करौली हादसे के बाद जागी सरकार, लीपापोती में जुटे जिम्मेदार

जिले के नागौर व डीडवाना जिला परिवहन कार्यालय क्षेत्र में 862 बाल वाहिनी पंजीकृत, करौली हादसे के बाद राज्य सरकार के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई, 360 बाल वाहिनियों की जांच कर 136 के बनाए चालान

By: shyam choudhary

Published: 03 Mar 2019, 12:53 PM IST

नागौर. जिले सहित प्रदेश भर में जब भी बाल वाहिनियों से हादसे होते हैं, जिम्मेदार अपनी ड्यूटी निभाने के लिए कार्रवाई का डंडा चलाकर लोगों का गुस्सा शांत करने का प्रयास करते हैं। गत माह करौली में कंडम बाल वाहिनी से गिरकर बच्चे की मौत होने के बाद सरकार के निर्देश पर सभी जिलों में कार्रवाई तेज हो गई। शिक्षा विभाग ने भी निजी स्कूल संचालकों के साथ अपने अधिकारियों को बाल वाहिनी के नियमों की पालना सुनिश्चित करने के दिशा-निर्देश जारी कर दिए। यहां तक कि नियम क्या-क्या हैं, यह तक बता दिया, ताकि किसी को कोई भ्रम नहीं रहे। परिवहन विभाग के अधिकारियों ने भी औपचारिकता पूरी करने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी, लेकिन स्थिति में सुधार होता नजर नहीं आ रहा है।

यह सर्व विदित है कि ज्यादातर स्कूल संचालक बच्चों का परिवहन करने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन बाल वाहिनी के रूप में नहीं करवाते, यदि कोई करवा भी ले तो उसका फिटनेस नहीं करवाते, क्योंकि वाहन का बाल वाहिनी के रूप में पंजीकरण करवाने के बाद हर साल फिटनेस करवाना भी अनिवार्य है, इस प्रक्रिया में मोटी रकम सरकार के खाते में जमा करवानी पड़ती है, ऐसे में स्कूल संचालक इस प्रक्रिया से गुजरना पसंद नहीं करते। अधिकारी भी कार्रवाई करने में संकोच करते हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करौली में जहां हादसे के मात्र पांच दिन में 300 से बाल वाहिनी के रजिस्ट्रेशन निरस्त किए गए, वहीं नागौर में एक भी बाल वाहिनी का रजिस्ट्रेशन निरस्त नहीं किया गया है।

जांच और चालान से लीपापोती
परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार नागौर जिला परिवहन कार्यालय क्षेत्र में 510 तथा डीडवाना परिवहन कार्यालय में 352 बाल वाहिनी पंजीकृत हैं। गत दिनों जयपुर मुख्यालय से मिले निर्देशों के बाद विभागीय अधिकारियों ने बाल वाहिनियों की जांच की कार्रवाई शुरू की। नागौर कार्यालय के अधिकारियों ने कुल 240 वाहनों की जांच कर 86 के चालान बनाकर करीब एक लाख 34 हजार रुपए का जुर्माना वसूली, जबकि 6 वाहनों को जब्त किया। साथ ही निजी स्कूल संचालकों को मार्च तक बाल वाहिनियों की कमियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ डीडवाना कार्यालय के अधिकारियों ने करीब 120 वाहनों की जांच कर करीब 50 के चालान काटे।

इन नियमों की पालना के दिए थे निर्देश
शिक्षा विभाग के प्रारम्भिक शिक्षा निदेशक कार्यालय के उपनिदेशक द्वारा गत 23 फरवरी को जारी निर्देशों के अनुसार बाल वाहिनियों एवं स्कूली बच्चों का परिवहन करने वाले वाहनों के बाहर की ओर दोनों तरफ विद्यालय का नाम, बस चालक का नाम, केयर टेकर का नाम एवं मोबाइल नम्बर तथा बस के अंदर चाइल्ड हैल्प लाइन नम्बर 1098 अनिवार्य रूप से लिखवाने के आदेश दिए गए। साथ ही बाल वाहिनी के चालक व कंडेक्टर के पास ड्राइविंग लाइसेंस व बाल वाहिनी में जीपीएस एवं स्पीड गवर्नर अनिवार्य रूप से लगवाने की सुनिश्चितता करने के निर्देश दिए थे।

निर्देश दिए, लेकिन अधिकारियों के पास नहीं आंकड़े
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रत्येक निजी विद्यालय के प्रबंधन को बाल वाहिनियों के फिटनेस सर्टिफिकेट को अपडेट कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन एक सप्ताह बीतने के बावजूद परिवहन विभाग के पास फिटनेस करवाने वाले वाहनों के आंकड़े नहीं हैं। शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने क्षेत्र में संचालित निजी स्कूलों से इस आशय का प्रमाण पत्र लें, जिसमें विभाग द्वारा जारी सभी नियमों (कुल 16 निर्देश) की पालना की जा रही है।

जांच अभियान चलाया
नागौर जिला परिवहन कार्यालय क्षेत्र में बाल वाहिनियों की जांच को लेकर हमने अभियान चलाकर कुल 510 वाहनों की जांच की, जिसमें 86 बाल वाहिनियों के चालान काटकर जुर्माना लगाया। हमारा जांच अभियान लगातार जारी रहेगा। इसके साथ सभी स्कूल संचालकों को मार्च माह का समय दिया गया है, ताकि वे अपने वाहनों का फिटनेस करवा लें। अन्यथा सख्त कार्रवाई होगी।
- अनूप चौधरी, निरीक्षक, परिवहन विभाग, नागौर

shyam choudhary Reporting
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