नागौर में झींगा पालन का सुनहरा भविष्य, कैसे होगा पालन, पढि़ए पूरी खबर

झींगा पालन के लिए उपयुक्त है नागौर का खारा पानी, नागौर में खारे पानी की प्रचूर मात्रा
- झींगा पालन करने वाले कृषकों को मिलेगा अनुदान
- मत्स्य विभाग ने नागौर जिले में करवाया लवणीय जल का रासायनिक विश्लेषण

By: shyam choudhary

Published: 03 Apr 2021, 10:33 AM IST

नागौर. देश में पहले जहां झींगा उत्पादन का कार्य प्राकृतिक रूप से समुद्र के खारे पानी से किया जाता था, वहीं अब कृषि में हुए तकनीकी विकास और अनुसंधान के चलते झींगा का सफल राजस्थान के मरूस्थल में भी सम्भव हो चला है। राजस्थान के चूरू जिले में 100 से अधिक मत्स्य कृषकों द्वारा झींगा (श्रिम्प) पालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है। वहीं नागौर जिले के कृषकों के लिए खुशखबरी यह है कि यहां का लवणीय जल झींगा पालन के लिए काफी उपयुक्त पाया गया है।

चूरू में मिली सफलता के बाद नागौर जिले के भूगर्भीय जल में उपलब्ध लवणता को देखते हुए मत्स्य विभाग ने नागौर के सभी खण्डों में लवणीय जल का रासायनिक विश्लेषण करवाया, जिसके बाद यह पता चला है कि नागौर जिले में उपलब्ध भूगर्भीय जल झींगा पालन के लिए वरदान साबित हो सकता है, क्योंकि यहां का लवणीय जल झींगा पालन के लिए काफी उपयुक्त पाया गया है।

एक हैक्टेयर में 8 लाख तक कमाई
मत्स्य विभाग के अनुसार प्रदेश के चूरू जिले में 100 से अधिक मत्स्य कृषकों द्वारा सफलतापूर्वक झींगा पालन किया जा रहा है। झींगा पालन कर कृषक लगभग 6 से 8 लाख रुपए प्रति हैक्टेयर प्रतिवर्ष अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं। झींगा पालन के लिए मत्स्य विभाग द्वारा इच्छुक कृषकों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसके अतिरिक्त मत्स्य विभाग द्वारा केन्द्रीय प्रवर्तित योजना ‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’ के अन्तर्गत नियमानुसार अनुदान/सहायता भी प्रदान की जाती है।

सामान्य को 40, शेष को 60 प्रतिशत अनुदान
निजी जमीन पर झींगा पालन के लिए तालाब निर्माण, जल व्यवस्था के लिए निर्माण एवं फीड भण्डारण निर्माण के लिए 8 लाख रुपए प्रति इकाई लागत पर सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत के हिसाब से 3.20 लाख रुपए तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग एवं सभी महिलाओं व सहकारी समितियों को 60 प्रतिशत के हिसाब से 4.80 लाख रुपए का अनुदान देय है। पॉलीलाइनिंग बिछाने के लिए लागत का 25 प्रतिशत तक (अधिकतम रुपए 2 लाख) अनुदान देय है।

पहले वर्ष में खर्च का 40 से 60 प्रतिशत तक अनुदान
मत्स्य कृषकों को नए तालाब निर्माण, जीर्णोद्धार तालाब, पोखर में मत्स्य पालन के लिए प्रथम वर्ष में उपादान के रूप में मत्स्य बीज, फीड आदि क्रय के लिए प्रति हैक्टेयर 6 लाख रुपए इकाई लागत पर सामान्य वर्ग को 40 प्रतिशत (2.40 लाख रुपए) तथा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग एवं सभी महिलाओं व सहकारी समितियों को 60 प्रतिशत (3.60 लाख रुपए) का अनुदान देय है। इसके लिए इच्छुक मत्स्य कृषक, जो अपनी निजी लवणीय भूमि पर झींगा पालन का कार्य करना चाहते हैं, मत्स्य विकास अधिकारी, अजमेर कार्यालय के दूरभाष नम्बर 0145-2623229 पर सम्पर्क कर प्रोजेक्ट प्रस्ताव आदि की जानकारी प्राप्त कर आवेदन कर सकते हैं।

नागौर में झींगा पालन की अच्छी संभावनाएं
नागौर जिले के भूगर्भीय जल में उपलब्ध लवणता को देखते हुए नागौर के सभी खण्डों में झींगा पालन की अच्छी संभावनाएं हैं। चूरू के कृषकों ने इस क्षेत्र में काफी अच्छा काम किया है। मत्स्य विभाग द्वारा नागौर के लवणीय जल का रासायनिक विश्लेषण करवाने पर यह सामने आया है कि नागौर में उपलब्ध भूगर्भीय जल झींगा पालन के लिए वरदान साबित हो सकता है।
- आरुषि मलिक, शासन सचिव, पशुपालन, गोपालन एवं मत्स्य विभाग, राजस्थान सरकार

shyam choudhary Reporting
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