Nagaur patrika news. फिर नहीं लगा मंडी शुल्क, लाखों के राजस्व घाटे का झटका

Nagaur. फिर नहीं लगा मंडी शुल्क, लाखों के राजस्व घाटे का झटका-गत वर्ष मंडी शुल्क नहीं मिलने से चार करोड़ का लगा था फटका, पिछले तीन से चार सालों में मंडी शुल्क नहीं लगने के कारण करोड़ों की राजस्व हानि मंडी को पहुंची

By: Sharad Shukla

Published: 16 Dec 2020, 11:12 PM IST

नागौर. समर्थन मूल्य पर आने वाली मूंग के लिए मूंग पर इस बार भी मंडी शुल्क नहीं लगाया गया है। पिछले करीब तीन स े चार सालों से मंडी शुल्क नहीं लगने से अब तक करोड़ों के राजस्व का घाटा पहुंचा है। इस बार भी अकेले नागौर मंडी में तकरीबन एक हजार क्विंटल मूंग खरीद पर मंडी शुल्क नहीं लगने से लगभग दो लाख का घाटा पहुंचा है। जिले की अन्य मंडियों में भी हुई खरीद का आंकड़ा जोड़े जाने पर यह राजस्व हानि की राशि लाखों में पहुंच जाती है। इस संबंध में क्रय विक्रय समिति के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल अभी तक मंडी शुल्क चुकाने संबंधी कोई प्रपत्र उन्हें नहीं मिला है। इससे साफ है कि इस वर्ष भी समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद में किसान तो फायदे में रहेंगे, लेकिन मंडी को राजस्व का झटका लगा है। जानकारों का कहना है कि गत वर्ष हुई रिकार्ड खरीद में घाटे में रही मंडी प्रशासन के अधिकारी मंडी शुल्क के लिए प्रयास करने में लगे हुए हैं। ताकी इस वर्ष की स्थिति गत वर्ष से बेहतर हो सके। प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग सहित अन्य जिंसों की खरीद शुरू हो गई है। नागौर कृषि उपजमंडी में भी समर्थन मूल्य पर मूंग खरीद तो शुरू हो गई, लेकिन इस वर्ष भी मंडी शुल्क नहीं लगने से राजस्व घाटे के आसार नजर आने लगे हैं। समर्थन मूल्य खरीद शुरू होने के माह भर के अंतराल में भी लाखों की राजस्व हानि मंडी को पहुंच चुकी है। हालांकि पिछले साल प्रदेश में समर्थन मूल्य पर हुई खरीद के दौरान गत वर्ष सरकार की ओर से मंडी शुल्क नहीं लिए जाने के निर्देश ने कृषि उपजमंडियों को अत्याधिक आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। अकेले नागौर में पिछले दो-तीन सालों में भी यह राजस्व घाटा चार करोड़ से अधिक होने के कारण मंडी शुल्क का ग्राफ नीचे गिर गया था। विभागीय जानकारों का कहना है कि इस वर्ष इससे बचने के लिए कृषि विपणन बोर्ड के अधिकारी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है। मंडी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि इस बार हो रही खरीद में मंडी शुल्क लगाने पर नागौर कृषि उपजमंडी की राजस्व स्थिति काफी बेहतर हो सकती थी, लेकिन सरकार ने मंडी शुल्क नहीं लगाया। मंडी प्रशासन के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर वर्ष 2016-017 में 315890 मूंग भारतीय खाद्य निगम एवं उसके द्वारा नियुक्त संस्था क्रय विक्रय समिति की ओर से हुई खरीद पर 226 लाख रुपए मंडी को राजस्व के तौर पर मिले थे। आंकड़ों में 2016-017 में मंडी शुल्क 779.08 रहा, जबकि 2017-018 में मंडी शुल्क 726.02 रहा। इस तरह से औसतन सात प्रतिशत के राजस्व गिरावट के साथ पिछले साल मंडी भी पूरी तरह से घाटे में रही। इस बार भी यही स्थिति बन गई है। मंडी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि अब तक नागौर कृषि उपजमंडी में करीब एक हजार क्विंटल से ज्यादा की मूंग की खरीद हो चुकी है। इस पर मंडी शुल्क लग जाता तो फिर अब तक हजारों के राजस्व का इजाफा हो गया होता।सुविधा मंडी की, लेकिन शुल्क नहींमंडी प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि कृषि उपजमंडियों में खरीद के दौरान यार्ड मंडी का प्रयोग में लाया जाता है। किसानों का आवागमन भी मंडी के माध्यम से होता है। इसलिए इसके एवज में आंशिक रूप से 1.60 पैसे की दर से शुल्क लगने पर मंडी की भी माली हालत में न केवल और सुधार हो जाता, बल्कि किसानों पर भी ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।

इनका कहना है...

कृषि उपजमंडियो में होने वाली समर्थन मूल्य खरीद में मंडी शुल्क मिलने पर राजस्व स्थिति की बेहतर हो सकती है। इससे मंडी का ही विकास होता, और किसानों को भी सुविधा मिलती।

रघुराम, सचिव कृषिमंडी नागौर

Sharad Shukla Reporting
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