Video : आईजी नार्जरी का पत्रिका के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू : खोले कई राज

Shyam Lal Choudhary | Updated: 14 Jul 2019, 09:47:36 AM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

अजमेर रेंज के आईजी संजीव नार्जरी ने कहा - बंदरों से परेशान लोग पुलिस को फोन करते हैं, मतलब साफ है- खाकी पर आमजन का विश्वास मजबूत है

संदीप पांडेय
नागौर. अनगिनत मुश्किलों के बीच भी ‘खाकी’ विलेन नहीं हीरो है। मीडिया हो या फिल्में, पुलिस की अच्छाई को बेहतर ढंग से प्रस्तुत करते हैं। गिने-चुने मामलों को छोड़ दें तो पुलिस भरोसे का दूसरा नाम है। बंदरों से परेशान होने पर भी लोग पुलिस से सहयोग की उम्मीद करते हैं। मतलब साफ है, खाकी पर आमजन का विश्वास मजबूत है। अजमेर रेंज के आईजी संजीव नार्जरी ने पत्रिका से विशेष बातचीत में ये बात कही।

उन्होंने पुलिसकर्मी/अफसरों में बढ़ते तनाव को कबूलते हुए कहा कि, आज के दौर में तनाव कहां नहीं है? कोई एक काम तो बताएं जहां ‘टारगेट’ नहीं हो। यह सही है कि पुलिस वालों की ड्यूटी ज्यादा कड़ी है। इसकी वजह यह है कि पुलिस के बिना सबकुछ व्यवस्थित चलना संभव नहीं है। यह पूछने पर कि चलो तनाव हर काम में है तो पुलिस वालों का तनाव अधिक क्यों? इस पर नार्जरी ने कहा कि सख्त ड्यूटी के बाद परिवार वालों से दूर रहने अथवा उन्हें समय कम देने का कारण अहम माना जा सकता है। बच्चों/घर वालों के साथ रहने से ‘स्ट्रेस’ घटता है। उस पर पुलिस की नौकरी में सुकून की तलाश बेमानी है। काम किसी थाने का हो अथवा चौकी का। फरियादी से लेकर अपराधी तक को ‘अटेंड’ करना कम बड़ी बात नहीं है। रोजनामचा/रिपोर्ट दर्ज करने से अनुसंधान/गश्त लगाने तक कामों की एक लम्बी ‘फेहरिस्त’ होती है। चालान पेश करना हो अथवा अपराधी को पकडऩे के लिए दबिश देनी हो, किसी का मेडिकल कराना हो या फिर कोई अतिक्रमण हटाना हो, ऐसे अनगिनत काम करने वाला पुलिसकर्मी/अफसर तो ज्यादा तनाव में ही रहेगा। तनाव कम करने के सवाल पर आईजी ने कहा कि कोशिश चल रही है। मैं हर मीटिंग/दौरे पर अपने स्टाफ से यही कहता हूं कि काम ईमानदारी से पूरा करें। काम को बोझ नहीं समझें। कोशिश यही हो कि तय समय पर काम हो। संवाद जैसे कार्यक्रम के माध्यम से स्टाफ से परिवार को अधिक समय देने का मशविरा भी देता रहता हूं। बच्चों का अकेलापन दूर करने की महत्ती जिम्मेदारी पूरी करना यूं तो टेढ़ा काम है पर अब पुलिसकर्मी इसे पूरा कर रहे हैं। कुछ दिन पूर्व खुनखुना थाना प्रभारी के खुद को फील्ड की ड्यूटी से हटाने के निवेदन पर आईजी ने कहा कि अलग-अलग कारण कई बार अलग-अलग अर्थ दे जाते हैं। ऐसे मामले कम ही हैं।

कई सवाल जो जवाब चाहते थे
प्रमोशन में वक्त अधिक लग रहा है। स्टाफ कम है, अपराध भी बढ़ रहे हैं। पुलिस के कामकाज के तौर-तरीकों से भी लोग खुश नहीं हैं। किसी नेता की सभा हो अथवा कोई राजनीतिक/सामाजिक/सांस्कृतिक कार्यक्रम, पुलिस वाले वहां भी ड्यूटी बजाते दिखते हैं यानी अपराधियों को पकडऩे यानी कानून/व्यवस्था बनाए रखने का काम करने वालों की संख्या कम हैं। इनमें से भी काफी कोर्ट-कचहरी की तारीख भुगतते दिखते हैं।

प्रमोशन लेट फिर भी हर पुलिसकर्मी आलराण्डर
आईजी नार्जरी ने हर सवाल का जवाब दिया, किसी को टाला नहीं। आई जी ने कहा कि प्रमोशन में कई बार हमारे पास समय की कमी से देर हो जाती है तो कई बार कानूनी कारण से ‘डिले’ हो जाते हैं। स्टाफ कम है पर अब पहले जैसा माहौल नहीं है। कंट्रोल रूम में फोन अटेंड करने वाला सिपाही हो अथवा अन्य कोई पुलिसकर्मी, हर कोई ‘आल-राउण्डर’ हो गया है। वो सारे काम कर रहा है, इसलिए ये कमी नहीं खलती। पुलिस के कामकाज को लेकर अधिकांश लोग खुश हैं, नाराज वही रहते हैं जिनके गैरकानूनी काम अथवा गुण्डागर्दी को पुलिस चलने नहीं देती। यह सही है कि पुलिस की ड्यूटी राजनीतिक सभा हो अथवा कोई अन्य कार्यक्रम, काफी लगती है पर पुलिस का काम ही यह है कि कोई अप्रिय/अनहोनी घटना को नहीं होने देना।

कब बढ़ेगा वर्दी भत्ता और पुरस्कार राशि
आईजी नार्जरी से जब पूछा गया कि काफी समय से पुलिसकर्मियों का वर्दी भत्ता नहीं बढ़ा न ही उनको दिए जाने वाले पुरस्कार की राशि। इस पर आईजी ने कहा कि इस बारे में जानकारी करता हूं। यह पूरे महकमे का मसला है, जानकारी कर उच्च अधिकारियों तक यह बात पहुंचाएंगे।

 

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