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नागौर

निजी प्रेक्टिस पर ज्यादा ध्यान, सरकारी पर कम मेहरबान

जेएलएन अस्पताल के साठ फीसदी से अधिक डॉक्टर करते हैं निजी प्रेक्टिस, कुछ समय व ड्यूटी के पाबंद

नागौरJun 06, 2024 / 09:07 pm

Sandeep Pandey

देर से आकर जल्दी जाना अधिकांश डॉक्टरों की आदत में शुमार

मरीजों की लम्बी कतार करती डॉक्टर के आने का इंतजार

नागौर. सरकारी नौकरी के साथ निजी प्रेक्टिस अब अधिकांश डॉक्टरों का शगल बन चुका है। यही वजह है कि सरकारी ड्यूटी पर देर से आना और जल्द निकल जाना उनकी आदत में शुमार हो गया है। तकरीबन एक माह पहले जेएलएन अस्पताल की एमसीएच विंग में प्रसूता की मौत के पीछे भी यही वजह सामने आई कि ड््यूटी पर तैनात चिकित्सक वहां से नदारद था। मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है। यह तो एक उदाहरण है, आए दिन मरीजों के साथ दुर्व्यवहार, समय पर नहीं आने के कारण मरीजों की लम्बी कतार और निजी स्तर पर इलाज की तकरार अब सरकारी अस्पतालों में रोजमर्रा का किस्सा बन चुका है।
सूत्रों के अनुसार अकेले जेएलएन अस्पताल के साठ फीसदी यानी 48 में से तीस डॉक्टर नॉन प्रेक्टिस अलाउंस (एनपीए) ना लेकर निजी प्रेक्टिस कर रहे हैं। केवल 18 डॉक्टर ऐसे हैं जो एनपीए लेते हैं, इनकी सूची अस्पताल में बोर्ड पर दर्शाई गई है। यह तो केवल जेएलएन अस्पताल की बात है। नागौर जिले में फिलहाल करीब 200 डॉक्टर कार्यरत हैं जबकि 84 पोस्ट खाली हैं। इसमें कुचामन-डीडवाना को भी शामिल कर लें तो डॉक्टरों की संख्या करीब पौने चार सौ है। पीएचसी/सीएचसी समेत अन्य स्वास्थ्य केन्द्रों पर कार्यरत इनमें से भी कुछ डॉक्टरों के भी निजी प्रेक्टिस करने और सरकारी स्तर पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने के मामले सामने आते रहते हैं। वैसे तो हर माह इन्हें घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) देना पड़ता है कि वो एनपीए नहीं ले रहे। हालांकि जिलेभर में कई चिकित्सक ऐसे भी हैं जो एनपीए भी ले रहे हैं और प्राइवेट प्रेक्टिस के जरिए मोटी कमाई कर रहे हैं सो अलग।
कुछ समय पहले नागौर शहर में भी एक-दो डॉक्टरों का खुलासा हुआ था, जिन्होंने बाद में एनपीए लेना बंद किया। असल में मरीजों की सेवा के नाम से सरकारी नौकरी को धता बताकर कई डॉक्टरों की शिकायत उच्च अधिकारियों के पास भी पहुंचती रहती है,लेकिन इनका कुछ खास नहीं बिगड़ पाता। वैसे कई डॉक्टर ऐसे में हैं जिनकी लापरवाही के कारण प्रसूता अथवा बच्चे की मौत हुई और उनको जांच के बाद चार्जशीट तक मिली। उसके बाद भी वही रफ्तार बेढंगी रही।
मरीजों की मुश्किलें अनेक

सूत्र बताते हैं कि ड्यूटी पर लेट आना, मरीजों को देखकर औपचारिक उपचार करना। इतना ही नहीं व्यवहार भी सही नहीं और निजी स्तर पर उपचार लेने का दबाव अलग। बात यहीं तक नहीं है जेएलएन अस्पताल में एमसीएच विंग पर प्रसूता को निजी अस्पताल/डॉक्टर्स विशेष नर्सिंग होम में ले जाने के लिए एजेंट भी खूब दिखाई देते हैं। ऐसे में मरीज ऐसे डॉक्टर की अनदेखी करते हैं तो उन्हें मुश्किल झेलनी पड़ती है, ऑपरेशन हो या जांच, एक-दो दिन की जगह आठ-आठ दिन इंतजार कराया जाता है। ऐसे में कई बार मरीज की जान पर बन आती है ।
बदलने लगा ट्रेन्ड

यह भी सामने आया है कि अब होता यह है कि रोग के स्पेशलिस्ट डॉक्टर निजी स्तर पर प्रेक्टिस करते हैं तो शुरुआत में अस्पताल के बजाय उनके घर पर मरीज दिखाना शुरू करते हैं। बाद में जो इलाज सरकारी स्तर पर फ्री में होता है उसके बदले में मोटा बिल चुकाना पड़ता है। यह भी खुलासा हुआ कि अब मरीज भी सरकारी अस्पताल की कतार सहित अन्य समस्याओं से बचना चाहते हैं, वो निजी स्तर पर ऐसे डॉक्टर को पकड़ते हैं जो हो तो सरकारी, इलाज में एक्सपर्ट पर उपचार निजी स्तर पर करें, ताकि अन्य परेशानियों से निजात मिले।
सोनोग्राफी का हाल-बेहाल

बुधवार सुबह जेएलएन अस्पताल के सोनोग्राफी केन्द्र के बाहर अच्छी-खासी भीड़ थी। लोगों से बातचीत में सामने आया कि सोनोग्राफी के लिए पंद्रह-बीस दिन बाद आने को बोला जाता है, कई बार यह अवधि एक महीने हो जाती है। यह भी पता चला कि निजी स्तर पर किसी डॉक्टर के मरीज की सोनोग्राफी में देर नहीं की जाती। असल बात यह है कि गिनी-चुनी सोनोग्राफी करके मरीज को टरकाया जाता है। यह रोजाना की हकीकत है।कई डॉक्टर ऐसे भी…इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि कई डॉक्टर ऐसे भी हैं जो निजी प्रेक्टिस तो करते हैं पर अपनी ड्यूटी का पूरा ध्यान रखते हैं। कई समय पूर्व ही अस्पताल/डिस्पेंसरी पहुंच जाते हैं। अकेले जेएलएन अस्पताल में करीब एक दर्जन डॉक्टर ऐसे हैं जो निजी प्रेक्टिस भी करते हैं पर नौकरी को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं। अकेले जेएलएन अस्पताल में करीब एक दर्जन डॉक्टर ऐसे हैं जो निजी प्रेक्टिस भी करते हैं पर नौकरी को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं।
इनका कहना

एनपीए के संबंध में डॉक्टर्स को हर महीने घोषणा पत्र देना होता है। एनपीए उठाने के बाद भी निजी प्रेक्टिस वाले डॉक्टरों की जानकारी/शिकायत उन्हें नहीं मिली है। ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले चिकित्सकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
– डॉ .राकेश कुमावत, सीएमएचओ, नागौर ।

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