इस स्कूल में लड़कियों के साथ ही लडक़े भी पहुंचे खाना बनाने सीखने...

इस स्कूल में लड़कियों के साथ ही लडक़े भी पहुंचे खाना बनाने सीखने...

Sharad Shukla | Publish: Apr, 17 2019 12:04:08 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 12:04:09 PM (IST) Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

सीबीएसई बोर्ड ने पहली से 12वीं तक की कक्षाओं के लिए जारी किए नोटिफिकेशन, स्कूलों में संगीत, नृत्य, नाटक के साथ ही पाक कला भी सिखाई जाएगी।

नागौर. बच्चे अब पढ़ाई के साथ केवल सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा ही नहीं लेंगे, बल्कि वह खाना बनाना भी सीखेंगे। पहले पाक कला के कार्यक्रम केवल बालिका वर्ग के लिए होते थे, लेकिन इस वर्ष अब इसमें बालक भी भोजन बनाने का प्रयोग करते नजर आएंगे। सीबीएसई से संबंधित स्कूलों में नए सत्र से कक्षा एक से 12वीं के छात्रों को इंटीग्रेटेड आर्ट की शिक्षा दी जाएगी। कला में चार मुख्य क्षेत्रों संगीत, नृत्य, दृश्य माध्यम और नाटक की कक्षाएं भी होंगी। सभी स्कूलों को सप्ताह में कम से कम दो कक्षाएं कला की लगानी होंगी। विभागी जानकारों का कहना है कि इसके लिए कोई कोई परीक्षा तो नहीं होगी, लेकिन प्रोजेक्ट, थ्योरी, प्रैक्टिकल के माध्यम से मूल्यांकन किया जाएगा। सीबीएसई ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। जारी किए गए नोटिफिकेशन में साफ तौर पर उल्लिखित किया गया है कि कला विषय के तहत छठी से वीं से आठवीं के विद्यार्थियों को चित्रकला, नृत्य-संगीत ही नहीं बल्कि अनिवार्य रूप से पाक कला भी सिखाएं। इससे बच्चे विभिन्न विषयों का भी सैंद्धातिक एवं प्रायोगिक ज्ञान प्राप्त करने के साथ ही पौष्टिक आहार की महत्ता को बाकायदा सहजता से समझ सकेंगे। इसके साथ बच्चे खेतों होने वाली फसलों और मसालों के बारे में प्रयोग करके उनकी भी संपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे केवल इतना ही नहीं, बल्कि बच्चे यह भी सीख सकेंगे कि कैसे बीजों में से तेल निकाला जाता है, ं कृषि के बेहतर उदाहरण कौन से हैं। राज्य में किस तरह के पारंपरिक व्यंजन पकाए और परोसे जाते हैं। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए स्कूल पाक कला की कक्षाएं भी लगा सकते हैं।
इसलिए लिया फैसला
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किताबी ज्ञान के साथ ही कृषि प्रधान देश होने की वजह से बच्चों को फसलों के साथ ही पारंपरिक खाद्य व्यंजनों के बनाने के दौरान इसकी वैज्ञानिक व व्यवहारिक जानकारियां प्राप्त कर सकें। खेतों में होने वाली उपजों के बारे में भी केवल उन्हें जानकारी ही नहीं, बल्कि यह भी मालूम होना चाहिए कि किस क्षेत्र में कौन सी उपज होती है, और इसकी क्या विशेषताएं हैं। इससे बच्चों का समग्र विकास हो सकेगा। बच्चे ग्रामीण जनजीवन से भी परिचित हो सकेंगे। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई बोर्ड ने उच्च स्तर पर सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ पाककला भी सिखाए जाने का फैसला लिया गया।
इनका कहना है...
बच्चे अब विद्यालय में सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ पाक कला में भी अपना हुनर दिखाते नजर आएंगे। उन्हें केवल फसलों की जानकारी ही नहीं, सब्जियों में मसालों के प्रयोग के साथ ही खाना बनाना भी सिखाया जाएगा।
मनीष पारीक, प्रधानाचार्य राजकीय विवेकानंद मॉडल स्कूल

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