भाद्रपद आधा बीता, औसत से कम बारिश, खरीफ का उत्पादन होगा प्रभावित

भाद्रपद आधा बीता, औसत से कम बारिश, खरीफ का उत्पादन होगा प्रभावित

Shyam Lal Choudhary | Publish: Sep, 09 2018 10:59:05 AM (IST) Nagaur, Rajasthan, India

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नागौर. देश केरल व उत्तराखंड में तथा प्रदेश के दक्षिणी जिलों में इस बार भले ही बारिश ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड तोड़े हों, लेकिन नागौर जिले में अब तक गत वर्ष से भी 65 मिलीमीटर बारिश कम हुई है। भाद्रपद माह आधा बीतने को है, लेकिन बादल छाए रहने के बावजूद इंद्र भगवान मेहरबान नहीं हो रहे हैं, जिसके चलते खरीफ की फसलें नष्ट हो रही हैं। यदि अगले चार-पांच दिन में बारिश नहीं हुई तो इस बार खरीफ का उत्पादन आधा रह जाएगा। गौरतलब है कि जिले की औसत बारिश 369 एमएम है, लेकिन पिछले पांच वर्षों में औसत बारिश 489 एमएम रही है। जबकि इस बार अब तक औसत बारिश 275 एमएम ही हुई है।

बादल छाए रहे, बरसे नहीं
इस बार जिले में पिछले करीब दो महीने से आसमान में बादल छाए हुए हैं, जिसके कारण धूप भी कम निकली है। बारिश नहीं होने से एक ओर जहां फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाया, वहीं लगातार बादल छाए रहने से चटक धूपके अभाव में खरीफ की फसलों में कीट भी लग गए, जिसके कारण किसानों को बार-बार कीटनाशकों को छिड़काव करना पड़ा।

लाडनूं-डीडवाना में गत वर्ष से ज्यादा बरसात
जिले में अब तक की औसत बरसात के आंकड़ों पर नजर डालें तो गत वर्ष 7 सितम्बर तक जहां 340 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई, वहीं इस बार मात्र 275 एमएम बारिश ही हुई है। इसमें नागौर में 174 एमएम, मूण्डवा में 233, खींवसर में 167, जायल में 228, मेड़ता में 313, रियां बड़ी में 352, डेगाना में 231, डीडवाना में 398, लाडनूं में 295, परबतसर में 295, मकराना में 215, नावां में 374 तथा कुचामन में 300 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई है। जिले की डीडवाना व लाडनूं ऐसी तहसील हैं जहां गत वर्ष की तुलना में इस बार अधिक बारिश हुई है। इसी प्रकार खींवसर व नागौर तहसीलों में सबसे कम बारिश हुई है।

उत्पादन प्रभावित होगा
सावन का पूरा महीना सूखा बीतने तथा जिले में औसत से कम बारिश होने से खरीफ की फसलें मुरझा गई हैं, इससे उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
- ब्रजपाल मंडा, कृषि अधिकारी, कृषि विभाग, नागौर

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