने की आशंका को देखते हुए लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट चिकित्सा विभाग को आखिर मिल गई है। करीब 39 लाख की जनसंख्या वाले जिले में चिकित्सा विभाग के एक मात्र खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा पूरे वर्ष में 190 नमूने लिए गए हैं, जिनमें 70 से अधिक दीपावली के मौके पर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान लिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि सालभर में लिए गए 190 नमूनों में 80 नमूने फेल पाए गए हैं, यानी उनकी रिपोर्ट मानव स्वास्थ्य के हिसाब से गड़बड़ है। हालांकि यह बात और है कि जिन मिठाइयों व खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए थे, उनकी खपत हो चुकी है।
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finally the report came, 80 samples were found to be failed
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिन व्यापारियों के नमूने फेल हुए हैं, उनमें से सात जनों ने आपत्ति जताई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश जांगीड़ ने बताया कि जिनके नमूने फेल हुए, उनको रिपोर्ट भेजी गई, जिस पर सात जनों ने आपत्ति जताई है। इसलिए अब सात नमूनों की जांच केन्द्रीय खाद्य प्रयोगशाला पुणे में करवाई जाएगी।
हर बार 40 फीसदी से अधिक नमूने हो रहे फेल
जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट का अवैध कारोबार लगातार जारी है। हालांकि राज्य सरकार ने गत वर्ष इसको लेकर सख्ती दिखाई, लेकिन मिलावटखोरों में इसका असर कम ही नजर आया, यही कारण है कि इस वर्ष भी 40 फीसदी से अधिक नमूने जांच में गड़बड़ पाए गए हैं। पिछले पांच साल की कार्रवाई एवं नमूनों की जांच रिपोर्ट यह बता रही है कि स्थिति दिनों-दिन खराब हो रही है और मिलावटखोरों में जुर्माने का खौफ नहीं है।
संसाधनों के साथ मैन पॉवर का अभाव
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिले में खाद्य पदार्थों की जांच के लिए चिकित्सा विभाग में मात्र एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी है, जिनके पास न तो वाहन है और न ही पर्याप्त स्टाफ। हालांकि जिले में तीन खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पद काफी समय पहले से स्वीकृत हैं। साथ ही जिले में खाद्य पदार्थों की जांच की व्यवस्था नहीं होने से भी अजमेर प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट आने में महीनाभर लग जाता है। नमूने लेने से लेकर उन्हें प्रयोगशाला भेजने, रिपोर्ट आने पर उनके केस बनाकर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया में काफी समय लगता है।
नागौर : पांच साल की कार्रवाई पर एक नजर
वर्ष - कुल नमूने - फेल - कोर्ट में पेश
2017 - 86 - 34 - 34
2018 - 131 - 44 - 44
2019 - 159 - 56 - 56
2020 - 240 - 85 - 85
2021 - 190 - 80 - 36
सरकार ने फिर मांगी रिपोर्ट
खाद्य पदार्थों में मिलावट पर अंकुश लगाने के लिए राज्य के सभी जिलों में प्रयोगशाला खोलने के लिए राज्य सरकार ने डेढ़ साल पहले आदेश जारी किए थे। इसके लिए प्रदेश स्तर पर तीन कमेटियां भी गठित की गई और प्रयोगशाला के लिए सभी जिलों से प्रस्ताव भी मांगे, लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसको लेकर राजस्थान पत्रिका ने गत 14 नवम्बर को ‘हर जिले में खाद्य प्रयोगशाला खोलने की घोषणा करके भूली सरकार’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर जिम्मेदारों का ध्यान आकृष्ट किया। समाचार प्रकाशित होने के बाद ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक रवि शर्मा ने सभी जिलों से वापस रिपोर्ट मांगी। अतिरिक्त निदेशक के निर्देश पर गत दिनों नागौर सीएमएचओ ने रिपोर्ट भिजवाई है। जिसमें जिला मुख्यालय पर खाद्य प्रयोगशाला के लिए 1.20 करोड़ का बजट मांगा गया है।
सरकार को वापस भिजवाया प्रस्ताव
जिला मुख्यालय पर खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला खोलने के लिए विभाग ने गत दिनों दुबारा प्रस्ताव मांगे थे, जिसकी पालना में 1.20 करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव भिजवा दिया है। जहां तक फेल हुए नमूनों की बात है कि उनके केस बनाकर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया जारी है।
- डॉ. मेहराम महिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नागौर

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