scriptIdentity of Shaheed Sugan Singh Circle lost in overbridge construction | ओवरब्रिज निर्माण में खोई शहीद सुगन सिंह सर्किल की पहचान | Patrika News

ओवरब्रिज निर्माण में खोई शहीद सुगन सिंह सर्किल की पहचान

ग्राउण्ड रिपोर्ट

रवीन्द्र मिश्रा

नागौर . देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले महावीर चक्र विजेता शहीद सुगन सिंह की बहादुरी के किस्से सुन नागौरवासियों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। पाकिस्तान से हुई 1971 की लड़ाई में शहीद हुए सुगन सिंह के बलिदान से युवा शक्ति को प्रेरित करने के लिए उनकी स्मृति में शहर के बीकानेर रोड रेलवे क्राङ्क्षसग के पास सुगन सिंह सर्किल बनाया गया। पिछले चार साल से कच्छुआ गति से चल रहे ओवरब्रिज निर्माण कार्य में सुगनसिंह सर्किल की पहनान खो गई है।

नागौर

Updated: December 01, 2021 07:13:24 pm

- चार साल से आरओबी का निर्माण अटका होने से शहर की यातायात व्यवस्था बिगड़ी
- लोहे के जाल लगे होने से जान का खतरा

- हाइकोर्ट ने समयावधि तय की उसके बाद भी जिम्मेदार बने लापरवाह
ओवरब्रिज निर्माण में खोई शहीद सुगन सिंह सर्किल की पहचान
नागौर- बीकानेर रोड पर ओवरब्रिज के जाल के कारण लगा जाम।
आरओबी पर एक नजर

- बीकानेर रेलवे क्रासिंग सी. 61

- लागत - करीब 25 करोड़
- लम्बाई- 1061 मीटर

- शिलान्यास- मई, 2017
- काम शुरू किया - सितम्बर 2017

ओवरब्रिज का जो काम दो साल में पूरा होना था, वह चार साल से रेंगकर चल रहा है। जिम्मेदार विभाग व ठेकेदार की लापरवाही से यहां यातायात दबाव व निर्माण के लिए लगाए अडख़ंजों के कारण कभी हादसा भी हो सकता है। ठेकेदार के काम बीच में छोडकऱ जाने से शहीद सुगनसिंह की प्रतिमा पार्किंग स्थल में तब्दील हो गई है। यातायात दबाव के कारण दिन में तीन-चार बार वाहन चालकों के बीच झपड़ हो जाती है। दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो रहा है सो अलग। लेकिन जिम्मेदारों व शहर के जनप्रतिनिधियों का शहवासियों की इस समस्या के मामले में ना- गौर है।
548 दिन में पूरा करना था काम
25.74 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाले टू लेन के 1063 मीटर लम्बे रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) का काम फरीदाबाद की फर्म गुरुनानक इंजिनियरिंग सर्विस को 7 जून 2017 को सौंपा गया। जिसे 548 दिन यानी 14 दिसम्बर 2018 को पूरा करना था। लेकिन अब तक 60 फीसदी काम ही पूरा हुआ है।
एक सर्विस लेन बंद, दूसरी पर यातायात दवाब
ओवरब्रिज निर्माण की डिजाइन के अनुसार ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाने के लिए दोनों तरफ रैलिंग बनाई जानी है। इसके लिए दोनों तरफ की सर्विस लाइन पर काफी संख्या में लोहे के पाइप का जाल लगाया गया है। जिस पर प्लेट लगाकर आरसीसी डाली जानी थी। लेकिन 23 दिसम्बर 2020 को ठेकेदार ने जाल बांधकर छोड़ दिया। ना तो रैलिंग डली और ना जाल हटे। इससे दुकानदारों का कारोबार पिछले एक साल से प्रभावित है। स्थिति यह है कि रामद्वारा साइड की सर्विस लेन बंद होने से पूरे ट्रेफिक का दबाव एक ही सर्विस लेने पर आ गया है। इससे दिन में कई बार जाम लग जाता है। इनमें बड़े वाहन भी अटक जाते हैं। अपने वाहन को पहले निकालने के चक्कर में कई बार चालकों में तकरार हो जाती है।
कहीं हो ना जाए हादसा

पिछले एक साल से स्थिति यह है कि निर्माण के लिए लगाए गए लोहे के अडख़ंजों और प्लेटों के कारण हर समय दुकानदारों व वाहन चालकों को हादसे का अंदेशा सताए रहता है। कहीं कोई पिलर गिर न जाए। जयपुर जैसे कई बड़े शहरों में ओवरबिज्र निर्माण कार्य कई जानें लील चुके हैं।
इधर, बीच चौराहे पर बिजली का खम्भा

