टीकाकरण में गड़बड़झाला, बिना टीका लगवाए ही आ रहे मैसेज व सर्टिफिकेट

पत्रिका एक्सपोज : सुबह 11 बजे गए तो बोले - नहीं लगेगी वैक्सीन, घर पहुंचने पर आए वैक्सीनेशन मैसेज व सर्टिफिकेट
- कम्प्यूटर ऑपरेटर बोला - किसी ने ओके कर दिया होगा

By: shyam choudhary

Updated: 06 May 2021, 04:22 PM IST

नागौर. 20 वर्षीय तरुण चौधरी अपने पिता प्रेमसुख जाजड़ा के साथ पुराना अस्पताल भवन में टीका लगवाने पहुंचता है और वहां सेवा दे रहे नर्सिंगकर्मियों को रजिस्ट्रेशन नम्बर बताकर टीका लगाने के लिए कहता है, लेकिन कर्मचारी उसे यह कहकर मना कर देते हैं कि 18-44 वर्ष आयु वर्ग के लिए अभी गाइडलाइन नहीं आई है। तरुण के टीका नहीं लगने पर उसके पिता भी बिना टीका लगवाए घर चले जाते हैं, लेकिन घर पहुंचकर मोबाइल देखते हैं तो मैसेज मिलता है, ‘कांग्रेचुलेशन, यू आर वैक्सीनेटेड, दूसरी डोज 2 जून को लगेगी।’ यह देखकर तरुण चौंक गया और उसने कोविन वेबसाइट जाकर देखा तो बाप-बेटे दोनों के सर्टिफिकेट भी जारी हो गए।

जी हां, बुधवार को जिला मुख्यालय पर ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें चिकित्साकर्मियों ने टीका लगवाने पहुंचे बाप-बेटे को पहले गाइडलाइन नहीं होने की बात कहकर टरका दिया और बाद में जब वे घर पहुंचे तो टीकाकरण का मैसेज भेज दिया। यही नहीं पत्रिका की पड़ताल में कुछ लोग ऐसे भी सामने आए हैं, जो पिछले कई दिनों से टीका लगवाने के लिए चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न तो उनके टीका लगा रहे हैं और न ही उन्हें टीका लगाने का सही समय बता रहे हैं। लायंस क्लब से जुड़े ईश्वर सोनी व मनोज कचौलिया का समाज सेवा में हर जगह योगदान रहता है। अस्पताल में जब भी रक्तदान शिविर कराना हो या फिर अन्य कोई छोटे-मोटे संसाधन उपलब्ध कराने हों, वे हमेशा तैयार रहते हैं। वर्तमान में ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए वे तीन ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन देने की योजना बना रहे हैं, इसको लेकर वे कलक्टर से भी मिल चुके हैं, इसके बावजूद सेवाभावी लोगों के साथ जब इस प्रकार का व्यवहार होता है तो कहीं न कहीं सिस्टम से भरोसा उठता है।

कुछ लोगों के कारण पूरे विभाग का नाम खराब
कोरोना महामारी के संकटकाल में एक ओर जहां डॉक्टर्स एवं नर्सिंगकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं, जिससे पिछले एक साल में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के प्रति आमजन में सम्मान की भावना बढ़ी है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के ही कुछ लोग छवि की धूमिल करने में लगे हैं। कभी बिना जांच किए किसी को पॉजिटिव बता रहे हैं तो कभी बिना टीका लगाए वैक्सीनेशन का मैसेज भेज रहे हैं।

