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भूले देशी खान-पान, पिज्जा बर्गर बने शान

हमारी विरासत

रवीन्द्र मिश्रा
नागौर . देशभर में मारवाड़ के परम्परागत खान-पान का अपना अलग ही महत्व है। खासकर सर्दी में बनने वाले सेधाणे के लड्डू व हल्दी की सब्जी, जो शरीर को ताकत देने के साथ ही व्यक्ति की स्मरण शक्ति भी बढ़ाती है। नागौर शहर में विशेषतौर पर रोजाना चार-पांच घंटे मिठाई बाजार सजता है।

नागौर

Published: December 27, 2021 06:22:53 pm

- सर्दी में मारवाड़ का परम्परागत खान-पान देशभर में प्रसिद्ध

- लेकिन नई पीढ़ी इसे भूलने लगी

- शाम को काठडिय़ा में सजता है मिठाई बाजार

- गरमा गरम केसर दूध-गाजर के हलवे का लुत्फ उठाते हैं लोग
भूले देशी खान-पान, पिज्जा बर्गर बने शान
नागौर. शहर के काठडिय़ा चौक में सर्दी के मौसम में रात को गरमा गरम केसर दूध व गाजर के हलवे का आनन्द लेते लोग।
- नई जनरेशन को भा रहा- पिज्जा-चाऊमिन- मोमोज

- शहर मेंं इनकी भी लगती है स्टॉलें

यहां शहर व आस-पास के गांवों के लोग ताजी बनी मावा व दूध की मिठाई का आनन्द लेते हैं। साथ ही गरमा-गरम केसर पिस्ता का दूध सर्दी की सिरहन को दूर भगाता है। लेकिन बदलते दौर में बच्चे व युवा पीढ़ी इन परम्परागत पकवानों को छोड़ पिज्जा, पास्ता, चाऊमिन व मोमोज की ओर आकर्षित हो रहे हैं। शहर के हर गली मोहल्लों में फास्ट फूड सेन्टर खुल गए हैं। जिस तरह शहर के काठडिय़ा चौक में मिठाई बाजार सजता है, उसी तरह नकास गेट के पास फास्ट फूड का बाजार सजने लगा है। जहां शाम होते ही बच्चों और युवाओं की भीड़ लग जाती है।
सर्दी के साथ स्वाद का आनंद
कहते हैं सर्दी अपने साथ स्वाद का आनंद लेकर आती है। बात यदि पारम्परिक व्यजंनों की हो, तो कहना ही क्या? नागौर शहर में खाने-पीने पर विशेष जोर रहता है। सर्दी में पारम्परिक भोजन की डिमांड दोगुनी हो जाती है। आयुर्वेद भी कहता है कि शीत ऋतु में जठराग्नि तीव्र होने से पाचनशक्ति भी प्रबल रहती है। इस समय लिया गया पौष्टिक और बलवर्धक आहार वर्षभर शरीर को पुष्टि प्रदान करता है।
काठ (लकड़ी) के बर्तन की मिठाई से पड़ा काठडिया नाम
जानकारों ने बताया कि शहर के काठडिय़ां चौक में सजने वाले मिठाई बाजार में पुराने समय में काठ (लकड़ी) के बर्तन में कलाकंद जमा कर बेचा जाता था। लोग हलवाई से काठ का कलाकंद नाम से कलाकंद मिठाई खरीदते थे। इस कारण चौक का नाम काठडिय़ा का चौक हो गया। यहां हर रोज शाम को मिठाई की दुकानें सजती है। लोग सर्दी में गर्म दूध, रबड़ी व दूध फीणी का रात तक आनन्द लेते नजर आते हैं। मिठाई के साथ हथाई का दौर भी चलता है।
पहले बंशीवाला मंदिर फिर जमा मिठाई बाजार
पुरातन परम्पराओं व इतिहास के जानकार गोपाल अटल बताते हैं कि 1100 साल पहले अजमेर के राजपूत शासक पृथ्वीराज चौहान ने नागौर व खाटू शहर बसाया था। पृथ्वीराज पाण्डवों के आखिरी वंशज थे। नागौर की स्थापना से पहले उन्होंने बंशीवाला मंदिर बनवाया। परम्परा है कि जहां मदिर होता है वहां पूजा सामग्री, पुष्प व प्रसाद की दुकानें भी लगती है। यहां भी प्रसाद की दुकानों ने बाद में मिठाई बाजार का रूप ले लिया। शाम को चार-पांच घंटे लगने वाले इस बाजार में मिठाई खाने के शौकीन लोग काफी संख्या में पहुंचते हैं। पहले शहर के लोग परिवार के साथ खाने के लिए कण्डी (छाबड़ी) में मिठाई ले जाते थे। पत्नी के साथ अपने कमरे में खाने के लिए साफा या टोपी में छिपाकर काठडिय़ा की मिठाई खरीदकर ले जाते थे। मावे का कलाकंद, दूध की चक्की, पेठा-पेड़ा यहां की प्रसिद्ध मिठाई है। इस बाजार की खास बात यह है कि रोज जितनी मिठाई बनाते हैं उतनी ही बिक जाती है। वे बताते है कि मारवाड़ में पाली-जालोर व नागौर तीन जिले आते हैं। नागौर दो भागो में बंटा है सालग क्षेत्र और थली क्षेत्र। थली क्षेत्र उत्तर-पश्चिम का रेगिस्तानी इलाका कहलाता है और सालग दक्षिण पूर्वी क्षेत्र (मूण्डावा से अजमेर तक) कहलाता है। इस क्षेत्र के लोगों को मावे से बनी मिठाई अत्यधित प्रिय है। नागौर के काठडिय़ा की मिठाई ने तो देशभर में नाम कमाया है।
दिन में पौष्टिक मिठाई तैयार रात में बिक्री