सर्किल से नया दरवाजा जाने वाले मार्ग पर सडक़ के बीचोंबीच बिजली का खम्भा रोपा हुआ है। हालत यह है कि पास की दुकान पर ग्राहकों के वाहन खड़े रहने और कोई बड़ा वाहन आने से दिन में कई बार जाम लगता है। लेकिन न तो बिजली विभाग इस समस्या पर ध्यान दे रहा है और न ही प्रशासन। जनता को इससे होने वाली परेशानी को लेकर सभी ने अपनी आंखें मीच ली।
हाईकोर्ट में याचिका
नागौर शहर के बीकानेर रेलवे फाटक सी.61 पर निर्माणाधीन आरओबी का काम धीमी गति से चलने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की हुई है। ठेकेदार को आरओबी का काम 14 दिसम्बर 2018 में पूरा करना था। लेकिन काम पूरा नहीं होने से बढ़ती परेशानी को देख नागौर व्यापार मंडल की ओर से रूपसिंह पंवार व अजय सांखला ने जोधपुर हाईकोर्ट में नवम्बर 2019 में रिट याचिका भी लगाई हुई है। लेकिन कोर्ट की फटकार के बाद भी ठेकेदार हलफनामे देकर अवधि बढ़वा रहा है।
क्या होगा कलक्टर के आदेश का?

गत 22 नवम्बर को जिला कलक्टर डॉ.जितेन्द्र कुमार सोनी ने निर्माणाधीन ओवरब्रिज कार्य का औचक निरीक्षण किया। संबंधित एजेंसी के साइट मैनेजर को बुलाकर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे। ठेकेदार एजेन्सी ने चार महीने में काम पूरा करने की हामी भरी है। लेकिन मौके पर ना लेबर है और ना ही निर्माण सामग्री नजर आ रही है। ऐसे में वर्षों का काम चार माह में कैसे पूरा होगा, इस पर भी संदेह के बादल छाए हुए हैं।
व्यापारियों की जुबानी
- गत 23 दिसम्बर 2020 को पाइपों का जाल खड़ा किया था। उसके बाद ना तो ब्रिज का काम शुरू हुआ और ना ही रास्ता खोला गया। रामद्वारा की तरफ की सर्विस लेन पूरी तरह बंद होने से ग्राहकी ठप हो गई है। दस फीसदी धंधा होने से दुकान का किराया भी नहींं निकल रहा है।
पुखराज भादू, मोबाइल व्यवसायी, सुगनसिंह सर्किल
- काफी समय हो गया आरओबी का काम बंद हुए। आमजन के साथ व्यापार भी प्रभावित है। दो साल से तो स्थिति और खराब हो गई है। ब्रिज के नीचे मनमर्जी से पार्किंग स्थल बनाने से यातायात जाम हो जाता है।
रामस्वरूप पंवार, किराणा व्यवसायी
- आरओबी का काम दो साल से बंद पड़ा है। कभी ठेकेदार के आदमी आकर सूरत दिखा जाते हैं। छह महीने से लोहे के एंगल खड़े करने से जाम लग जाता है। हर समय दुर्घटना की आशंका सताती रहती है। वाहनों के धुएं से प्रदूषण की समस्या रहती है। यहां एक ट्रेफिक पुलिसकर्मी लगाना चाहिए, ताकि ट्रेफिक व्यवस्थित कर सके।
रामचन्द्र जाखड़, व्यापारी।
- हमारा तो भोजन का व्यवसाय है। जब से ब्रिज का काम शुरू हुआ धंधा 25 प्रतिशत रह गया। रास्ता बंद होने से न टैक्सी आती है और न ही बसें। पहले पांच बसें रात को यहां आकर ठहरती थी। यात्री भोजन व चाय-पानी करते थे। कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है। मंदी के कारण कर्मचारी भी कम हो गए हैं।
वेदप्रकाश प्रजापत,
भोजनालय संचालक

इनका कहना है
दोनों ही ओवर ब्रिज का काम जल्द से जल्द पूरा कराने की पूरी कोशिश की जा रही है। दो ठेकेदारों के विवाद के कारण जनता को परेशान होना पड़ा। मार्च तक निर्माण कार्य पूरा करवाने का हमारा पूरा प्रयास रहेगा।
श्यामसुन्दर व्यास, सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग (एनएच), नागौर।

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