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कमाई और बढ़ाने की जुगत में सरकार अब होटल-रेस्तरां बार के लिए मनुहार

संदीप पाण्डेय

नागौर . शराब सेहत के लिए खराब होती है। यह बात बरसों से सुनते आए हैं, बोतल-पव्वे पर इसकी वैधानिक चेतावनी होती है सो अलग। बावजूद इसके मदिरा की कमाई को और बढ़ाने के लिए सरकार होटल-रेस्तरां का सर्वे करा रही है ताकि उन्हें बार का लाइसेंस देने की ‘मनुहार’ कर सके। यह तो तब जबकि इस साल वर्ष 2022-23 में 460 करोड़ का लक्ष्य था, जिसमें से 440 करोड़ पूरा हो चुका है और नौ दुकानें शेष हैं। यही नहीं शराब की काला बाजारी में पकड़े वाहनों की नीलामी के साथ बकायादारों पर भी शिकंजा कसा गया है।

 

नागौर

Updated: May 08, 2022 09:34:35 pm


एक्सक्लूसिव

सूत्र बताते हैं कि शराब का विरोध भले ही घर से गांव, समाज से शहर तक होता हो पर सरकार की मुख्य कमाई का जरिया भी यही है। जिलेभर में 277 दुकान हैं, जिनको पिछले वर्ष 2021-22 में 410 करोड़ का लक्ष्य दिया गया था, जो इस साल पचास करोड़ बढ़ाकर 460 करोड़ किया गया है। बात यहीं खत्म नहीं हुई, सरकार अब ऐसी होटल-रेस्तरां की तलाशने में जुट गई है, जिन्हें बार का लाइसेंस देकर कमाई को बढ़ाया जाए। अभी जिले में एक दर्जन होटल और तीन रेस्तरां में बार चल रहा है।
 शराब सेहत के लिए हानिकारक है पर आय बढ़ाने की धुन सवार
आबकारी विभाग का सर्वे शुरू, उपयुक्त को बार लाइसेंस के लिए करेंगे तैयार, पुराने बकायादारों से वसूली के साथ वाहनों की नीलामी कर राजस्व जुटाने का प्लान
कमाई बढ़ाने की नई रणनीति

सूत्रों के अनुसार हाल ही में होटल-रेस्तरां का सर्वे कराने का निर्णय लिया गया है ताकि जो बार लाइसेंस के लिए उपयुक्त हों, उन्हें इसका ऑफर दिया जा सके। हालांकि लाइसेंस फीस अथवा अन्य शर्तों में कोई रियायत नहीं दी जाएगी। नागौर जिले में करीब पचास होटल हैं जबकि इतने ही रेस्तरां हैं। होटल में लाइसेंस के लिए बीस कमरे समेत अन्य शर्तें यथावत है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में इनके हाईवे से 220 मीटर दूर होने की बाध्यता है। रेस्तरां में एक हॉल समेत अन्य पूर्व की तरह शर्त है। सर्वे के बाद आबकारी विभाग बार लाइसेंस के लिए फिट होटल- रेस्तरां का चयन कर इनको सरकारी मार्केटिंग के तहत जोडऩे की कोशिश करेगा। यानी शराब के शौकीनों को और राहत मिलेगी। सर्वे से वो होटल-रेस्तरां अलग रहेंगी जहां बार चल रहे हैं।
वाहनों की भी नीलामी

सूत्रों का कहना है कि सरकार का पूरा फोकस शराब के कारोबार से जुड़ी अन्य वस्तुओं पर भी फोकस है, जिनसे कमाई हो सके। इसके लिए अब थानों में पड़े वाहनों पर नजर डाली गई है। जिलेभर के सभी थानों में पड़े ऐसे वाहनों की जानकारी मांगी गई है। इसके बाद इनके मालिक/चालक को नोटिस देकर वाहन कानूनी स्तर पर छुड़ाने के लिए कहा जाएगा। इनका जवाब नहीं मिला तो सूचना के बाद इनकी नीलामी होगी। प्राथमिक तौर पर करीब तीन दर्जन वाहन हैं जो शराब की तस्करी में पकड़े गए थे, इनमें आधा दर्जन ट्रक हैं।
बकाया वसूलने के लिए फिर उपकार

यही नहीं सरकार अपने बकाया वसूलने पर पूरा जोर लगाने में जुट गई है। इसमे कई पर बरसों से बकाया हैं। इनमें अयोध्या में कभी बाहुबली रहे राजेश निगम से बकाया वसूलने का भी मामला है, जिसकी सम्पत्ति के लिए दो बार नीलामी की कोशिश हो चुकी, लेकिन हो नहीं पाई। नागौर आबकारी विभाग का इस पर 24 करोड़ बकाया है। बकाया भी ताजा नहीं करीब 21 साल पुराना है, ब्याज-जुर्माना समेत मिलाकर वैसे तो यह राशि एक सौ चार करोड़ तक पहुंच गई थी। एम्बेसी योजना के तहत ब्याज/जुर्माना छोडऩे के बाद 24 करोड़ है। यही नहीं कई अन्य ठेकेदारों पर भी लाखों का बकाया है, अब इनसे सम्पर्क कर फिर से राहत देते हुए वसूली करने पर जोर रहेगा।
80 डिफॉल्टर, दस करोड़ बाकी

सूत्र बताते हैं कि मार्च में समाप्त हुए वर्ष 2021-22 के बकायादारों से भी वसूली करना टेढ़ी खीर बना हुआ है। जिले में अस्सी डिफाल्टरों से करीब दस करोड़ वसूलने हैं। इससे पहले के बकायादारों का लगभग पचास करोड़ अलग से। सरकार किसी भी तरह से इस बकाया को डूबने नहीं देना चाहती। रह-रह कर इन ठेकेदारों को भी बार-बार राहत दिए जा रहे हैं।
रोजाना दो करोड़ से अधिक की बिकवाली

सूत्र बताते हैं कि नागौर जिले में दो करोड़ से अधिक की शराब खरीदी जाती है। अप्रेल 2021 से 31 जनवरी तक रोजाना नागौर जिले में दो करोड़ से अधिक की शराब बिकी। इन दस महीनों में 625 करोड़ की शराब बिकी। बिकवाली करीब सवा छह सौ करोड़ की हुई तो सरकार के पास सीधे तीन सौ करोड़ कमाई के गए। यानी सरकार ने रोजाना एक करोड़ की कमाई की। इसके अलावा वैट के हिस्से करीब 120 करोड़ तो ठेकेदारों के खाते 90 करोड़ आए। करीब 115 करोड़ शराब उत्पादक तक पहुंचे। मतलब 625 करोड़ में से 510 करोड़ अलग-अलग हिस्सों में कमाई के रूप में गए।
इनका कहना

होटल-रेस्तरां का सर्वे हो रहा है, जो बार लाइसेंस के लिए पूरी तरह फिट पाए जाएंगे, उनसे इसके लिए कहा जाएगा। अवैध शराब के चलते पकड़े गए वाहनों की नीलामी की भी योजना है। सरकार ने बकायादारों को एम्बेसी योजना के तहत छूट देकर वसूलने के निर्देश भी दिए हैं।
-मोहनराम पूनिया, जिला आबकारी अधिकारी नागौर

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