काठडिया में मिठाई विक्रेता नवरतन वैष्णव बताते हैं कि दिनभर कारखाने में मिठाई बनाने का काम चलता है। शाम को चार बजे से दुकाने सजने लगती है। दुकानों पर प्रमुख रूप से सर्दी में सधेणे, मैथी, उड़द दाल व गूंद गिरी के लड्डू बनाए जाते हैं। सर्दी के हिसाब से गूंदपाक, गाजर का हलवा, केसर-पिस्ता बादाम का दूध, अंजीर का दूध, रबड़ी, दूध फिणी- दूध घेवर की खास बिक्री होती है। गूंदपाक में गोंद, खोपरा गिरी, बादाम, काजू, पिस्ता, काली मिर्च, आटा आदि होता है। इसी तरह उड़द के लड्डू में उड़द दाल पाउडर, खोपरा, बादाम, देशी खाण्ड, मूसली पाउडर डाला जाता है जो शरीर को ताकत देने वाले होते हैं। वे बताते हैं कि उनके यहां रात तक करीब 25 किलो दूध, 10 किलो गाजर का हलवा व 5 किलो के करीब फीणी की रोजाना बिक्री हो जाती है। शहर व आस-पास के गांवों तक से लोग यहां दूध फीणी व गाजर के हलवे का आनन्द लेने पहुंचते हैं।
सर्दी में स्वस्थ रखते हैं ये व्यजंन
वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ.शिवकुमार शर्मा ने बताया कि सर्दियों में गर्म तासीर वाले परम्परागत व्यजंन काफी फायदेमंद हैं। बाजरा में रिच फाइबर व आयरन होता है। गोंद शरीर में ताकत देता है। सर्दियों में गाजर और हल्दी जैसे सीजनल फूड दूध, रबड़ी, घी, मक्खन, शहद, उड़द, खजूर, तिल, नारियल, मैथी, सूखा मेवा तथा अन्य पौष्टिक पदार्थ खाने चाहिए। ये तेज सर्दी के दौरान शरीर में गर्महाहट बनाए रखते हैं।
कचौरी ने दिलाया प्रशंसा पत्र
मिठाई ही नहीं काठडिय़ा की कचौरी भी प्रसिद्ध है। यहां फिनसा कचौरी वाले के नाम से मशहूर रामनिवास वैष्णव ने 1959 में देश में पंचायतराज की व्यवस्था की शुरुआत करने नागौर आए प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू को अपने हाथों से बनी कचौरी खिलाई थी। पण्डित नेहरू को कचौरी इतनी ज्यादा पसंद आई कि उन्होंने वैष्णव को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया।
नकास पर लगता है फास्ट फूड कॉर्नर
शहर के विस्तार और परिवर्तन के दौर में आज फास्टफूड सेन्टर व कॉर्नर काफी खुल गए है। नकास गेट के नजदीक तो बाकायदा चाट बाजार लगने लगा है। जहां दोपहर से रात तक युवाओं व बच्चों की चाऊमिन, पिज्जा, पास्ता , मोमोज, स्प्रिंगरोल आदि का आस्वादन करने के लिए भीड़ लगी रहती है।

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