सुख-दुख का क्रम जारी रहता है

सुख-दुख का क्रम जारी रहता है
Nagaur Children started sacrament camps under the ongoing program of Jain society

Sharad Shukla | Updated: 23 Sep 2019, 07:36:26 PM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

Nagaur patrika latest news.जैन संत ने समझाई संसारिक सुख-दुख की परिभाषाNagaur patrika latest news

नागौर. जैन संत पाŸवचंद्र महाराज ने कहा कि संसार सुख-दुख का क्रम जारी रहता है। सुख और दुख दिन-रात के समान आते और जाते रहते हैं।वह रविवार को जयमल जैन पौषधशाला में जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे।

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उन्होंने कहा कि संसार में कोई भी जीव एकांत सुखी नहीं बन सकता है। हर जीव को अपने पूर्व उपार्जित कर्मों के फल अनुसार सुख और दुख भोगने के लिए बाध्य होना पड़ता है। एक क्षण का दुख वर्षो के सुख को भुला देता है। सुख में समय जल्दी बीतता है, जबकि दुख में हर क्षण लंबा लगता है। हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखना ही सच्ची साधना है । लाभ- अलाभ, सुख-दुख, जीवन-मृत्यु, निंदा-प्रसंसा, मान-अपमान, इन पांच द्वंद में समत्व का गुण होना जरूरी है। जीवन में चाहे कैसे भी उतार-चढ़ाव आए तनाव की स्थिति में ना जाते हुए उसे झेलने की क्षमता होनी चाहिए।

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विकटग्रस्त अवस्था में तनावग्रस्त होना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। थोड़ी सी हानि होने पर भी व्यक्ति तनावग्रस्त बनकर आत्महत्या तक का भी कदम उठा लेता है जो अनुचित है। हर भाव में रमन करने वाला व्यक्ति समस्त विवादों का हल निकालने में सक्षम हो जाता है। पर स्थिति को बदलना इतना आसान नहीं होता है, परंतु मनुष्य तिथि को बदलना स्वयं के हाथ में रहता है। महापुरुष वही कहलाते हैं जो जीवन में आने वाली हर परिस्थिति का डट कर सामना करते हुए प्रगति की ओर बढ़ते हैं। दुख के समय दूसरों को दोष न देते हुए स्वयं के कर्मों को दोष देना चाहिए।

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