वाहवाही लूटने के लिए एक साल बाद जागा खनिज विभाग

Nagaur. संभागीय स्तर पर अजमेर की ओर से नागौर के गोटन एरिया में ही केवल कराया गया सर्वे, जबकि अजमेर से सटे संभाग के अन्य जिलों एवं नागौर एमई, मकराना, एमई एरिया को इस सर्वे में शामिल नहीं करने से उठे सवालिया निशान, एक साल पहले हुए सर्वे पर कार्रवाई तो कर दी, लेकिन इस अवधि में अवैध खनन के एरिया में डेढ़ से दो गुना हुई वृद्धि को कर दिया गया नजरअंदाज

By: Sharad Shukla

Published: 01 Sep 2021, 11:27 PM IST

नागौर. खनिज विभाग ने संभाग स्तर पर गोटन में लीजों पर हुए सर्वे में करीब एक साल बाद कार्रवाई की। इतने लंबे समय के बाद जागे विभाग ने कार्रवाई करते हुए 28 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगा दिया। नहीं जमा होने पर 44 लीजों को बंद करा दिया। विभाग की ओर से हालांकि कहां गया कि यह संभागीय स्तर पर एक प्रायोगिक ड्रोन सर्वे था। प्रयोग सफल रहा तो अन्य जगहों पर इसे दोहराया जाएगा। जबकि इस दौरान संभाग के अन्य जिलों के साथ ही नागौर के सहायक अभियंता के क्षेत्र को इस सर्वे में शामिल करने की जरूरत तक नहीं समझी गई। यह स्थिति तब है जबकि अवैध खनन निर्गमन के पूर्व में कई प्रकरण यहां पर भी मिल चुके हैं। इससे विभाग की यह पूरी कार्रवाई पर सवालियान निशान लग गया है।
खनिज विभाग की ओर से नागौर के गोटन एरिया में व्यापक स्तर पर की गई कार्रवाई में एक साथ तीन दर्जन से ज्यादा बजरी की लीजों को बंद करने की कार्रवाई में खुद अधिकारी भी संदेह के घेरे में आ गए हैं। अधिकारिक सूत्रों के अनुसार अवैध खनन की शिकायत मिलने के बाद संभागीय स्तर पर अजमेर की ओर से यह गोटन एरिया के क्षेत्रों का ड्रोन सर्वे कराया गया। सर्वे होने के बाद इनके दस्तावेजों की जांच एवं व सर्वे की भौतिक स्थिति को सत्यापित करने में ही एक साल सरीखा लंबा समय लग गया। इसके बाद कार्रवाई भी हुई तो जुर्माना लगाकर इतिश्री कर ली गई। जुर्माना जमा नहीं होने की स्थिति में लीजों की गतिविधियां बंद करा दी गई। ऐसा विभागीय अधिकारियों का कहना है है।
नागौर व मकराना सहित अन्य जिले छोड़ दिए गए
सर्वे को लेकर विभागीय अधिकािरयों के पास इन सवालों का जवाब नहीं है कि उनकी ओर से यह सर्वे केवल नागौर के गोटन एमई एरिया में ही क्यों किया गया। जबकि संभाग स्तर पर अजमेर से सटे अन्य जिलों में भी अवैध खनन व्यापक स्तर पर हो रहा है। नागौर जिला क्षेत्र में भी नागौर एमई एरिया एवं मकराना एमई एरिया को छोड़ दिया गया। अकेले नागौर एमई एरिया में ही माणकपुरा, भावण्डा एवं छोटी खाटू आदि क्षेत्रों में खनिज पदार्थों के खनन में कई किलोमीटर लंबे एरिया में पहाड़ों को खोखला किया जा चुका है। इससे इन क्षेत्रों का जहां पूरा भूगोल बिगड़ गया है, वहीं विभाग की ओर से संभागीय स्तर पर सर्वे भी कराया गया तो तबाह-बरबाद हो रहे इसे क्षेत्र को भी पूरी तरह से अछूता छोड़ दिया गया। इन सभी जगहों पर अवैध खनन निर्गमन के कई प्रकरण पूर्व में सामने आ चुके हैं।
एक साल में बढ़ गया अवैध खनन.....बचते रहे अधिकारी
विभाग ने एक साल पूर्व कराए गए सर्वे के आधार पर कार्रवाई की, जबकि एक साल के दौरान नागौर जिले में अवैध खनन एरिया में फैलाव भी व्यापक स्तर पर बढ़ा है तो फिर कार्रवाई का आधार केवल एक साल पुराने रिकार्ड के आधार पर की गई या फिर वर्तमान में चल रहे अवैध खनन जांच के के आधार पर की गई। ऐसे में विभाग ने विभाग ने वर्तमान में चल रहे खनन क्षेत्रों की जांच कर कार्रवाई की होती तो संभवत: अवैध खनन कर्ताओ पर अंकुश लगता। इन सवालों के जवाब के लिए गोटन एवं नागौर एमई को फोन किया गया, लेकिन यह दोनों बातचीत करने से पूरी तरह बचते रहे, और फोन तक नहीं उठाया।
इनका कहना है...
नागौर के गोटन एरिया में प्रायोगिक तौर पर ड्रोन सर्वे करीब एक साल पहले कराया था। सर्वे में मिले तथ्यों का विश्लेषण करने के बाद कार्रवाई कर 28 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है। इसमें फिलहाल 30 से ज्यादा लीजों की गतिवधियां बंद करा दी गई है।

गुरुबक्शानी, एसएमई खनिज विभाग अजमेर

Sharad Shukla Reporting
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