पांच दिन से काट रहे चक्कर
मैं व मनोज कचौलिया पिछले पांच दिन से कोरोना टीके की दूसरी डोज लगवाने के लिए पुराना अस्पताल भवन व लौहारपुरा पीएचसी के चक्कर काट रहे हैं। कभी कहते हैं लेट हो गए तो कभी कहते हैं डोज खत्म हो गई। कल (मंगलवार) साढ़े 11 बजे गए तो बोले - वैक्सीन खत्म हो गई है, जबकि एक बजे दूसरे लोगों के टीका लगाया। आज हम (बुधवार) सुबह साढ़े 10 बजे ही चले गए, फिर भी टरका दिया। बोले - 10 बजे शुरू की, साढ़े 10 बजे खत्म हो गई। हम दोनों के पहली डोज लगे हुए 51 दिन हो गए हैं, लेकिन दूसरी डोज नहीं लग रही है।
- ईश्वर सोनी, समाजसेवी, नागौर

एक घंटे में कैसे बदल गई गाइडलाइन
मेरे बेटे तरुण चौधरी ने तीन दिन पहले वैक्सीन लगवाने के लिए ऑनलाइन पंजीयन करवाया तो हमें आज (बुधवार) सुबह 11 से दोपहर एक बजे के बीच पुराना अस्पताल भवन में टीका लगवाने का समय मिला। हम दोनों सुबह 11 बजे टीका लगवाने पहुंचे तो चिकित्साकर्मियों ने कहा कि 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग की अभी गाइडलाइन नहीं आई है, इसलिए तरुण के टीका नहीं लगेगा। इस पर हम दोनों बिना टीका लगवाए वापस घर चले गए। घर जाते ही मोबाइल पर दोनों के टीकाकरण का मैसेज आया, साथ ही कोविन वेबसाइट पर सर्टिफिकेट भी आ गए, जिसमें टीका लगाने वाले नर्सिंगकर्मी का नाम व समय भी लिखा हुआ है। इसके बाद तरुण ने हेल्पलाइन नम्बर पर बात की तो उन्होंने बताया कि यदि मैसेज आ गया है तो सेंटर पर सम्पर्क करें, अन्यथा बाद में टीका नहीं लगेगा। इस पर हम दोनों हाथों-हाथ वापस पुराना अस्पताल भवन पहुंचे तथा चिकित्साकर्मियों को मैसेज के बारे में बताया। इस पर वे हरकत में आए और बोले कि कोई बात नहीं आप अब टीका लगवा लो। मैंने कहा- एक घंटे पहले गाइडलाइन नहीं थी और अब आप किस नियम के तहत टीका लगाओगे, तब कर्मचारी मामला रफा-दफा करने की बात कहने लगे। इस प्रकार ये लोग पता नहीं कितने लोगों को टीका लगाए बिना ही मैसेज भेज रहे हैं, क्योंकि हर आदमी इतना जानकार नहीं होता कि वापस आकर पूछताछ करे। इस मामले की गंभीरता से जांच होनी चाहिए तथा दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
- प्रेमसुख जाजड़ा, कांग्रेस नेता, नागौर

हकीकत क्या : घर पर लग रहे टीके, इसलिए हो रहा फर्जीवाड़ा
कोरेाना महामारी की दूसरी लहर के कारण उत्पन्न हुई विकट परिस्थितियों में हर कोई टीकाकरण करवाना चाहता है, लेकिन वैक्सीन की कमी के कारण जिले में वैक्सीनेशन का काम ठप-सा है। बुधवार को बिना टीका लगाए ही मैसेज आने के तीन-चार प्रकरण सामने आने पर पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि कुछ कर्मचारी अपने रिश्तेदारों एवं चहेतों के बिना रजिस्ट्रेशन ही घर पर जाकर टीका लगा रहे हैं, ऐसे में उस डोज को रिकॉर्ड में दिखाने के लिए इस प्रकार की कारस्तानी हो रही है।

मैं पता करवाता हूं
बिना टीकाकरण मैसेज भेजना गलत है, मैं पता करवाता हूं कि ऐसे क्यों हुआ।
- डॉ. मेहराम महिया, सीएमएचओ, नागौर

shyam choudhary Reporting
और पढ़े

राजस्थान पत्रिका लाइव टीवी

हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned