मूंग की तरह सरसों खरीद में भी वही टंटा, सरकार नहीं दे रही ध्यान

सरकार बदली पर नहीं सुधरी व्यवस्था : न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरसों की खरीद के लिए नहीं हो रहा किसानों का पंजीकरण
गत वर्ष मूंग खरीद के लिए भी किसानों को हुई थी परेशानी, एक अप्रेल से शुरू होनी है सरसों की एमएसपी पर सरकारी खरीद

By: shyam choudhary

Published: 29 Mar 2019, 08:05 PM IST

नागौर. प्रदेश में सरकार भले ही बदल गई है, लेकिन किसानों की समस्या जस की तस है। चुनाव प्रचार के दौरान किसान हितैषी होने का दावा करने वाली कांग्रेस की सरकार बनने के बावजूद किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरसों व चना बेचने के लिए पंजीयन कराने में परेशानी आ रही है। स्थिति यह है कि राजफैड ने मात्र दो दिन पंजीकरण प्रक्रिया चालू रखने के बाद बंद कर दी, जिससे जिले सहित प्रदेशभर के हजारों किसान टोकन लेने से वंचित रह गए। आगामी एक अप्रेल से सरसों व चने की एमएसपी पर सरकारी खरीद शुरू होनी है, लेकिन जिले में मात्र 8 हजार 116 किसानों का पंजीयन हो पाया है, इसमें 7 हजार 208 सरसों के हैं तथा 908 टोकन चने की खरीद के लिए हैं। पूरे प्रदेश के आंकड़ों पर नजर डालें तो 26 मार्च तक हुए पंजीयन के अनुसार चने के 88 हजार 881 टोकन कटे हैं और सरसों के 2 लाख 2 हजार 322 किसानों का पंजीकरण हुआ है।

ऐसे समझें पूरा गणित
नागौर जिले में एमएसपी पर सरसों व चने की खरीद के लिए कुल 8 हजार 839 किसानों का पंजीयन करने का लक्ष्य दिया है। प्रत्येक किसान से अधिकतम 25 क्विंटल सरसों व चने की खरीद की जाएगी। इसमें सरसों की एक लाख 98 हजार 275 क्विंटल तथा चने की 22 हजार 700 क्विंटल खरीद होगी, जबकि दूसरी तरफ उत्पादन की दृष्टि से देखें तो इस बार रबी में जिलेभर में सरसों की बुआई 38 हजार 500 हैक्टेयर में हुई है। सरसों का पिछले पांच साल का औसत उत्पादन देखें तो प्रति हैक्टेयर 11 क्विंटल 10 किलो है। इसके हिसाब से इस बार औसत उत्पादन 4 लाख 27 हजार 350 क्विंटल होगा। इसी प्रकार जिले में चने की बुआई 10 हजार 800 हैक्टेयर में हुई है। चने का पिछले पांच साल का औसत उत्पादन 9 क्विंटल 12 किलो रहा है, इसके हिसाब से इस बार चने का कुल उत्पादन 98 हजार 496 क्विंटल होगा। ऐसे में यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जहां जिले में करीब 5 लाख 25 हजार क्विंटल से अधिक सरसों व चने का उत्पादन होगा, वहां सरकार मात्र 2 लाख 20 हजार 975 क्विंटल की खरीद करेगी। मतलब यदि पंजीकरण प्रक्रिया दुबारा शुरू नहीं हुई तो हजारों किसानों अपनी उपज समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाएंगे।

जिले में दस केन्द्रों पर होगी खरीद
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आगामी एक अप्रेल से जिले के दस केन्द्रों पर सरसों व चने की समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू होगी। इसमें कुचामन, खींवसर, गच्छीपुरा, जायल, डेगाना, डीडवाना, नागौर, परबतसर, मेड़ता एवं मेड़ता प्रोजेक्ट (तिलमसंघ) को खरीद केन्द्र बनाया गया है। सभी केन्द्रों पर सरसों व चने की खरीद होगी।

चने के टोकन पूरे कट गए
नागौर सहकारी समितियां उप रजिस्ट्रार हरिश सिवासिया ने बताया कि नागौर जिले में चने की खरीद के लिए लक्ष्य के विरुद्ध शत-प्रतिशत पंजीकरण हो चुका है। इसमें कुचामन खरीद केन्द्र के लिए 189 टोकन का लक्ष्य था, जिसके विरुद्ध सभी टोकन कट गए। इसी प्रकार खींवसर में 63, गच्छीपुरा में 25, जायल में 63, डेगाना में 63, डीडवाना में 63, नागौर में 95, परबतसर में 126, मेड़ता में 95 एवं मेड़ता प्रोजेक्ट (तिलमसंघ) में 126 टोकन कटे हैं। यानी जिले में कुल 908 टोकन का लक्ष्य था, जो पूरा हो चुका है।

सरसों में गच्छीपुरा व परबतसर में शेष
सरसों की समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए जिले के दस केन्द्रों को दिए गए लक्ष्य के अनुसार गच्छीपुरा व परबतसर के अलावा अन्य आठ केन्द्रों पर पूरे टोकन कट चुके हैं। इसमें कुचामन में 867, खींवसर में 620, गच्छीपुरा में 248 की तुना 115, जायल में 620, डेगाना में 620, डीडवाना में 620, नागौर में 929, परबतसर में 1239 के स्थान पर 649, मेड़ता में 929 एवं मेड़ता प्रोजेक्ट (तिलमसंघ) में 1239 टोकन कटे हैं। यानी 7 हजार 931 के लक्ष्य के विरुद्ध 7 हजार 208 टोकन कट चुके हैं।

किसान हो रहे परेशान
गौतलब है कि गत वर्ष मूंग की एमएसपी खरीद के लिए तीन दिन पंजीकरण होने के बाद राजफैड ने पंजीयन प्रक्रिया बंद कर दी थी, जिसके बाद काफी विरोध प्रदर्शन हुए और राजफैड ने बीच-बीच में पंजीयन प्रक्रिया चालू कर थोड़ी राहत दी, लेकिन कई किसान अपनी उपज सरकारी मूल्य पर नहीं बेच पाए। यही स्थिति सरसों व चने की खरीद में होती नजर आ रही है। जिले के मात्र 8 हजार 116 किसानों का पंजीयन हो पाया है, जबकि सरसों व चने की बुआई करने वाले किसानों की संख्या करीब 12 से 15 हजार के बीच है।

हमारी तैयारियां पूरी
उच्चाधिकारियों से मिले निर्देशों के अनुसार हमने सरसों व चने की खरीद की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। अब तक जानकारी के अनुसार नागौर केन्द्र के लिए 229 किसानों ने पंजीयन करवाया है। खरीद को लेकर मंडी का एक नम्बर प्लेटफार्म भी खाली करवा दिया है।
- बाबूलाल भाकल, महाप्रबंधक, नागौर को-ऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी, नागौर

shyam choudhary Reporting
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