Nagaur patrika news. जान हथेली पर लेकर भागे-दौडते रहे, तभी बची जान

Nagaur. रात के अंधेरे में में अवैध बजरी खनन
-रात के अंधेरे में इमरजेंसी लाइट की रोशनी में जेसीबी से खुद रही नदी, निकल रही बजरी
-अंधेरे में ही बजरी से भरे वाहन गंतव्यों की ओर से हो रहे रवाना, सो रहे जिम्मेदार
-कार्रवाई के नाम पर प्रशासनिक लापरवाही से सरकार को प्रतिदिन हजारों के राजस्व का लगाया जा रहा चूना

By: Sharad Shukla

Published: 22 Nov 2020, 07:57 PM IST

नागौर. जिले के बजरी खनन माफिया प्रदेश सरकार के मुखिया का नहीे, खुद का राज चलाते हैं। वह खुलेआम कहते रहते हैं कि जिले में नदी के बजरी खनन क्षेत्र में उनका कानून चलता हैं। जहां पर रात्रि में भी खुलेआम बेधडक़ नदी का सीना फाडकऱ बजरी निकालते हुए नजर आ जाते हैं। राजस्थान पत्रिका की ओर से इसकी पड़ताल की गई तो मुख्य रूप से रियाबड़ी के नदी क्षेत्र में शुक्रवार रात्रि इमरजेंसी रोशनी में जेसीबी से बजरी खनन करते नजर आए। इस दौरान माफियाओं को राजस्थान पत्रिका टीम के आने की खबर मिली तो बमुश्किल जान बचाकर वहां से भागने की स्थिति आ गई। बचकर तो निकल आए, मगर रात्रि में भी कानून का बेखौँफ उल्लंघन देखकर इन माफियाओं के निडरता का एहसास भी हुआ।
आखों देखा हाल
राजस्थान पत्रिका की टीम बजरी के अवैध खनन की पड़ताल करने रियाबड़ी के नदी क्षेत्र में पहुंची। यहां पर चार से पांच जगहों पर अंधेरे को रोशन कर रही इमरजेंसी लाइट में जेसीबी भुजा से नदी से बजरी निकाली जा रही थी। जबकि यह पूरा नदी क्षेत्र प्रतिबंधित है। यहां पर कुछ कम रोशनी थी। इसमें फोटो करने का रात के अंधेरे में प्रयास किया गया, लेकिन पूरी तरह सफलता नहीं मिली। फिर भी जेसीबी मशीन की गडगड़़ाहट में माफियाओं की निगाह बचकर खड्ड के सहारे फोटो की गई। इसमें साफ तौर पर खनन करने का दृश्य नजर आ रहा था।
देखो बचकर भागने न पाए
रियाबड़ी क्षेत्र में ही नदी में कुछ दूरी पर दूसरी जगह पर पहुंचे तो यहां पर करीब दस मीटर से भी ज्यादा गहरा खड्ड था। रात होने की वजह से सर्दी भी लग रही थी। एक छोटे से खड्ड के सहारे बैठ कर देखा तो प्रतिबंध होने के बाद भी जेसीबी मशीन से बजरी निकाली जा रही थी। इस दौरान फोटो करने का प्रयास किया, रात्रि में तमाम सावधानी के बाद भी खनन करते लोगों की नजर पड़ी तो वह जोर से चिल्लाए कि अरे, यहां कोई फोटो कर रहा है। खनन कार्य में लगे पांच में से चार लोगो ने तुरन्त तलाश करनी शुरू कर दी। इस बीच उनकी नजर खड्ड के पास पड़ी तो कहा कि अरे, यहां पर कोई है देखो बचकर भागने न पाए। इनकी आवाज सुनते ही हमने अपनी टीम के साथ दौड़ लगा दी। रात्रि के अंधेरे में ही दौड़ते हुए करीब 20 मीटर दूर एक गहरे खड्ड के पास जाकर मिट्टी की आड़ में बैठ गए। वो इमरजेंसी लाइट की रोशनी में तलाश करते रहे। इस दौरान हम बचते-बचाते हुए वहां से निकले, और आगे करीब 100 मीटर दूर जाकर बैठे। वह तलाश करते हुए काफी दूर चले गए। तब जाकर राहत की सांस ली।
मिल जाए तो मत छोडऩा
