मुंबई से आया संदेश, तब जिला कलक्टर की खुली नींद

हादसे के शिकार हाथ-पैरों से लाचार पीडि़त की मदद के लिए अब जागे जिम्मेदार
वित्तीय मदद के लिए निजी कंपनी आगे आई तो जागा जिला प्रशासन, तीन साल से गोद में पति को लिए महिला भटकती रही, लेकिन अधिकारियों ने नहीं मदद, निजी कंपनी फाइनेंस के प्रतिनिधि पहुंचे पीडि़त के पास जानकारी लेने तो कलक्टर भी टीम गठित कर कराई जांच

By: Sharad Shukla

Published: 20 May 2019, 12:06 PM IST

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. छत से गिरने पर हादसे के शिकार, दोनों हाथों-पैरों से लाचार, गोद में पति लिए हुए जनसुनवाई में खड़ी महिला ने इलाज के लिए प्रशासनिक अधिकारियों से खूब मिन्नतें की, एक नहीं तीन बार...! इसके बाद भी कोई मदद नहीं की गई, हालांकि तत्कालीन कलक्टर ने व्यक्गितस्तर पर15 हजार की मदद की, और उसी दौरान सीएमएचओ को भी कहा। इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ। नतीजतन महिला तीन साल तक भटकती रही,और नागौर से लेकर जोधपुर एवं जयपुर के सरकारी एवं निजी हॉस्पिटलों में हुए इलाज में ही लाखों व्यय हो गए। अब एक निजी वाहन कंपनी के प्रतिनिधि ने पीडि़त से संपर्क कर मदद के लिए आश्वस्त किया तो इसके बाद जागे जिला कलक्टर ने रविवार को एसडीएम व दो चिकित्सकों की टीम गठित कर पीडि़त के घर भेज दिया। दल ने पीडि़त के घर पहुंचकर उसके स्वास्थ्य की जांच के बाद सरकारी योजनाओं के माध्यम से मदद की अनुशंसा के साथ रिपोर्ट कलक्टर को सौंप दी।
शहर के तेलीवाड़ा में रहने वाले करीब 35 वर्षीय श्यामलाल लोहार 19 सितंबर 2015 को रात्रि में छत से गिरा तो, जख्मी होने पर उसे निजी हॉस्पिटल से उपचार के बाद जोधपुर रेफर कर दिया गया। 14 सितंबर 015 से दो नवंबर 015 तक जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में भर्ती रहा। इसके बाद दो जनवरी 016 से छह जनवरी 016 तक जयपुर के श्रीराम हॉस्पिटल में भर्ती रहा। इस दौरान भामाशाह कार्ड के माध्यम से दवा आदि दिए जाने से हॉस्पिटलों ने साफ इंकार कर दिया। इंकार करने वाले निजी एवं सरकारी दोनों ही हॉस्पिटल रहे। खुद की जेब से खर्च के बाद पैसे कम पड़े तो राजूजी टेंट वाले एवं पिंटू और मोहल्लेवालों ने इसमें मदद की। क्षेत्रीय लोगों ने निजी स्तर पर मदद की, लेकिन राजकीय स्तर पर नि:शुल्क इलाज की सुविधा होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने मदद करने से हाथ खड़े कर लिए।
महिन्द्रा फाइनेंस के प्रतिनिधि पहुंचे पीडि़त के पास
इस संबंध में राजस्थान पत्रिका में खबरों के लगातार प्रकाशन के बाद जानकारी फाइनेंस कंपनी तक पहुंची। इसके बाद मुंबई से संबंधित कंपनी के उच्चाधिकारियों के निर्देश पर नागौर में फाइनेंस कंपनी के मैनेजर त्रिलोकराम रविवार सुबह पीडि़त श्यामलाल लुहार के पास पहुंचे। पूरे प्रकरण की जानकारी लेने के बाद पीडि़त का नंबर लेकर लौट गए। मैनेजर त्रिलोकराम ने बताया कि पूरी रिपोर्ट बनाकर मुंबई भेज दी है। अब अधिकारियों का जो भी निर्देश है, उसके अनुसार काम किया जाएगा।
कलक्टर ने भी टीम गठित कर भेजा पीडि़त के घर
जिला कलक्टर ने उपखण्ड अधिकारी दीपांशू सांगवान, अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी शीशराम चौधरी और जेएलएन के अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. महेश पंवार की टीम गठित कर पीडि़त के घर भेजी। उपखण्ड अधिकारी सांगवान एवं दोनों चिकित्सकों ने पीडि़त की जांच मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर कलक्टर को सौंप दी। रिपोर्ट में स्पष्ट कर दिया गया कि रोगी की शारीरिक स्थिति के अनुसार फिलहाल किसी भी हॉस्पिटल में इलाज कराने पर तत्काल फायदा नहीं मिलने वाला है। वर्तमान में जोधपुर से मरीज की ओर से मंगाई जा रही सभी दवाओं की विभाग स्थानीय स्तर पर ही व्यवस्था कर देगा। अब दवाएं जोधपुर से पीडि़त को नहीं मंगानी पड़ेगी। रिपोर्ट में कुल खर्च को महज 64 हजार 10 रुपए का बताया गया है।, सामाजिक कल्याण विभाग से येाजनगत सहायता दिलाए जाने के साथ ही आजीविका का कोई माध्यम नहीं होने से भामाशाहो ंसे मदद दिलाए जाने की सलाह दी गई है।

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