म्हारी ओळख आ वाणी रे, पीढ्या री अमर निसाणी रे...

अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर शब्दों में पिरोया मायड़ भाषा का गुणगान
- साहित्यकारों व भाषा प्रेमियों का सम्मान

By: shyam choudhary

Published: 22 Feb 2021, 10:53 AM IST

नागौर. ‘आ भाषा मीरां बाई री, आवड़ करणी मां आई री..., आ ही रण में हुंकार करे... पाबू गोगा, तेजा इण री मरयादा खातर जिये मरे... म्हारी ओळख आ वाणी रे, पीढ्या री अमर निसाणी रे...’ शब्द पे शब्द और बात केवल अपने जन्मभूमि पर बोली जाने वाली भाषा की, संगीतमयी सुरों से पिरोई शब्दों की माला, यहां मौजूद जन के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ गई। सार्वजनिक जिला पुस्तकालय में बैठा हर श्रोता मायड़ भाषा के प्रति बही प्रेम और समर्पण की धारा में मग्न हो गया और कार्यक्रम के चरमोत्कर्ष पर यही मग्नता राजस्थानी की मान्यता को लेकर किए जा रहे संघर्ष के नाद में परिवर्तित हो गई।

मायड़ भाषा के गुणगान और इसके सांस्कृतिक वैभव से आत्मसात करा देने वाला यह कार्यक्रम आयोजित किया गया अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस के अवसर पर। मायड़ भाषा को पल्लवित और पोषित करने की भावना से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम में मुख्य आतिथ्य राजस्थानी भाषा के साहित्यकार पवन पहाडिय़ा का रहा। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सम्पतराम की अध्यक्षता में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस कार्यक्रम में कवि प्रहलादसिंह झोरड़ा ने मायड़ भाषा के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक व धार्मिक वैभव से जुड़ी रचना प्रस्तुत की।

वहीं व्याख्याता भागीरथ रतनू ने राजस्थानी भाषा की मान्यता से होने वाले लाभ के बारे में बताया और इससे युवाओं को मिलने वाले रोजगार की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। मायड़ भाषा को समर्पित इस कार्यक्रम में जन कल्याण समिति के अध्यक्ष राजकुमार व्यास, पुस्तकालय विकास समिति के रविशंकर व्यास, ब्लॉक मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी महिपाल सांदू व झुंझुनूं से आए मोट्यार परिषद के महेश सिंह व महेन्द्र पहाडिय़ा ने राजस्थानी भाषा के साहित्यिक महत्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर मायड़ भाषा के साहित्यकार व भाषा प्रेेमियों सहित पुस्तकालय के वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट अर्जुनदास को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी सुरेश सोनी ने दिया व आगन्तुकों का आभार मियालराम जाखड़ ने जताया। उद्घोषक की भूमिका राजस्थानी गीतकार सत्यपाल सांदू ने निभाई।

मायड़ भाषा के लिए जिला कलक्टर की पहल सराहनीय
अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर राजकीय सार्वजनिक जिला पुस्तकालय में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि व मारवाड़ रत्न से सम्मानित पवन पहाडिय़ा ने कहा कि यह पहला मौका है, जब नागौर में किसी जिला कलक्टर ने मायड़ भाषा के लिए सरकारी शिक्षण संस्थानों व पुस्तकालय में साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित करवाने की पहल की है। पहाडिय़ा ने कहा कि जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी स्वयं मायड़ भाषा में साहित्यिक लेखन करते हैं और भाषा के संरक्षण और संवद्र्धन को लेकर उनके द्वारा करवाए जा रहे आयोजन सराहनीय कदम है। मान्यता के लिए संघर्ष की डगर पर चल रहे राजस्थानी भाषा के हितैषियों के लिए जिला कलक्टर डॉ. सोनी का यह प्रयास अपने आप में बहुत बड़ा सहयोग है।

हमारी कोशिश, स्कूल शिक्षा में बढ़े राजस्थानी भाषा का दायरा
अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नागौर के मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सम्पतराम ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में राजस्थान की माटी के सपूत अपनी बात सरकार तक रख रहे हैं, वहीं शिक्षा विभाग के स्तर पर हम भी मायड़ भाषा के संवद्र्धन को लेकर प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिला कलक्टर के निर्देशानुसार अंतरराष्ट्रीय मातृ भाषा दिवस पर राजकीय विद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित किए। जिले में ब्लॉक मुख्यालयों सहित बडे कस्बों की राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में राजस्थानी भाषा का विषय शुरू करवाने के लिए प्रस्ताव तैयार करवाकर शिक्षा निदेशालय भिजवाए जाएंगे। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा हमारी कोशिश है कि स्कूल शिक्षा में राजस्थानी भाषा का दायरा बढ़े।

shyam choudhary Reporting
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