किसानों के प्रति संवेदनशील बनें सरकार

विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पर बोले खींवसर विधायक

नागौर. खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल ने शुक्रवार को विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए किसानों की ज्वलंत समस्या की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आशंका व्यक्त कि यह समस्या भविष्य में और भी विकराल रूप धारण करेगी। देखा जाए तो इस मामले ने हमारे सरकारी सिस्टम और इसकी कार्य प्रणाली की पोल खोलकर रख दी हैं।
विधायक बेनीवाल ने कहा कि नागौर के बालिया गांव से एक व्यक्ति ने उच्च न्यायालय में पिटीशन दायर कर बताया कि नाडी में सरपंच कोई सरकारी भवन बना रहे हैं। इस पर उच्च न्यायालय चार व्यक्तियों की कमेटी बनाकर 2 अगस्त, 2004 को अब्दुल रहमान बनाम सरकार में राजजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम 1956 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए यह जजमेंट देते हैं कि किसी भी नाडी भूमि का उपयोग किसी भी प्रकार के निर्माण के लिए नहीं किया जा सकता है। इसके बाद एक कमेटी बनती है और पूरे राजस्थान में चाहे कैचमेंट एरिया हो, चाहे अंगोर हो, चाहे पाइतन हो या नाडी हो, इसमें 1947 की स्थिति वापस लागू करें इस तरह का उच्च न्यायालय ने आदेश दिया। लेकिन, हमारा सरकारी सिस्टम इसकी व्याख्या ढंग से नहीं कर पाया। उसके बाद किसानों की जो जमीनें थी, जो भूमिहीन किसान थे, उन्हें सरकार ने 1947 के बाद अलॉट की, उन सारी जमीनों के रैफरेंस बनाए गए। नागौर में ही 2780 मामले ऐसे हैं जिनमें से 2723 प्रकरण जिला प्रशासन ने राजस्व मण्डल को भेजे। इनमें से राजस्व मण्डल, अजमेर ने वर्षभर पहले तक 803 में निर्णय देते हुए 27 प्रकरणों की दुबारा सुनवाई करने तथा 776 प्रकरणों में खातेदारी की जमीन को मूल किस्म में संधारित करने के आदेश दिए। विधायक ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले पर संज्ञान लें। एक तरफ भू-माफिया पूरे सरकारी सिस्टम को धता बताते हुए पूरे शहर में जैसे नागौर शहर में पूरी अंगोर और नाडी की जमीनों पर कब्जे किए बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसानों को बेघर कर जमीन वापस सरकारी सिस्टम में दर्ज कर ली। सरकार इस मामले में चाहे रिव्यू पिटीशन लगाए या चाहे सुप्रीम कोर्ट जाए अथवा सदन में ऐसा कोई संकल्प पत्र लेकर आए, जिससे किसानों को यह लगे कि सरकार उनके प्रति संवेदनशील है। राजस्व मंत्री से भी अपील की कि किसानों के हित में इस मुद्दे पर हम सब मिलकर प्रयत्न करे तो समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति में प्रशासन और शासन के प्रति नकारात्मक भाव पैदा नहीं होगा।

घातक है रोडवेज का निजीकरण
नागौर. खींवसर विधायक ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के वार्षिक प्रतिवेदन की चर्चा में भाग लिया। कहा कि राजस्थान रोडवेज को करोड़ों लोगों के दिलों की धड़कन है, लेकिन अब यह धड़कन धीमी पड़ रही है। रोडवेज निजी क्षेत्र के मुकाबले में बहुत कमजोर पड़ती है। यह निजीकरण और घातक है, जिसमें सरकारी सेवा के मुकाबले निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि परिवहन क्षेत्र में निजी लोग शक्तिशाली होते जा रहे हैं और रोजवेज की बसे और रूट्स घटाए जा रहे हंै। भ्रष्टाचार के कारण रोडवेज का घाटा निरन्तर बढ़ रहा है। जनता के लिए अत्यन्त जरूरी यह सेवा तेजी से पतन की ओर अग्रसर है। यात्री सुविधाओं, मूलभूत आवश्यकताओं एवं अन्य विकास कार्यों के लिए रोडवेज को आंवटित किया गया बजट समय पर सदुपयोग नहीं होने के कारण लेप्स हो जाता है, इसके लिए अधिकारियों की ढिलाई को जिम्मेदार बताया। विधायक ने कहा कि रोडवेज के लिए पीपीपी मॉडल पर विचार करना घातक होगा। पीपीपी मॉडल निजीकरण की पहली सीढ़ी है। जिलों, आगारों व रूट्स का औचक निरीक्षण करने पर रोड़वेज की स्थिति निश्चित रूप से सुधर सकती है। रोडवेज में भी पूर्व कर्मचारियों को सहकारिता के माध्यम से पुन: जोड़ते हुए उन सम्पतियों का लाभप्रद रूप से उपयोग किया जा सकता है जिन्हे संभाल में रोडवेज असमर्थ हो।

Jitesh kumar Rawal
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