अंगूठा छाप को काई करस्या पहले ही एक धेला को विकास कोनी हुयो

चौसला. पंचायतीराज चुनावों के प्रथम चरण की तारीख निकट आते ही चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी है। सरपंच की कुर्सी पर बैठने की इच्छुक महिला प्रत्याशी चूल्हा चौका छोड़ दिनभर चुनावी प्रचार-प्रसार में लग गई है।

By: Sandeep Pandey

Published: 06 Jan 2020, 11:05 PM IST

चौसला. पंचायतीराज चुनावों के प्रथम चरण की तारीख निकट आते ही चुनावी सरगर्मियां तेज होने लगी है। सरपंच की कुर्सी पर बैठने की इच्छुक महिला प्रत्याशी चूल्हा चौका छोड़ दिनभर चुनावी प्रचार-प्रसार में लग गई है। वहीं महिला प्रत्याशियों के पति, सास, ससुर भी अपने समर्थकों के साथ लोगों के वोट लेने के लिए सम्पर्क करने में जुटे हैं। सर्दी के मौसम में चुनावों के कारण माहौल में गर्मी बढ़ रही है। बता दें कि चौसला पंचायत में आगामी चुनाव में सामान्य महिला के लिए सीट आरक्षित हुई है जिस कारण सभी जाती के लोग महिलाओं के नाम से किस्मत आजमा रहे है। चौसला पंचायत में चुनाव प्रथम चरण में होने के कारण प्रत्याशी 8 जनवरी को नामांकन दाखिल करेंगे। ऐसे में चौसला में मतदाता नया सरपंच कैसा क्या चाहते है, पत्रिका संवाददाता ने सोमवार को पंचायत के पांचों गांव में प्रमुख स्थानों पर युवा, बुजुर्ग लोगों की नब्ज टटलोने की कोशिश की। शुरूआत चौसला बस स्टेण्ड से की। यहां चाय की दुकान व थडिय़ों पर बैठे लोगों ने कहा कि सरपंच तो अनुभवी और पढ््यो लिख्यो ही होणो चाहिए, अंगूठा छाप को काई करस्या पहले ही एक धेला को विकास कोनी हुयो ये सुनने में आया। फिर चौसला के तेजाजी मोहल्ले में पहुंचे, यहां के लोगों में पिछले सरपंचों केलिखाफ सख्त आक्रोश दिखा। लोगों का कहना है कि पिछले 10 साल में विकास के नाम पर मोहल्ले में कुछ नहीं हुआ है वोट देकर क्या करें। गदंगी से अटी नालियां भी हमे स्वयं ही साफ करनी पड़ी है। गांव का मुखिया वह होता है जो सबकी सुने और समस्याओं का समाधान करें न की अपने चेहतों का। साढ़े दस बजे गांव लाखनपुरा पहुंचे, यहां के लोग भी पढ़े लिखे उम्मीदवार को पसंद कर रहे हैं। गांव भाटीपुरा में भी लोग बिजली, पानी, सडक़ जैसी मूलभूत सुविधाओं का ना होना बताया। भाटीपुरा व लाखनपुरा में ज्यादातर गुर्जर जाति के लोग रहते हैं, जिनका मुख्य व्यवसाय भेड़ व बकरी पालन है। वहीं गांव कुणी व बनगढ़ के लोगों की राय भी एकसी रही सडक़, बिजली, पानी और चिकित्सा। लोगों की बातो से एक बात तो साफ है कि आज का मतदाता जागरूक है और पढ़ा लिखा और अनुभवी सरपंच चाहता है, जो गांव का सर्वांगीण विकास कर सके।

आम रास्तों में जमा कीचड़

गांव के विभिन्न मोहल्लों में नालियां नहीं होने के कारण घरों से निकलने वाला गंदा पानी बीच रास्ते में भर जाता है तथा कई मोहल्लों में नालियां टूट जाने व अवरूद्ध हो जाने से सडक़ पर पानी का ताल भरा रहता है। जिससे आने-जाने वाहन चालक व राहगीर आए दिन गिर चोटिल हो रहे हैं। मार्ग में लम्बे समय से पानी जमा होने के कारण मच्छर पनप रहे हैं। लोगों का कहना है आजादी के बाद कई सरपंच बन चुके हैं, लेकिन कीचड़ जैसी समस्या का स्थाई समाधान नहीं कर सकें।
ढाणियों में नहीं पहुंचा मीठा पानी

चौसला कस्बे में बीसलपुर का मीठा पानी आए करीब 4 साल से अधिक समय गुजर चुका है, लेकिन ढाणियों के लोग आज भी मीठे पानी के लिए तरस रहे हैं। ढाणियों के लोगों ने बताया कि 90 प्रतिशत कुओं में पानी सूख चुका है, इक्का-दुक्का कुएं में पानी है वो खारा है जो पीने लायक नहीं है। मजबूरन लोगों को बाहर से महंगे दामों में टैंकर मंगवाकर प्यास बुझानी पड़ रही है। लोगों ने कहा कि जो सरपंच ढाणियों में पानी पहुंचाने का वादा करेगा उसे ही वोट देंगे।

पत्रिका सर्वे में ग्रामीणों ने इन विकास कार्यो की रखी मांग-

इनका कहना है-

आज भी गांव ढाणियों में पानी सडक़ जैसी सुविधाओं का अभाव है। ऐसे में पढ़ा लिखा और योग्य उम्मीदवार सरपंच बने तो पंचायत का अच्छा विकास होगा। हालांकि लोगों में 4-5 सालों में काफी जागरूकता आ गई है।

राजेन्द्र प्रसाद शर्मा, एडवोकेट

-बढि़या सरपंच बण तो गांव में विकास होव। सरपंच ढाणियां में पीबा को मीठों पानी व सडक़ निर्माण कराबाळो होणो चाहिए। आज चार साल सूं ज्यादा समय होग्यो मीठा पानी आए लेकिन ढाणियां में रेबाळा लोग कुओं को खारों पानी पी रहे है।

सोनाणराम यादव, 91 वर्षीय बुजुर्ग, यादवों की ढाणी

-सरकार ने शैक्षणिक योग्यता गलत हटा दी। 21वीं सदी चल रही है 18 वीं नहीं। पढ़ा लिखा सरपंच बनेगा तो गांव में विकास होगा। गांव का मुखिया वही होगा जो सबकी सुनेगा और तत्परता से समस्याओं का समाधान करवाएगा।

भरतसिंह राठौड़, युवा

Sandeep Pandey Desk
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