संसाधनों की कमी व कार्मिकों की अनदेखी ने जिले में बढ़ा दिया कुपोषण

लाडेसर अभियान में ढूंढे तो मिल गए साढ़े 3 हजार कुपोषित बच्चे, 130 अतिकुपोषित भी मिले
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिका की फौज वर्षों से बैठी थी सुस्त, कलक्टर ने जगाया तो सुधरने लगी स्थिति
- जिला मुख्यालय के जेएलएन हॉस्पिटल के एमटीसी वार्ड में भर्ती हुए बच्चे

By: shyam choudhary

Published: 09 Jun 2021, 05:01 PM IST

नागौर. जिले में 2873 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं, जहां 2628 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, 149 मिनी कार्यकर्ता, 2617 सहायिका एवं 2543 आशा सहयोगिनी कार्यरत हैं। इनकी कुल संख्या देखी जाए तो 7,937 है, इसके बावजूद जिले में पिछले कुछ वर्षों से कुपोषित बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में कार्यरत महिला कार्मिकों की मुख्य जिम्मेदारी गर्भवती व धात्री महिलाओं के साथ 0-6 वर्ष तक के बच्चों को पोषण युक्त भोजन एवं किट उपलब्ध कराना एवं क्षेत्र में कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें सुपोषण देना तथा चिकित्सा केन्द्र तक पहुंचाना है, ताकि वहां उनका उपचार किया जा सके, लेकिन धरातल पर कुपोषण की स्थिति में सुधार नहीं हो पाया है, जबकि सरकार द्वारा हर वर्ष करोड़ों रुपए का बजट खर्च किया जा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्मिकों की लापरवाही एवं अनदेखी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में 15 दिन पहले तक एक भी बच्चा एमटीसी वार्ड में भर्ती नहीं था, जबकि जिला कलक्टर के निर्देश पर चलाए गए लाडेसर अभियान के तहत सर्वे शुरू किया तो मात्र 12 दिन में ही जिले में 130 बच्चे अतिकुपोषित मिल गए, जिनमें से 7 बच्चों को सोमवार तक एमटीसी वार्ड में भर्ती करा दिया गया। इसी प्रकार सर्वे में 3596 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। यह आंकड़ा मात्र 40 प्रतिशत बच्चों की हैल्थ स्क्रीनिंग के बाद ही सामने आया है। शत-प्रतिशत बच्चों की हैल्थ स्क्रीनिंग के बाद यह आंकड़ा और अधिक बढ़ेगा।

संसाधनों की कमी भी बनी वजह
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिले में 0-5 साल तक के करीब 5.50 लाख बच्चे हैं, इसमें से 2 लाख 87 हजार 392 से अधिक बच्चों की हैल्थ स्क्रीनिंग ‘लाडेसर’ अभियान के तहत की जा चुकी है, 12 दिन की अवधि में 3596 बच्चे कुपोषित व 130 अतिकुपोषित श्रेणी में चिह्नित किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभाग द्वारा पूर्व में करीब पांच हजार कुपोषित बच्चे उनके रिकॉर्ड में चिह्नित थे, लेकिन एक मात्र जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल में ही एमटीसी वार्ड होने तथा उसमें भी 10 बेड की व्यवस्था होने के चलते अधिक बच्चों को भर्ती नहीं किया जा सकता था। जिले के मेड़ता, परबतसर व कुचामन के अस्पताल में एमटीसी वार्ड प्रस्तावित हैं, लेकिन वहां स्टाफ व संसाधन नहीं होने के कारण चालू नहीं है। यह बात भी सामने आई है कि सरकार द्वारा दिया जाने वाले पोषण किट में वह सब तत्व नहीं थे, जो बच्चों का कुपोषण दूर कर दे, जबकि अब अभियान के तहत जो किट दिया जा रहा है, उसमें सभी पोषक तत्व शामिल किए गए हैं।

नियमित होती है जांच
जिले में कुपोषित बच्चों को चिह्नित कर उन्हें सुपोषण दिया जाता है तथा अतिकुपोषित को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं एमटीसी वार्ड में भर्ती करवाकर नि:शुल्क उपचार करवाया जाता है। यह कार्य वर्ष भर अनवरत जारी रहता है।
- सिकरामाराम चोयल, उप निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, नागौर

एमटीसी वार्ड में 7 बच्चे भर्ती
जिले में वर्तमान में जिला मुख्यालय के जेएलएन अस्पताल में ही एमटीसी वार्ड संचालित हैं, जहां सोमवार तक 7 अतिकुपोषित बच्चों को भर्ती किया गया। लाडेसर अभियान शुरू होने से पहले यहां कोई बच्चा भर्ती नहीं था। मेड़ता, कुचामन व परबतसर के एमटीसी वार्ड फिलहाल बंद हैं।
- डॉ. मेहराम महिया, सीएमएचओ, नागौर

एक महीने बाद फिर करेंगे मॉनिटरिंग
जिले में कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों के साथ रक्त अल्पता वाली बालिकाओं को चिह्नित करके उन्हें स्वस्थ बनाने के लिए लाडेसर अभियान चलाया है, जिसमें दानदाताओं के सहयोग से पोषण किट भी दिया जा रहा है। इस अभियान के तहत जो बच्चे चिह्नित किए जाएंगे, उनकी एक महीने बाद फिर मॉनिटरिंग करेंगे और यह पता करेंगे कि उनके स्वास्थ्य में क्या अंतर आया है। हमारा उद्देश्य जिले से कुपोषण को मिटाना है।
- डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी, जिला कलक्टर, नागौर

shyam choudhary Reporting
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