रात्रि में पकड़ो-पकड़ों का शोर मचने के बाद भी हमने बर्फीली रात्रि में वहां से उसी क्षेत्र में एक जगह पर और पहुंचे तो यहां पर तो सात से आठ लोग मिले। एक जेसीबी मशीन से नदी क्षेत्र में ख्ुादाई कर रहा था, तो दूसरा उसे रखवा रहा था। यहां पर फोटो करने का प्रयास किया, लेकिन गलती से फोटो करते समय फ्लैश चमक गया। फ्लैश चमकते ही उन लोगों में हचलल मच गई। चिल्लाकर बोले कुण फोटो कर रहा है, देख तो...! फ्लैश चमकने के बाद वह भी इमरजेंसी लाइट की रोशनी के सहारे जहां पर बैठे थे खड्ड के पास वहां पर आ गए। इतने नजदीक देखकर हमे लगा कि अब पकड़ जाएंगे तो हमने पूरी ताकत से अपनी टीम के साथ दौड़ लगा दी, लेकिन उन्होंने देख लिया, और शोर मचा दिया पकड़े जाने का। इसके बाद थोड़ी ही देर में उनकी संख्या बढ़ती चली गई। लगा कि अब बच नहीं पाएंगे। आज यहीं पर मारे जाएंगे। इस सोच के साथ अंधेरे में अपनी जान से बेपरवाह पैदल चलने के नाकाबिल जगह पर कीड़ों की तरह रेंगते, दौड़ते हुए हम लगातार भागते चले गए। बाद में शोर थमा तो रात के अंधेरे में जहां पर गाड़ी छिपाकर खड़ी की थी, और शहर की ओर रवाना हो गए। इस दौरान रास्ते में दर्जनों बजरी लदी गाडिय़ां भी नजर आई, लेकिन वह जिम्मेदारों के सामने ही बेपरवाही से निकलती नजर आई।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी को भी दिखा दिया अंगूठा
गत 25 सितंबर को जिले में अवैध बजरी खनन क्षेत्र के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित आई सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने रियाबड़ी, आलनियावास आदि में नदी क्षेत्र का दौरा किया था। निरीक्षण के दौरान याचिकाकर्ता भी नवीन शर्मा भी मौजूद थे। इस दौरान कमेटी के सदस्यों ने खेतों को पचास साल के लिए लीज पर दिए जाने को गलत बताते हुए पूरे क्षेत्र में अवैध खनन पर नाराजगी भी जताई थी। इस दौरान जिला कलक्टर जितेन्द्र सोनी एवं एसपी श्वेता धनकड़ व खनिज विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। स्थिति यह रही कि टीम के दौरे के दौरान भी बजरी लदे डंपर की ओवरलोडेड एवं नदी क्षेत्र से ले जा रही जा रही बजरी की गाडिय़ों का परिवहन भी होता पाया गया था। एम्पावर्ड कमेटी के सामने अवैध बजरी खनन पर लगाम लगाए जाने का दावा करने वाले अधिकारी भी कमेटी के निकलते ही अपने चेंबरों में बैठ गए और, नदी क्षेत्र बजरी माफियाओं के भरोसे छोड़ दिया गया। नतीजतन यहां पर अब दिन में ही नहीं, बल्कि रात्रि में अवैध खनन कर हजारों का राजस्व चूना सरकार को लगाया जा रहा है।
थांवला थानाधिकारी हुए थे सस्पेंड, फिर नहीं ली नसीहत
सेन्ट्रल एम्पावर्ड कमेटी के दौरे के दौरान ही मौके पर मौजूद रहने की हिदायत मिलने के बाद भी तत्कालीन थानाधिकारी दीनदयाल अप्रत्याशित रूप से जयपुर चले गए थे। पूर्व में बजरी खनन के मामलों में इनकी भूमिका भी संदिग्ध होने के साथ ही इनको मौके पर मौजूद रहे जाने की हिदायत एसपी श्वेता धनकड़ ने दी थी, लेकिन एसपी के आदेश को दरकिनार करते हुए जयपुर चले गए। पता चलने पर इनको सस्पेंड कर दिया गया था।

Sharad Shukla Reporting
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