नागौर में बागवानी का क्रेज : किसान जाग गए, अब आप जागो सरकार

राष्ट्रीय बागवानी मिशन में बगीचे लगाने के लिए जिले में हजारों किसान कतार में, पहले सरकार को करना पड़ता था किसानों को जागरूक, अब लक्ष्यों कई गुना अधिक कर रहे आवेदन, जिले में 5 हजार से ज्यादा किसानों को है स्वीकृति का इंतजार, ताकि मिल सके अनुदान
- नींबू, बेर, बेल पत्र, पपीता, आंवला व खजूर के बगीचे लगाने पर सरकार देती है अनुदान

By: shyam choudhary

Published: 12 Jul 2021, 10:00 AM IST

नागौर. किसानाों को परम्परागत खेती की बजाए आधुनिक खेती व बागवानी के लिए प्रेरित करने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न अनुदानित योजनाओं के लक्ष्य अब कम पडऩे लगे हैं। बागवानी फसलों को लेकर नागौर जिले के किसानों में आई जागरुकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) के तहत अलग-अलग कम्पोनेंट के लिए किए गए आवेदनों में आज जिले में साढ़े पांच हजार से अधिक आवेदन लम्बित चल रहे हैं। यानी जिले में साढ़े 5 हजार किसान बागवानी फसलों के बगीचे लगाने के लिए कतार में खड़े हैं, लेकिन उद्यानिकी विभाग के लक्ष्य सीमित होने के कारण जिले में आवेदनों की पेंडेंसी बढ़ रही है।
गौरतलब है कि कुछ वर्ष पहले सरकार को नींबू, बेर, बेलपत्र, पपीता, आंवला, खजूर सहित अन्य बागवानी फसलों के साथ वर्मी कम्पोस्ट, मल्च, प्याज भंडारण केन्द्र, शेडेड हाउस, ग्रीन हाउस आदि के लिए प्रचार-प्रसार करना पड़ रहा था और किसानों को आधुनिक खेती के फायदे बताने पड़ते थे, लेकिन पिछले दस सालों में जिले के किसानों में जिस प्रकार की जागरुकता आई है, उसी के परिणामस्वरूप उद्यानिकी विभाग के पास आवेदनों का ढेर लग गया है और किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए दो से तीन वर्ष तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐेसे में किसानों का कहना है कि सरकार को अब जिले के लक्ष्य बढ़ाने चाहिए, ताकि इंतजार कर रहे आवेदकों को समय पर लाभ मिल सके।

प्याज भंडारण के 4249 आवेदन लम्बित
यूं तो जिले में एनएचएम के तहत हर कम्पोनेंट के लिए आवेदनों की पेंडेंसी है, लेकिन प्याज भंडारण के लिए जिस प्रकार पिछले कुछ वर्षों में आवेदन किए गए हैं, वह चौंकाने वाले भी हैं। वर्तमान में जिले में साढ़े पांच हजार आवेदन विभिन्न कम्पोनेंट के लिए लम्बित हैं, इसमें 4249 अकेले प्याज भंडारण के हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्याज के दामों में होने वाली अप्रत्याशित वृद्धि के चलते हर कोई सस्ते प्याज खरीदकर भंडारण करना चाहता है। इसी प्रकार किसानों को भी फसल के सही दाम नहीं मिलते, इसलिए वे सही समय के लिए भंडारण करना चाहते हैं।

अनार के बगीचे पर अनुदान देने की मांग
बागवानी में सरकार द्वारा फिलहाल नींबू, बेर, बेलपत्र, पपीता, आंवला, खजूर का बगीचा लगाने पर ही अनुदान दिया जाता है, जबकि अनार के बगीचे के लिए नागौर की जलवायु व पानी काफी उपयुक्त है, इसके चलते पिछले कुछ वर्षों में नागौर में अनार के काफी बगीचे लगे हैं, लेकिन सरकार नागौर जिले में अनार के बगीचे पर अनुदान नहीं दे रही है। प्रगतिशील किसानों का कहना है कि यदि सरकार अनार पर अनुदान देना शुरू कर दे तो अनार का रकबा और अधिक बढ़ सकता है।

आवेदनों की तुलना में लक्ष्य कम
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत जितने लक्ष्य मिलते हैं, उनसेेे पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किसानों को लाभान्वित किया जाता है। जिले में प्याज भंडारण सहित सामुदायिक जल स्रोत बनाने, ग्रीन हाउस व वर्मी कम्पोस्ट के लिए भी काफी आवेदन मिल रहे हैं, लेकिन लक्ष्य कम होने से सब आवेदकों को लाभान्वित नहीं कर पाते हैं।
- अर्जुनराम मुण्डेल, कृषि अधिकारी, उद्यानिकी विभाग, नागौर

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