कर्मवीर बन सेवाएं दे रहे आयुर्वेद विभाग के कार्मिकों की उपेक्षा कर रही सरकार

संक्रमण रोकने के पहले मोर्चे पर खड़े कर दिए सिपाही, न ढाल दी और न तलवार, बॉर्डर चेकपोस्ट पर खड़े कार्मिकों के पास सेनेटाइजर व दस्ताने तक नहीं

By: Jitesh kumar Rawal

Published: 08 Apr 2020, 08:05 PM IST

जीतेश रावल

नागौर. कोरोना में आयुर्वेद विभाग भले ही कर्मवीर बनकर सेवाएं दे रहा है, लेकिन सरकार इनकी उपेक्षा कर रही है। अन्य राज्यों से आने वाला संक्रमण रोकने के पहले मोर्चे पर डटे इन सिपाहियों के पास न तो लडऩे के लिए तलवार है और न ही बचाव की ढाल। इन कार्मिकों के पास दस्ताने तो दूर सेनेटाइजर तक नहीं है। स्क्रीनिंग के नाम पर इनको केवल कागज-पेन दे रखा है, जिस पर आगंतुकों के नाम-पते दर्ज कर लेते हैं। स्क्रीनिंग के दौरान किसी व्यक्ति में संक्रमण का संदेह होने पर कुछ समय के लिए नजदीकी क्वारंटाइन वार्ड में ठहरा देते हैं। सूचना के बाद चिकित्सकीय टीम आकर संदिग्ध की जांच करती है।

अन्य राज्यों से होते हुए जिले में प्रवेश करने वाले नाकों पर ये कर्मवीर मुस्तैदी से डटे हुए हंै, लेकिन कोई संक्रमित व्यक्ति जिले में आया भी तो पहले इनसे ही सामना होगा और इनके पास संक्रमण को पहचानने या खुद को बचाए रखने के कोई साधन नहीं है। बॉर्डर की इन चेक पोस्ट्स पर आयुर्वेद विभाग के चिकित्सक (वैद्य) एवं अन्य कार्मिकों को तैनात कर रखा है।

संक्रमण के सामने छाती तान खड़े हैं

लॉक डाउन के बाद प्रदेश में लोगों का रैला सा उमड़ पड़ा। अन्य राज्यों में रहने वाले असंगठित क्षेत्रों के कामगार व मजदूर एकदम से गांव लौटने लगे। इनमें से अधिकतर लोग उन राज्यों से आ रहे थे, जहां संक्रमण का खतरा ज्यादा था। ऐसे में जिले में प्रवेश से पहले ही इनकी स्क्रीनिंग के प्रबंध किए गए। इन जगहों पर स्थापित चेकपोस्ट पर जो कार्मिक तैनात हैं वे सीधे तौर पर संक्रमण के सामने छाती तान खड़े हैं।

खुद ला रहे मास्क व सेनेटाइजर

बॉर्डर चेक पोस्ट पर तैनात कार्मिक बताते हैं कि सेनेटाइजर मास्क व दस्ताने तक नहीं है। कुछ भामाशाहों से मिले या स्वस्तर पर लाए गए मास्क व सेनेटाइजर का उपयोग रहे हैं। ड्यूटी के दौरान बचाव का प्रयास करते हुए वे अपने स्तर पर ही इस तरह की सामग्री ला रहे हैं। दस्तानों के अभाव में हर समय मुश्किल आती है, लेकिन कोई चारा नहीं है। संक्रमण से बचाव को लेकर जो उपयोगी संसाधन इनक पास होने चाहिए वे भी अनुपलब्ध है।

मलाल है कि भेद रख रही सरकार

आयुर्वेद विभाग के कार्मिकों को इस बात का मलाल है कि सरकार उनकी उपेक्षा कर रही है। एक जैसे काम में ड्यूटी देने के बावजूद भेद किया जा रहा है। कार्मिकों ने बताया कि आयुर्वेद विभाग के चिकित्सक एवं अन्य वर्ग के कार्मिक कोविड 19 में ड्यूटी पर तैनात हैं, लेकिन चिकित्सा विभाग की तरह इनको प्रोत्साहन राशि तक नहीं दी गई। यहां तक की स्वास्थ्य बीमा का परिलाभ तक नहीं दिया गया। वेतन स्थगन आदेश जारी कर दिए सो अलग।

चिंता जाहिर कर चुका है संगठन

आयुर्वेद मेडिकल एसोसिएशन इस पर चिंता व्यक्त कर चुकी है। पदाधिकारियों ने इससे मुख्यमंत्री को भी अवगत कराया है। इसमें बताया कि ड्यूटी कर रहे कार्मिकों को मास्क, सेनेटाइजर, दस्ताने, पीपीइ किट, वाहन समेत अन्य उपयोगी संसाधन नहीं मिल रहे हैं। स्वास्थ्य बीमा परिलाभ, प्रोत्साहन राशि नहीं दी जा रही। स्वास्थ्य विभाग की तरह ये सुविधाएं देने, वेतन स्थगन निरस्त करने एवं फील्ड डयूटी में कार्यरत ब्लॉक लेवल अधिकारियों से नियमित मांगी जाने वाली सूचनाओं को स्थगित करवाने की आवश्यकता जताई है।

पहला सामना यहीं होगा...

कोई संक्रमित व्यक्ति आएगा तो पहला सामना इन चेक पोस्ट पर ही होगा। ऐसे में हर समय चिंता रहती है, लेकिन आयुर्वेद विभाग के चिकित्सक व कार्मिकों के पास मास्क, सेनेटाइजर व दस्ताने तक नहीं है। पहले मोर्चे पर डयूटी दे रहे हैं, लेकिन भेदभाव बरता जा रहा है।

- डॉ. गजेंद्रसिंह चारण, प्रदेशाध्यक्ष, आयुर्वेद मेडिकल एसोसिएशन

Jitesh kumar Rawal
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