Video : मरीजों से ये कैसा मजाक? दवा आज लेनी है और सोनोग्राफी होगी एक महीने बाद

जिला मुख्यालय के अस्पताल में नि:शुल्क सोनोग्राफी के नाम पर मरीजों से हो रहा मजाक
- डॉक्टर के लिखने के बाद अस्पताल के सोनोग्राफर मरीज को दे रहे एक माह आगे की तारीख
- मजबूरी में मरीजों को बाहर करवानी पड़ रही सोनोग्राफी

By: shyam choudhary

Updated: 16 Oct 2020, 07:58 PM IST

नागौर. जिला मुख्यालय के जेएलएन राजकीय अस्पताल में सोनोग्राफी कराने वाले मरीजों के साथ ‘कू्रर मजाक’ हो रहा है। डॉक्टर मरीजों को सोनोग्राफी की सलाह दे रहे हैं, लेकिन जब वे डॉक्टर की लिखी पर्ची लेकर सोनोग्राफी कक्ष में जाते हैं तो उन्हें एक महीने आगे की तारीख देकर रवाना कर दिया जाता है। आप इसे मजाक नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे? क्योंकि बीमारी में जहां एक-एक क्षण का महत्व होता है, वहां मरीजों को जांच के लिए एक महीने आगे की तारीख दी जा रही है।
कहने को राज्य सरकार ने भले ही सरकारी अस्पतालों में दवा के साथ जांच की सुविधा फ्री कर दी है, लेकिन इस प्रकार की व्यवस्था सारे किए कराए पर पानी फेर रही है। सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण जांच के लिए मरीजों को जब एक महीने आगे का समय दिया जाता है तो ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीज तो इस माजरे को समझ ही नहीं पाते हैं। फिर जब उन्हें कोई जागरूक नागरिक ढंग से बताता है तो वह निराश होकर निजी सोनोग्राफी सेंटर पर जाता है और सोनोग्राफी कराता है। इतने में अस्पताल की छुट्टी हो जाती है, इसलिए डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाने के लिए घर जाना पड़ता है, जहां उसे फीस के साथ दवाइयों के भी पैसे देने पड़ते हैं। कुल मिलाकर ऐसे मरीजों के लिए सरकार की मुफ्त दवा व मुफ्त जांच की योजना केवल दिखावा बनकर रह जाती है।

रोजाना औसतन 40 मरीजों की सोनोग्राफी, 1200 कतार में
जेएलएन अस्पताल में रोजाना औसतन 40 मरीजों की सोनोग्राफी की जा रही है, ऐसे में एक महीने में करीब 1200 लोगों की सोनोग्राफी जांच हो रही है। जबकि दूसरी तरफ मरीजों को एक महीने आगे की तारीख भी दी जा रही है, इससे यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सोनोग्राफी कराने के लिए 1200 लोग कतार में खड़े हैं, जिनमें से आधे तो पैसे देकर बाहर जांच करवा रहे हैं। चिकित्सकों का भी यही कहना है कि जिसे उपचार लेना हो, वह एक महीने इंतजार कर भी नहीं सकता।

इनकी पीड़ा सुनिए और बताइए, क्या ‘भगवान’ ऐसा करेंगे?

  1. ग्रामीण क्षेत्र से आई जिमना ने बताया कि उसकी ननद गुड्डी के प्रसव होना है। 9 महीने पूरे हो गए और पांच-छह दिन ऊपर हो गए, इसलिए डॉक्टर ने सोनोग्राफी लिखी है, जो हाथों-हाथ करवानी जरूरी है, लेकिन यहां आए तो 17 नवम्बर की तारीख दी है। जिसके एक-दो दिन में प्रसव होना है, वो एक महीने कैसे इंतजार करे।
  2. टांकला से आई विमला ने बताया कि उसे डॉक्टर ने हाथों-हाथ सोनोग्राफी कराने के लिए कहा है, लेकिन जेएलएन अस्पताल के सोनोग्राफी कक्ष में गई तो एक महीने आगे की तिथि दे दी। अब मुझे तो बाहर पैसे देकर सोनोग्राफी करवानी पड़ेगी।
  3. ब्लड प्रेशर की शिकायत होने पर जेएलएन अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने गए इकबाल ने बताया कि दवा लेने के बावजूद बीपी कम नहीं होने पर डॉक्टर ने सोनोग्राफी कराने के लिए कहा। जब वह सोनोग्राफी कराने गया तो वहां बैठे नर्सिंग कर्मचारी ने 13 नवम्बर की तारीख दे दी। कारण पूछा तो बोले कि पीएमओ से बात कर लो।

दो-तीन मशीनें लगाई जाए
जिला मुख्यालय का अस्पताल होने के बावजूद यहां एक मशीन से सोनोग्राफी की जा रही है, जिससे मरीजों को एक-एक महीने से ज्यादा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर सोनोग्राफी नहीं होने से गरीब मरीजों को समय पर सही उपचार नहीं मिल पाता है और कई बार उपचार के अभाव में मौत भी हो जाती है। सरकार को चाहिए कि यहां दो से तीन मशीन लगाकर सोनोग्राफी की जाए, ताकि मरीजों को राहत मिल सके।
- फरजाना फारुखी, मरीज

मरीज लडऩे पर उतारू हो जाते हैं
जेएलएन अस्पताल में अब तक रोजाना करीब 40 सोनोग्राफी हो रही थी। अब एक डॉक्टर सरिता की अनुमति मिली है, जिससे सोनोग्राफी जांच की संख्या में वृद्धि होने की उम्मीद है। जहां तक गुरुवार की बात है तो 15 अक्टूबर को पोस्टमार्टम करने वाला डॉक्टर छुट्टी पर होने के कारण डॉ. पुरुषोत्तम की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगाई थी, पीछे एक मरीज की सोनोग्राफी नहीं हुई तो वह मेरे पास आकर लडऩे लगा और मेरा गला पकडऩे का भी प्रयास किया। हमें तो यह भी सहन करना पड़ता है।
- डॉ. शंकरलाल, पीएमओ, जेएलएन अस्पताल, नागौर

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