Video : नागौर के हैण्ड टूल्स उद्योग के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा MSME

एमएसएमई से नागौर के उद्योगों को नहीं मिल रही कोई सुविधा, मुल्तानी लौहार आजादी के समय से बना रहे हैं हैण्ड टूल्स

By: shyam choudhary

Published: 01 Jul 2020, 10:32 AM IST

Nagaur, Nagaur, Rajasthan, India

नागौर. देशभर में हैण्डटूल्स (हस्त औजार) बनाने में विशेष पहचान रखने वाले नागौर शहर के उद्यमियों के लिए एमएसएमई (लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम) सफेद हाथी साबित हो रहा है। भारत सरकार ने भले ही 20 लाख करोड़ के पैकेज में एमएसएमई को बड़ा बजट देने की घोषणा की है, लेकिन नागौर में शायद ही कोई उद्यमी होगा, जिसमें लॉकडाउन के बाद अपने उद्योग को खड़ा करने के लिए बैंकों से ऋण लेने में सफलता हासिल की हो। हैण्ड टूल्स उद्योग से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि एमएसएमई उनके लिए उपयोगहीन साबित हो रहा है। नागौर में विभाग द्वारा रखी गई करोड़ों रुपए की मशीनें उनके लिए कोई काम नहीं आ रही हैं। साल में एक-दो बार प्रदर्शनी लगाई जाती है, लेकिन उनमें भी बाहर के उद्यमी या कम्पनी नहीं आने से औपचारिकता पूरी हो पाती है।

फैक्ट फाइल
- हैण्डटूल्स उद्योग का सालाना टर्न ओवर - 25 करोड़ रुपए
- जिला मुख्यालय पर कुल इकाइयां - 55 लगभग
- हैण्ड टूल्स उद्योग में कार्यरत श्रमिक व कारीगर - 10 हजार लगभग

पहले बनाते थे तोपें, आज बना रहे हस्त औजार
आजादी से पूर्व रजवाड़ों के काल में मुल्तान से आए लौहारों ने यहां तोपें बनाने का काम शुरू किया। अंग्रेजों के शासन में तोपों का काम बंद हुआ तो ताले बनाने लगे, लेकिन समय के साथ ताले भी बंद होने लगे। इसके बाद इन कारीगरों ने सुनारी औजार बनाने शुरू किए, लेकिन 60 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय उप प्रधानमंत्री रहे मोरारजी देसाई द्वारा लगाए गए गोल्ड एक्ट के कारण सोने का काम कम हो गया, जिसने नागौर के कारीगरों की कमर तोड़ दी। इसके बाद मुल्तानी कारीगरों ने बाजार की मांग के अनुसार हस्त औजार बनाने शुरू किए, जो आज भी बना रहे हैं और बहुत कम रेट में बाजार में उपलब्ध करवा रहे हैं।

बैंकों में धक्कों के अलावा कुछ नहीं मिलता
सरकार एवं विभागीय अधिकारी भले ही लघु एवं सूक्ष्म उद्योग को ऋण देने की बात करते हैं, लेकिन जब उद्यमी बैंक में ऋण लेने जाता है तो उन्हें वहां धक्कों के अलावा कुछ नहीं मिलता। उद्यमियों से इतनी कागजी कार्रवाई पूरी करवाते हैं कि वे ऋण लेने में सफल नहीं हो पाते। नागौर के हैण्डटूल्स को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार को सस्ती दर पर बिजली देनी चाहिए। टेक्स में भी बड़े उद्योगों की तुलना में रियायत मिलनी चाहिए।
- सनत कानूनगो, सचिव, नागौर इंडस्ट्रीयल एसोसिएशन, नागौर

हमारा काम ट्रेनिंग देना है
एमएसएमई में दो विभाग है, जिसमें हमारा काम ट्रेनिंग देने का ही है। जहां तक ऋण देने की बात है तो फिलहाल सरकार ने पूर्व में लिए गए ऋण पर सब्सिडी की सुविधा की है।
- गौतम मैटी, फील्ड ऑफिसर ट्रेनिंग, एमएसएमई, नागौर

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