जिले में औषधीय पौधे बनाएंगे सेहत

नागौर. जिले में अब हर घर में जल्द ही औषधीय पौधे नजर आएंगे। वन विभाग की नर्सरियों में वनकर्मी गिलोय, अश्वगंधा एवं तुलसी सरीखे पौधों को विकसित करने में जुटे हैं। पौधों का वितरण चार- पांच चरणों में किया जाएगा। पहला चरण जुलाई के बाद शुरू होगा।

By: Ravindra Mishra

Updated: 12 Jul 2021, 11:14 PM IST


-घर-घर औषधि योजना के तहत वन विभाग एवं जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से पांच चरणों में गिलोय, तुलसी एवं अश्वगंधा पौधों का होगा वितरण
- पहला चरण जुलाई के बाद शुरू , योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए जिला स्तरीय टॉस्क फोर्स गठित, पहले चरण में दो लाख 84 हजार परिवारों में बंटेंगे पौधे

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना का उद्देश्य प्रत्येक घर में औषधीय पौधे लगवाना है, ताकि पर्यावरण के साथ लोगों की सेहत भी सही रहे। इस कार्य को अमलीजामा पहनाने के लिए जिला स्तरीय टॉस्क फोर्स का गठन किया गया है।
वन विभाग घर-घर तुलसी, अश्वगंधा, गिलोय एवं कालमेघ सरीखे पौधों का वितरण करेगा। जिले में विभाग की कुल 11 नर्सरियों को इसका जिम्मा सौंपा गया है। अकेले गोगेलाव नर्सरी में साढ़े तीन लाख से ज्यादा पौधे तैयार करने में कैटल गार्ड मनोहरसिंह राठौड़, प्रभुराम कस्वां एवं प्रभुराम हुड्डा की टीम लगी हुई है।

गोगेलाव में नर्सरी में लगे पौधों का विवरण
औषधी पौधे - संख्या

गिलोय -90000
अश्वगंधा- 90000

तुलसी -90000
कालमेघ -90000

इस तरह से होगा पौधों का वितरण
घर-घर औषधि योजना के तहत पहला चरण जुलाई में, दूसरा चरण अक्टूबर में चलेगा। इसके बाद तीसरे वर्ष शतप्रतिशत लोगों को पौधे दिए जाएंगे। चौथे एवं पांचवें चरण में पचास-पचास प्रतिशत पौधे प्रत्येक परिवार को मिलेंगे। विभाग की ओर से पहले चरण में दो लाख 88 हजार परिवारों में पौधों का वितरण होगा। कुल पांच लाख 34 हजार परिवारों में इसके वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रत्येक परिवार को सभी चरणों की समाप्ति तक आठ-आठ पौधे मिलेंगे।

इनका कहना है...
घर-घर औषधी योजना के तहत पांच चरण में कुल पांच लाख 34 परिवारों में पौधों का वितरण करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पहले चरण में ही ढाई लाख से ज्यादा परिवारों को पौधें मिलेंगे।

ज्ञानचंद मकवाना, उपवन संरक्षक, नागौर
फोटो नंबर 01-नागौर. गोगेलाव स्थित नर्सरी में तैयार हो रही औषधीय पौध


गिलोय खाने के लाभ
गिलोय बुखार में आयुर्वेदिक दवा का काम करता है। इसका इस्तेमाल डायबिटीज रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। डायबिटीज मरीज का ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है और पाचन तंत्र बेहतर बनाने के साथ इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मददगार होता है।

संक्रमण दूर करती है तुलसी
तुलसी के नियमित सेवन से शरीर में ऊर्जा का प्रवाह नियंत्रत रहता है। व्यक्ति की उम्र भी बढ़ती है। एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीबायोटिक गुण तुलसी में होते हैं, जो शरीर को संक्रमण से लडऩे के काबिल बनाती है। घर में तुलसी का पौधा होने से वातावरण शुद्ध रहता है और तुलसी संक्रमण रोगों से लड़ती है।

अश्वगंधा से दिल की बीमारी नहीं
अश्वगंधा का सेवन करने से दिल संबंधित बीमारियों का खतरा कम हो जाता है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंटीआक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होते हैं। इसका सेवन करने से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती है और बैड कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है।

कालमेघ का महत्व
कालमेघ का उपयोग मलेरिया, ब्रोंकाइटिस रोगों में किया जाता है। इसका उपयोग यकृत सम्बन्धी रोगों को दूर करने में होता है। इसकी जड़ का उपयोग भूख लगने वाली औषधि के रूप में भी होता है। कालमेघ का उपयोग पेट में गैस, अपच, पेट में केचुएं आदि को दूर करता है।

Ravindra Mishra
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